ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
मन की बात (8)
प्रवासी भारतीय दिवस एक सामयिक चेतना
01-Jan-2017 11:57 PM 1316 प्रवासी भारतीय दिवस एक सामयिक चेतना

भारतीय मूल के लोग बड़ी संख्या में कई दशकों से विदेशों में बसे हुए हैं और उन्होंने प्रत्येक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जिसमें व्यवसाय, शिक्षा, नौकरी, वैज्ञानिक एवं तकनीकी सन्दर्भ शामिल है


डॉ. कौशल किशोर श्रीवास्तव Author : डॉ. कौशल किशोर श्रीवास्तव, India
हिंदी प्रवासी साहित्य से अपेक्षाएँ
01-Jan-2017 12:17 AM 1313 हिंदी प्रवासी साहित्य से अपेक्षाएँ

भारत से प्रवास पर जाने का कार्य सदैव होता रहा है। आवागमन के साधनों ने इस प्रक्रिया में और तेजी ला दी है। भारतीय प्रवासी दुनिया के कोने-कोने में बसे हुए हैं। असगर वजाहत वर्तमान साहित्य के प्रवासी मह


डॉ. विजय शर्मा Author : डॉ. विजय शर्मा, INDIA
हिंदी साहित्य में प्रवासीपन का फतवा
01-Jan-2017 12:14 AM 1305 हिंदी साहित्य में प्रवासीपन का फतवा

अंडा जब बाहर से फोड़ा जाता है तो एक हत्या बन जाता है, परन्तु जब वह अन्दर से फोड़ा जाता है तो एक सृजन! साहित्य सृजन भी ऐसी ही एक प्रक्रिया है। जो आतंरिक ऊर्जा पककर प्रस्फुटित होती है वह नव रचना है। वि


कादम्बरी मेहरा Author : कादम्बरी मेहरा, INDIA
सुनहरे भविष्य की रौशनी का सच
01-Jan-2017 12:12 AM 1290 सुनहरे भविष्य की रौशनी का सच

आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि एनआरआई याने अपने देश से दूर दोहरी जिंदगी जीने वाला भारतीय। भारत में अक्सर ही इन्हें बहुत सफल माना जाता है जिनका अपना एक विशेष स्टेटस बना हुआ है। विदेश में वे अपनी पहचान


अपर्णा राय Author : अपर्णा राय, USA
आसान नहीं है वापसी की राह
01-Jan-2017 12:10 AM 1288 आसान नहीं है वापसी की राह

प्रवासी यानी वे लोग जो जन्मभूमि को छोड़ कर कहीं और जा बसते हैं। कुछ लोग गाँव से शहर, शहर से प्रान्त छोड़ते हैं और कुछ हमारे जैसे चाहे-अनचाहे सूदूर देशों में जा बसे हैं किन्तु फिर भी किसी न किसी माध्य


अनुपमा दीक्षित Author : अनुपमा दीक्षित,
शून्य दाता शून्य?
01-Jan-2017 12:05 AM 1296 शून्य दाता शून्य?

पतझड़ के पत्ते
जो जमीं पे गिरे हैं
चमकते दमकते
सुनहरे हैं

पत्ते जो पेड़ पर
अब भी लगे हैं
वो मेरे दोस्त,
सुन, हरे हैं
 
मौसम से सीखो
इसमें


राहुल उपाध्याय Author : राहुल उपाध्याय, INDIA
उत्सव और उल्लास के बीच
01-Jan-2017 12:02 AM 1289 उत्सव और उल्लास के बीच

मनुष्य एक उत्सव-धर्मी जीव है लेकिन यह उत्सव-धर्मिता उसकी सुरक्षा, समृद्धि और विश्वास पर निर्भर करती है। जिस साल फसल खराब हो जाती है तो किसान के लिए दिवाली का कोई अर्थ नहीं रह जाता। आतंक, अनास्था और


रमेश जोशी Author : रमेश जोशी, USA
प्रवासी दिवस औचित्य और उद्देश्य
01-Jan-2017 12:00 AM 1284 प्रवासी दिवस  औचित्य और उद्देश्य

भारत के विकास के लिए प्रवासी भारतीय समुदाय के योगदान को चिन्हित करने के लिए प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला प्रवासी भारतीय दिवस एक अच्छा प्रयास सिद्ध हो सकता है। महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से भारत व


