ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
2018 aug
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चल लिये कितने कदम
चल लिये कितने कदम मानवता की राह पर, बढ़ चलें अब ये कदम,भूलकर निज स्वार्थ हम, थाम लें हर हाथ हमन पैर अपने डगमगायें, न तूफ़ान हमको रोक पाये न समन्दर में हो दम, रोक ले अपने कदमआये पर्वत राह में, लाँघ कर उसके शिखरजब तलक मंज़िल मिले, न रुकें अ
बहुत याद आये प्रेम-पखेरू
बहुत याद आये प्रेम-पखेरू बहुत याद आये बहुत याद आयेवे जो जिन्होंनेसफर के दिनों मेंमेरे गीत गाकरमुझको सुनाये। बहुत याद आये परिचित सुपरचितवे जो जिन्होंनेपैर के नीचे के काँटे चुराये। बहुत याद आयेवे
मेरी दुनिया के तमाम बच्चे
मेरी दुनिया के तमाम बच्चे वो जमा होंगे एक दिन और खेलेंगे एक साथ मिलकरवो साफ़-सुथरी दीवारों परपेंसिल की नोक रगड़ेंगेवो कुत्तों से बतियाएँगेऔर बकरियों सेऔर हरे टिड्डों सेऔर चीटियों से भी। वो दौड़ेंगे बेतहाशाहवा और धूप की म
मगर देखो, कहाँ पहुँचे
मगर देखो, कहाँ पहुँचे यदि किसी कवि की एक पंक्ति भी लोक में इतना गहरे तक पैठ जाए कि वह अपनी बात कहने के लिए उसका सहारा ले तो समझिए रचनाकार सफल है, उसका जीवन सार्थक हो गया। लेकिन यह सौभाग्य सबको नहीं क्योंकि सब में इतनी क्षमता नहीं होती। किसी लेखक को खुद को कोट नहीं करना
जन्मजात साक्षर विश्व की कविता
जन्मजात साक्षर विश्व की कविता कुछ कवि ऐसे होते हैं जिनकी कविताएँ अलग-अलग समयों में अपने अर्थ खोलती हैं। महाकवि तुलसीदास ऐसे ही कवि हैं जो जीवन भर हमारे साथ चलते हैं।अपने स्वभाव और प्रकृति से प्राप्त कर्मों पर आधारित हमने अपना वर्ण पाया है। उसका कोई विकल्प हमारे पास नहीं
स्त्री और आबादी
स्त्री और आबादी दुनिया की वर्तमान 7.6 अरब आबादी (वर्ष 2017), संयुक्त राष्ट्र संघ (यूनाइटेड नेशन्स) के अनुसार वर्ष 2030 में बढ़कर 8.6 अरब, वर्ष 2050 में 9.8 अरब, और वर्ष 2100 में 11.2 अरब हो जायेगी। जनसंख्या में सर्वाधिक बढ़ोतरी अफ़्रीका व एशियाई देशों में हो रही हैं
पॉलिथीन और पाबंदी
पॉलिथीन और पाबंदी बा जार से सब्जी लाना हो या पैक दूध या फिर किराना या कपड़े, पॉलिथीन के प्रति लोभ ना तो दुकानदार छोड़ पा रहे हैं, ना ही खरीदार। पॉलिथीन न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य को भी नष्ट करने पर आमादा है। इससे बचने के लिए वैकल्पिक उत्पादों पर हमें गौर
समाधि-दर्शन : बिन्दु-बिन्दु विचार
समाधि-दर्शन : बिन्दु-बिन्दु विचार हिन्दू-दर्शन में कपिल मुनि सांख्ययोग (ज्ञानयोग) के प्रवर्तक माने जाते हैं और पतंजलि योग-सूत्र (राजयोग) के। सांख्य-दर्शन के अनुसार (1) दैहिक, (2) भौतिक, तथा (3) दैविक दु:खों (क्लेशों) का निवारण किया जा सकता, परन्तु इसके लिये सही ज्ञान की प्राप्ति क
ऑस्ट्रेलिया में हिंदी का "दिनेश" अस्त
ऑस्ट्रेलिया में हिंदी का ऑस्ट्रेलिया को प्रवासियों का देश कहा जाता है क्योंकि वहां की आबादी में प्रमुखता विश्व के तमाम देशों से आए प्रवासियों की ही है। इनमें सर्वाधिक संख्या यूरोपीय देशों से आए लोगों में ब्रिटेनवासियों की है, वहीं एशियाई देशों से आए लोगों में चीनी और भारत
विद्रोह की गाथाओं के गायक हरबोले
विद्रोह की गाथाओं के गायक हरबोले हरबोला कई स्रोतों और दिशाओं से उद्गमित और विकसित एक लोकगाथा गायक जाति है। किसी एक पहचान में बाँधकर इनका पूरा परिचय नहीं दिया जा सकता। ये लोग स्वयं को अहीर बताते हैं, क्योंकि गाथा गायन और भिक्षाटन के अलावा ये पशुपालन का काम भी करते हैं। किन्तु अहीर
