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2017 JUL
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उत्तर भारत की लोक कथाओं के संदर्भ
उत्तर भारत की लोक कथाओं के संदर्भ लोक कथाएं हमारी संस्कृति, परम्पराओं और नित्य की जीवन शैली में इस प्रकार रची बसी हैं कि उनसे अपनी धरती की सोंधी मिट्टी की सुगंध, मधुर बयार की ताजगी, कलकल करती नदियों की शीतलता और गुनगनी धूप की गर्माहट अनुभव की जा सकती है। लोेक कथाएं अनादिकाल से मौख
पंजाब की लोककथाओं का संसार
पंजाब की लोककथाओं का संसार लोक साहित्य जनमानस की सहज और स्वाभाविक अभिव्यक्ति है। यह प्राचीन समय से मौखिक रूप में प्रचलित है। परन्तु आज कुछ लोकसाहित्य को लिपिबद्ध किया गया है। लोक साहित्य सदैव भाव प्रधान रहा है, इसमें मानव हृदय की गूँज सुनाई देती है। यह लोकगीत, लोकशिल्प, लोक
बुन्देली साहित्य में लोक कथाएं
बुन्देली साहित्य में लोक कथाएं प्रत्यक्षदर्शी लोकानां सर्वदर्शी भवेन्नरः - महर्षि व्यास ने सत्य ही लिखा है कि लोक जीवन का प्रत्यक्ष ज्ञान ही जीवन को उसके मंगल कलश रूपी अन्तः वाह्य को जानने का एक आधार है। लोक जीवन मानव जीवन को सम्पूर्णता से समझने का माध्यम है। लोक जीवन भौतिक और
छत का टपका और चोर
छत का टपका और चोर बहुत समय पहले की बात है। जापान के कुमामोतो प्रदेश में एक बूढ़ा और बुढ़िया अपने छोटे-से पुराने घर में रहते थे। यह घर बहुत पुराना हो गया था और बरसात के दिनों में तो घर में रहना भी मुश्किल हो जाता था। इस बूढ़े व्यक्ति के पास एक बढ़िया नस्ल का घोड़ा था जिस
फिकुल थौंग
फिकुल थौंग एक समय की बात है थाईलैंड में फिकुल नाम की एक लड़की रहती थी। कहा जाता है कि वो न केवल सुन्दर थी, बल्कि व्यवहार में भी वह बहुत अच्छी थी। जब वह बहुत छोटी थी तभी उसकी माँ की मृत्यु हो गयी थी। वो अपनी सौतली माँ के साथ रहती थी जिसकी माली नाम की बेटी थी।
जंतुओं की भाषा
जंतुओं की भाषा प्रा    चीनकाल में एक राजा अपने राज्य में घूम रहा    था। उसकी मुलाकात एक मछुआरे से हुई। वह    बाजार जाने के लिए तैयार हो रहा था कि राजा ने उससे पूछा- "यह मछली तुम कितने में बेच रह
महिलाओं के खिलाफ हिंसा का उन्मूलन
महिलाओं के खिलाफ हिंसा का उन्मूलन महिलाओं के खिलाफ हिंसा हमारे समाज की सबसे अहम समस्याओं में से एक है। संयुक्त राष्ट्र की परिभाषा के अनुसार महिलाओं के खिलाफ हिंसा - यह महिलाओं के खिलाफ लिंग के आधार पर किया शारीरिक, यौन, मनोवैज्ञानिक नुकसान और हिंसा है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मा
ख्याल रूह
ख्याल रूह ख्यालहोता है हर शख्स को ख्यालों से अपने प्यारलगता है उसको उम्दासिर्फ अपना ही बस ख्यालहै ये इंसानी फितरतजिसे करता है वह बार-बार।ख्याल कितना भी हो खूबसूरतजब तक नहीं होता है उसका
पिता और कवि
पिता और कवि पिता अपनी एक कविता रचते हुए कहते हैं कि – बाँस की पोर ने मुझे पहना है और मेरे भीतर कोई अज्ञात अँगुलियाँ उसे छूती रहती हैं जैसे वे मुझमें कोई स्वर ढूँढ रही हों । उनका यह भाव जानकर लगता है कि पिता तो अनन्त काल से अपने से बाहर आकर कुछ कहना चाहत
लोक स्वयंभू होता है
लोक स्वयंभू होता है बाग़, बगीचे एक योजनाबद्ध तरीके से, किसी उद्देश्य विशेष के लिए लगाए जाते हैं। उनकी सार-सँभाल और विशेष व्यवस्था करनी होती है। वे किसी कारणवश नष्ट भी हो सकते हैं लेकिन जंगल उगाए या लगाए नहीं जाते। वे स्वाभाविक रूप से बनते और जीवित रहते हैं, जंगलों में
कथामय विश्व
कथामय विश्व सं    सार की काल और गति को जानने के लिये मनुष्य ने    जो पहले दो प्रयत्न किये होंगे उनमें पहला एक-दूसरे    से सम्वाद और दूसरा सम्वाद करते हुए बन गयी कोई लोक कथा ही होगी। भारत का समस्त दर्शन
रामफल का झोला
रामफल का झोला योअर ऑनर, बड़ा भाई कत्र्ता था। पिता ने जमीन के तीन हिस्से किये थे। एक इनका, एक आवेदक का और एक आवेदक के पुत्र का। बड़े भाई को बच्चा नहीं था। बाद में इनके यहाँ बीस साल के बाद हुआ, इसलिए ये आवेदक के पुत्र का भाग नहीं दे रहे हैं, जबकि इनके पुत्र का हिस्
लंका का साम्राज्य
लंका का साम्राज्य रामायण की कहानी का ऐतिहासिक महत्व जानना हमेशा ही चर्चा का विषय रहा है। इस कहानी में एक वीर पुरुष के यथार्थ जीवन के अनेकानेक रोचक प्रसंग दक्षिण भारत के अनेक रहस्यों से जुड़े हुये हैं। सभी रहस्यमयी वस्तुओं में से वृक्षों के ऊपर चलने वाला स्वचलित यान
लोक की कथाएँ और व्यथाएँ
लोक की कथाएँ और व्यथाएँ एक बार की बात है... सुनते ही कान खड़े हो जाते हैं। भाइयों और बहनों! इस असार संसार में सर्वाधिक सारगर्भित बात वह होती है जो एकदम सस्ती सुन्दर और टिकाऊ होती है। हम या आप में से कितने लोग शोध ग्रन्थ पढ़ते हैं? अजी शोध ग्रन्थ तो बहुत दूर की चीज़ है (निहा
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