अनुराग शर्मा Author : अनुराग शर्मा, America
कविता (7)
यहाँ पर भीड़ में सब अजनबी हैं
01-Jan-2017 01:52 AM 2583 यहाँ पर भीड़ में सब अजनबी हैं

शायर जनाब अनवारे इस्लाम की बात करती हुई ग़ज़लों की किताब का शीर्षक है- मिजाज़ कैसा है।
उस की आँखों में आ गए आंसू
मैंने पूछा मिजाज़ कैसा है
दूर तक रेत ही चमकती है
कोई पानी नहीं है धो


नीरज गोस्वामी Author : नीरज गोस्वामी ,
गुनियाँ प्लैटफ़ॉर्म
01-Jan-2017 01:46 AM 2586 गुनियाँ प्लैटफ़ॉर्म

गुनियाँ

माँ ने चिरैया का नाम
रखा था "गुनियाँ"
कभी सूप पर आ बैठती
और तकती थी माँ की ऐनक को
कभी फुदक कर
आरसी (दर्पण) के सामने जा बैठती थी
लड़त


गिरीश पान्डे Author : गिरीश पान्डे "देवयोगी", America
ऐ जिंदगी तू मेरी धुन गा के तो देख
01-Jan-2017 01:38 AM 2573 ऐ जिंदगी तू मेरी धुन  गा के तो देख

ऐ जिंदगी

ऐ जिंदगी गर्दिश का तारा न बन
बेशक धूप और छाया न बन
बनना है तो बन जा मेरी हिम्मत
यूं काँटों का ताज न बन।

मेरे रूठे अल्फाज की कहानी


सोनल शर्मा Author : सोनल शर्मा,
स्वीकार
01-Jan-2017 01:33 AM 2188 स्वीकार

नैया पर मैं बैठ अकेली
निकली हूँ लाने उपहार
भव-सागर में भंवर बड़े हैं
दूभर उठना इनका भार
ना कोई मांझी ना पतवार
खड़ी मैं सागर में मंझधार
फिर भी जीवन है स्वीकार।

रा


सविता अग्रवाल सवि Author : सविता अग्रवाल सवि,
उम्मीद का आसमान
01-Jan-2017 01:22 AM 2189 उम्मीद का आसमान

देश में हर जगह नक़ली नोट थे
डरता था बिना जुर्म के पकड़ा ना जाऊँ
देश की मुद्रा बदल दिल से
डर की याद भुला दी मोदी ने।

डर लगता था सड़क पे निकल कर
कहीं कोई आतकंवादी बम न फ


सुशील कुमार कालरा Author : सुशील कुमार कालरा, Australia
चिन्ता
01-Jan-2017 01:17 AM 2191 चिन्ता

कहते हैं लोग
कोई साथ नहीं निभाता
चिन्ता से पूछो
कैसे नाता निभाया जाता
चिन्ता तो परछाई है
कब अलग किसी से रह पाई
विरला ही होगा
जिसे इसने नहीं घेरा
सब को एक


कृष्णा वर्मा Author : कृष्णा वर्मा,
प्रेम का बन्धन
01-Jan-2017 01:13 AM 2571 प्रेम का बन्धन

लम्बा प्रवास, भारत की तैयारी थी, न थे पैर जमीं पर
आकाश में मैं उड़ती थी, आ पहुँची मैं वतन अपने पर
इन्दिरा गाँधी एयरपोर्ट पर, धीमी बत्तियां जलती थीं
अमेरिका की चकाचौंध के बाद, मीठी-सी


नीलू गुप्ता Author : नीलू गुप्ता, America
शब्द चित्र (5)
घर सँवरने से दुनिया सँवरती है
01-Jan-2017 12:54 AM 1387 घर सँवरने से दुनिया सँवरती है

मेरा घर अब दोस्तों को अपने घर से दूर लगता है। मुझे बच्चे घर से दूर लगते हैं। मैं भी घर से कुछ दूर जाता सा लगता हूँ। क्या घर से दूर जाने के लिए ही घर में रहने आया हूँ? श्यामला हमेशा घर में रहती है।