रजनी पणिकर महिलाओं की मसीहा
रजनी पणिकर महिलाओं की मसीहा सुप्रसिद्ध लेखिका रजनी पणिकर जी रेडियो में उच्च पदाधिकारी थीं। उन्होंने मुझ छोटी-सी को बड़े अवसर दिए।सबसे पहले मैंने उन्हें एक इंटरव्यू बोर्ड में देखा था। तब मैं उन्हें पहचानती नहीं थी। आकाशवाणी, दिल्ली के परिवार नियोजन विभाग में स्क्रिप्ट रा
सावन का महीना : डमरु बाजै चहुँओर
सावन का महीना : डमरु बाजै चहुँओर सावन आ गया। सावन अथवा श्रावण माह का नामकरण इस महीने की पूर्णिमा पर चन्द्रमा का श्रवण नक्षत्र के आसपास होना है। श्रवण नक्षत्र में तीन तारे हैं, जिन्हें वैष्णव मत मानने वाले वामन रूपधारी विष्णु का तीन पग बताते हैं। वामन ने पहले पग में आकाश नाप दिया
एक फ़ैन का इकबालिया बयान
एक फ़ैन का इकबालिया बयान हिन्दी की वरिष्ठ एवं बहुआयामी लेखिका चित्रा मुद्गल यूं तो उम्र में मुझसे पांच साल बड़ी हैं पर उन्होंने मुझे कभी ऐसा महसूस नहीं होने दिया, हम जब भी मिलते हैं, बचपन की सहेलियों की तरह मिलते हैं और यही उनकी सबसे बड़ी खूबी है। हर बार जब मैं दिल्ली जाती
अंतरराष्ट्रीय हिंदी उत्सव क्यों?
अंतरराष्ट्रीय हिंदी उत्सव क्यों? वर्ष 1989 में एक बहुत बड़े हिदी सम्मेलन का आयोजन किया था। सम्मेलन की विशेषता यह थी कि उसमें चार से अधिक प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने भाग लिया था। ऐसा लगता था कि हिंदी भाषी प्रदेशों के राजनीतिक प्रमुख हिंदी के लिए कोई संयुक्त रणनीति बनाएंगे। सम्मेल
कुछ पुर्जियाँ, कुछ चिंदियाँ
कुछ पुर्जियाँ, कुछ चिंदियाँ "लिखे हुए" को "सुनाना" कोई कवि आखिर श्रोताओं के सामने कविता पढ़ता ही क्यों है?अरब श्रोताओं के सामने कविता पढ़ने का आखिरी मौका मुझे 1995 में मिला था। बेशक, हर कविता-पाठ के अपने खास तनाव होते हैं और मैं कह सकती हूँ कि वह कविता-पाठ मेरे ज
शब्द, रंग और जीवन
शब्द, रंग और जीवन पिछले दिनों सुप्रतिष्ठित चित्रकार, लेखक श्री अमृतलाल बेगड़ का दीर्घायु प्राप्त करने के बाद मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में निधन हो गया। बंगाल स्कूल से दीक्षित बेगड़ जी ने अपनी चित्रकला में लोकरंगी जीवन और उसकी संस्कृति को कई-कई बार उकेरा और उसके रेखाचि
हिंदी में शोध, बिना बोध
हिंदी में शोध, बिना बोध देश के शीर्ष विश्वविद्यालय जेएनयू में होने व समकालीन विमर्शों में सक्रिय होने के कारण अक्सर इस तरह के ई-मेल और फोन आते हैं जिनमें सामने वाला कहता है, "मेरे भाई या मेरी पत्नी या मुझे पीएच.डी. करनी है। कोई विषय बता दीजिए।" कुछ फोन इस प्रकार के भी आत
वर्तनी : भ्रम व्याप्ति
वर्तनी : भ्रम व्याप्ति कहावत तो बहुत पुरानी है- "अपनी-अपनी ढफली, अपना-अपना राग", जो आज के समय में बड़ी ही सटीक और उपयुक्त है। आज जब सब मनुष्य केवल अपनी-अपनी कहना चाहते हैं, सुनने में किसी की रुचि बची ही नहीं। ऐसे में किसी की त्रुटियों को इंगित करना सबसे बड़ा जोखिम का काम
मैं अकेला नहीं
मैं अकेला नहीं हमारी टोली में तीन-तीन प्रशिक्षणाधीन मजिस्ट्रेटों को जिला मुख्यालय पर जिला न्यायाधीश के पास तीन माह के प्रशिक्षणार्थ भेजा गया था। राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी मरुभाग बीकानेर में मेरा प्रशिक्षणकाल वैसे तो आनन्दपूर्वक ही बीता। लेकिन उन दिनों मई, जून और
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