ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
2018 dec
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सितंबर की हवा मेरा समय
सितंबर की हवा मेरा समय सितंबर की हवा सरसराती, फरफरातीअपने रेशमी परों में आसमान को समेटतीदेर बाद मिलने वाली सहेली की तरह मुझसे लिपटती सितंबर की हवा। कुछ भींनी, कुछ नमकुछ शीतल, कुछ गरमकुछ तेज, कुछ मध्यम
चरवाहे के साथ शब्द हो जाते हैं दुर्निवार
चरवाहे के साथ	शब्द हो जाते हैं दुर्निवार चरवाहे के साथ मैं नहीं समझता राग-बन्दिशें-ख्याल, आरोह-अवरोह फिर भी बहुत अच्छा लगता है तुम्हारा गाना लय-अलय। तुम्हारे स्वर आकुल बार-बार झंकृत करते हैं मन क्या होता है ऐसा किउदासी
सूखे पत्ते
सूखे पत्ते मुझे कुछ सूखे पत्तों परटहलनें की तमन्ना हैअकेले दूर तक चुपचापख़ुद अपने ख़्यालों केसिमटते फैलते सायों केझुरमुट से जुदा होकरनये इक मील पत्थर सेगुज़रने की तमन्ना है। ज़मीं से आस्मां के बीचबस थ
गर्व ही नहीं, चिंतन का क्षण भी
गर्व ही नहीं, चिंतन का क्षण भी भारत के एक दृढ़ निश्चयी नायक, स्वतंत्रता सेनानी, प्रथम उप प्रधानमंत्री और लौह-पुरुष के नाम से विख्यात सरदार पटेल की लगभग तीन हजार करोड़ रुपए की लागत से निर्मित, दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा का उनके 144वें जन्म दिन 31 अक्तूबर को बड़े तामझाम से लोकार्पण
जनता की आलोचना
जनता की आलोचना नेताओं की आलोचना खूब होती है पर जनता की आलोचना कोई नहीं करता। आजकल नेता यह कहते हुए पाये जाते हैं कि देश की सवा सौ करोड़ जनता उनकी मालिक है और वे जनता के नौकर हैं। नौकरों की आलोचना करने वाले थक गये हैं और नौकर इतनी मोटी चमड़ी के हैं कि उन पर कोई असर
भारत से प्रेम की कहानी
भारत से प्रेम की कहानी इज़राइल में 18 साल की उम्र के प्रत्येक युवक को सेना में शामिल होने और तीन साल तक सेवा करने के लिये कानून द्वारा बाध्य किया जाता है। और आम तौर पर सैनिक सेवा पूरी करने के बाद बहुत से युवा लोग कुछ महीनों के लिये भारत की यात्रा पर जाते हैं। मैंने भी ऐस
थाईलैंड में भारत के धारावाहिक
थाईलैंड में भारत के धारावाहिक पिछलों तीस सालों में अनेक धारावाहिक थाईलैंड में लोकप्रिय थे। मसलन जापानी, चीनी, कोरिया और भारतीय। लेकिन भारत के धारावाहिक धीरे-धीरे खो गए, परंतु सन् 2015 में भारत के धारावाहिक फ़िर थाईलैंड में लोकप्रिय हुए। विशेष तौर पर ऐसे धारावाहिक जिनके नामों और
आधी दुनिया - अधूरी दुनिया
आधी दुनिया - अधूरी दुनिया भगवान ने अपनी तरफ़ से बड़े इंतज़ाम के साथ कार्य प्रारम्भ किया था। एक अच्छे सीईओ की तरह उन्होंने दो बराबर के पार्टनर बनाये - आदम और हौव्वा। उनके लिये रोटी, कपड़ा और मकान का पूरा बंदोबस्त किया गया था। उन्हें खुली छूट थी कि वे जैसे चाहें दुनिया काम को अन
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-24 दूत हनुमान : भाग-3
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-24 दूत हनुमान : भाग-3 एक संदेशवाहक का मुख्य उद्देश्य सन्देश को सही व्यक्ति तक सही तरीके से सही समय पर पहुँचाना होता है। वह सन्देश पाने वाले को भलीभाँति पहचान कर ही सन्देश देता है। कुछ खास परिस्थितियों में पहचान करने में अत्यंत विश्लेषण व सावधानी की ज़रूरत होती है। हनुमा
यायावर शिल्पी - पण्डित बनारसीदास चतुर्वेदी
यायावर शिल्पी - पण्डित बनारसीदास चतुर्वेदी पण्डित बनारसी दास चतुर्वेदी 20वीं सदी की शुरूआत में भारत के उन लोगों में से एक हैं जो स्वतंत्रता संग्राम को प्रारंभ होता देख रहे थे और उसके समानांतर स्वतंत्र हिंदी पत्रकारिता की चिंता भी उन्हें थी। वे अकेले पत्रकार नहीं थे, उन्हें पत्रकारिता को सा
अंग्रेजी का साम्राज्यवाद?
अंग्रेजी का साम्राज्यवाद? इस वर्ष हिंदी दिवस के अवसर पर दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में बोलते हुए माननीय उप राष्ट्रपति ने दो-टूक शब्दों में कहा कि अंग्रेज चले गए, लेकिन अपने पीछे एक बेशर्म बीमारी छोड़ गए, जिससे हम सत्तर वर्षों के बाद भी पीछा नहीं छुड़ा पा रहे हैं। अब
एक और सच
एक और सच सामने औंधे मुँह पड़ी वह औरत बस हड्डियों का ढाँचा मात्र थी जो जरा भी हिलाने-डुलाने क्या, छूने तक से टूट सकती थी। सूखे फूल-सी झर सकती थी। मुझे यह सब तभी समझ लेना चाहिए था जब सुबह-सुबह, सात बजे, बारबरा का फोन आया था- "हमारी मदद करो। यहाँ क्राइसिस सेंट
कमलेश्वर की गंगा और लोगों के स्नान
कमलेश्वर की गंगा और लोगों के स्नान कमलेश्वर जी ने जब "गंगा" पत्रिका के सम्पादन का भार सम्भाला तो उन्होंने पत्रिका में लोगों की जम के धुलाई की तथा उसे नाम दिया, "गंगा स्नान"। उन्होंने जुलाई, "86 में "मित्र प्रकाशन" के मालिक को गंगा स्नान कराया था, जिस पुण्य के प्रसाद स्वरूप "मित्र प
मासानाम् मार्ग-शीर्षः अहम्
मासानाम् मार्ग-शीर्षः अहम् हेमन्त ऋतु का आगमन हो चुका। हेमन्त का नामकरण हिम (ड़दृथ्ड्ड) से हुआ है। हिम शब्द की व्युत्पत्ति है - हन्, मारना और मक् प्रत्यय; यहाँ हन् की जगह "हि" ले लेता है। भारत में मध्य नवम्बर से मध्य जनवरी तक हेमन्त का समय है। यह भीषण जाड़े की ऋतु है। इस कारण
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