ध्रुव शुक्ल Author : ध्रुव शुक्ल, INDIA
तरक्की की राह पर दौड़ने के आशय
01-Jan-2017 12:47 AM 1306 तरक्की की राह पर दौड़ने के आशय

यहाँ कनाडा में हम साल में दो बार समय के साथ छेड़छाड़ करते हैं जिसे डे लाईट सेविंग के नाम से जाना जाता है। एक तो मार्च के दूसरे रविवार को समय घड़ी में एक घंटा आगे बढ़ा देते हैं और नवम्बर के पहले रविवार


समीर लाल Author : समीर लाल "समीर",
शहरों का शहर
01-Jan-2017 12:44 AM 1298 शहरों का शहर

पेरिस के प्रवास में जो भला-बुरा देखा अगर वो सब बताने की कोशिश की जाए तो कभी बातें ही ख़त्म ना हों। कम ही लोगों को मालूम होगा कि पेरिस को फ्रेंच में पाही बोला जाता है। आज भले ही एफ़िल टॉवर इस नगर की प


दीपक चौरसिया Author : दीपक चौरसिया "मशाल", UK
इंडोनेशिया में भारतवंशी छवियाँ
01-Jan-2017 12:42 AM 1289 इंडोनेशिया में भारतवंशी छवियाँ

इंडोनेशिया के प्रवासी भारतीयों पर बात करने बैठे तो दिल-दिमाग की डायरी के बहुत से पन्ने खुलते जा रहे हैं। पहली बार वहां एक अध्यापक के तौर पर जाने का मौका मिला। उस समय बहुत सी ऊहापोह थी, लेकिन जाने क


डॉ. मधु चतुर्वेदी Author : डॉ. मधु चतुर्वेदी , INDIA
वर्जीनिया इज़ फ़ॉर लवर्स
01-Jan-2017 12:38 AM 1285 वर्जीनिया इज़ फ़ॉर लवर्स

हिंदुस्तान की सर ज़मीन से विवाहोपरांत जब पैर उखड़े तो सीधे अमेरिका की धरती पर आकर पड़े। यहाँ की चौड़ी-चौड़ी, साफ़-सुथरी सड़कें, उन पर क़तारों में चलती बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ, गगनचुंबी इमारतें और इन सबसे कुछ ही दू


विनीता तिवारी Author : विनीता तिवारी, America
साक्षात्कार (2)
आपसी सहयोग से ही विकास संभव है
01-Jan-2017 12:30 AM 1267 आपसी सहयोग से ही  विकास संभव है

मालदीव में भारत के राजदूत अखिलेश मिश्र से आत्माराम शर्मा की बातचीत

भारतीय विदेश सेवा के 1989 बैच के अधिकारी श्री अखिलेश मिश्र विगत एक वर्ष से मालदीव में भारत के राजदूत ह


आत्माराम शर्मा Author : आत्माराम शर्मा, INDIA
हमारा अतीत एक है, हमें गले लगाएँ
01-Jan-2017 12:24 AM 1276 हमारा अतीत एक है, हमें गले लगाएँ

नीदरलैंड के भारतवंशी व्यवसायी भगवान प्रसाद से सुषमा शर्मा की बातचीत

अपनी तरह से जीने वाले कुछ शख्स अपनी तरह के होते हैं जो दूसरों के लिये ही जीते हैं। पूंजीवाद के इस जटि


सुषमा शर्मा Author : सुषमा शर्मा, India
शख़्सियत (1)
फ़िल्मों के विस्मृत इतिहास पुरुष निरंजन पाल
01-Jan-2017 12:34 AM 1268 फ़िल्मों के विस्मृत इतिहास पुरुष  निरंजन पाल

ब्रिटिश और भारतीय फ़िल्मों के निर्माण में साझेदारी की नींव रखने वाले फ़िल्म-कहानीकार, पटकथा लेखक, फ़िल्म निर्माता और साहित्यकार निरंजन पाल ऐसे पहले भारतीय थे, जिन्होंने अपनी कृतियों द्वारा भारतीय और य


ललित मोहन जोशी Author : ललित मोहन जोशी ,
सन्दर्भ (1)
दसवां विश्व हिन्दी सम्मेलन राष्ट्रभाषा की वैश्विक यात्रा को लगे पंख
01-Jan-2017 12:57 AM 1297 दसवां विश्व हिन्दी सम्मेलन राष्ट्रभाषा की वैश्विक यात्रा को लगे पंख

अभी तक चर्चा का विषय रहता था ""सूचना प्रौद्योगिकी में हिन्दी"", परन्तु इस सम्मेलन के फलस्वरूप दिशा परिवर्तन हो गया है और अब विमर्श का विषय बनेगा ""हिन्दी में सूचना प्रौद्योगिकी""। ये प्रतिक्रिया थी


प्रो. बृज किशोर कुठियाला Author : प्रो. बृज किशोर कुठियाला, INDIA
सामयिक (1)
भारतीय बैंकिग और अर्थ-व्यवस्था
01-Jan-2017 12:21 AM 1252 भारतीय बैंकिग और अर्थ-व्यवस्था

मुझे अपने एक चीनी मित्र से पता चला कि वे अपना बैंकिंग चीन की बैंकों से करते हैं। मैंने उनसे कौतुहलवश पूछा कि आप ऐसा क्यों करते हैं? उन्होंने अपने जवाब में कोई देश-भक्ति की बात नहीं कही, कोई डींग भी


हरिहर झा Author : हरिहर झा, ऑस्ट्रेलिया
विमर्श (1)
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-15 दण्डकारण्य हिंदी अनुवाद : संजीव त्रिपाठी
01-Jan-2017 01:06 AM 1344 वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-15 दण्डकारण्य हिंदी अनुवाद : संजीव त्रिपाठी

रामायण की कहानी मुख्यतः तीन भोगोलिक भूभागों में बुनी गई है, उनमें से प्रथम है "अयोध्या" और उसका समीपवर्ती क्षेत्र, दूसरा दक्षिण भारत का विस्तृत वनक्षेत्र "दण्डकारण्य" और तीसरा समुद्र में स्थित "लंक


डॉ. विजय मिश्र Author : डॉ. विजय मिश्र, INDIA
रम्य रचना (1)
प्रवासी दिवस के बहाने
01-Jan-2017 01:04 AM 2121 प्रवासी दिवस के बहाने

गये ज़माने में जब जनसंख्या कम थी तो लोग मिलजुल कर रहते थे। रिश्तों की क़दर करते थे। अब जनसंख्या विस्फ़ोट के कारण धरती पर भीड़ बढ़ गयी है। संयुक्त परिवार न्यूक्लियर फॅमिलियों में बंट गये हैं। रिश्ते घट ग


सुधा दीक्षित Author : सुधा दीक्षित, INDIA
सम्पादकीय (1)
वासी, प्रवासी, अप्रवासी
01-Jan-2017 12:00 AM 1315 वासी, प्रवासी, अप्रवासी

लगभग आधी सदी पहले राजकपूर अभिनीत एक फिल्म - जिस देश में गंगा बहती है बनी थी और उसका शैलेन्द्र का लिखा हुआ एक गीत बहुत प्रसिद्ध हुआ - होठों पे सचाई रहती है, जहाँ दिल में सफाई रहती है, हम उस देश के व


सुषमा शर्मा Author : सुषमा शर्मा, India
कहानी (1)
अरमान है
01-Jan-2017 01:10 AM 2112 अरमान है

सड़क किनारे एक छोटी-सी दुकान की रंग-बिरंगी दीवार से शरीर को टिकाए, बदरंगे, मटमैले से कपड़ों में तेज़ बारिश में भीगने से अपने को बचाता हुआ वह, कान से चिपके पुराने मॉडल के मोबाइल पर ऊँची आवाज़ में न जाने


अंजली त्रिपाठी Author : अंजली त्रिपाठी , Singapore
श्रद्धांजली (1)
चले गए अनुपम भाई
01-Jan-2017 11:50 PM 1296 चले गए अनुपम भाई

उन दिनों कॉलेज में था। आपातकाल में सेंसरशिप का विरोध करते हुए पत्रकारिता की शुरुआत हो गई थी। शायद उन्नीस सौ पचहत्तर या छियत्तर के आसपास अनुपम भाई से मुलाक़ात हुई थी और तब से लेकर उनके आख़िरी सफ़र पर ज


राजेश बादल Author : राजेश बादल, India
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