ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
2017 FEB
कविता (5)
पलाश शिरीष के फूल
01-Feb-2017 12:57 AM 761 पलाश शिरीष के फूल

पलाश

झूम रहे हैं पलाश
हौले-हौले
ओढ़ ओढ़नी
नुपुर बजाते खवाबों के
खिल गये हैं
पलाश

मौसम के आँगन में
अहसास के परिंदों पर
सु


डॉ. सरस्वती माथुर Author : डॉ. सरस्वती माथुर, INDIA
मेरी कविता
01-Feb-2017 12:52 AM 684 मेरी कविता

गाय को गुड़
चिड़िया को दाना
भूखे की रोटी है कविता
सूरदास की आंख
जटायू पांख है कविता
कभी खेत की फसल
वीरों की नस्ल है कविता

पर आज उदास है मेरी कविता
बाजा


मुरलीधर वैष्णव Author : मुरलीधर वैष्णव, INDIA
मूक दीवारें मोह के धागे
01-Feb-2017 12:48 AM 656 मूक दीवारें मोह के धागे

मूक दीवारें

जिंदगी की चहक कुछ और ही होती
काश दीवारें सुनने के साथ
कुछ कह भी सकतीं
जमाना जान जाता
भीतर उमड़ते
उस ज्वालामुखी का आक्रोश
कई रा


रेखा भाटिया Author : रेखा भाटिया,
ऋतुराज बसन्त
01-Feb-2017 12:45 AM 654 ऋतुराज बसन्त

आ गया ऋतुराज बसन्त ।
छा गया ऋतुराज बसन्त ।।
हरित घेंघरी पीत चुनरिया  
पहिन प्रकृति ने ली अँगड़ाई
नव-समृद्धि पा विनत हुए तरु
झूम उठी देखो अमराई।
आज सुखद सुरभित सा क


शकुन्तला बहादुर Author : शकुन्तला बहादुर ,
मन व्यथित मेरे प्रवासी गीत में जो ढल रहा है
01-Feb-2017 12:40 AM 642 मन व्यथित मेरे प्रवासी  गीत में जो ढल रहा है

मन व्यथित मेरे प्रवासी

आज फिर इस धुन्ध में डूबी हुई स्मॄति के किनारे
किसलिये तू आ गया है? ओढ़ कर बैठा उदासी

स्वप्न की चंचल पतंगों का अभी तक कौन धागा


राकेश खंडेलवाल Author : राकेश खंडेलवाल, America
संस्मरण (5)
फिजी में रामायण मेला
01-Feb-2017 12:22 AM 586 फिजी में रामायण मेला

भारत से लगभग बारह हजार किलोमीटर सुदूर पूर्व दिशा में बसे छोटे से फिजी द्वीप में, अक्तूबर 2016 में, पहला अन्तर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन हुआ। यह सर्वविदित है कि हमारे देश से 1879-1916 के बीच लगभग साठ


डॉ. सीतेश आलोक Author : डॉ. सीतेश आलोक, INDIA
एडिनबर्ग नहीं एडनबरा
01-Feb-2017 12:18 AM 609 एडिनबर्ग नहीं एडनबरा

विचार बना कि जब यॉर्क, यू.के. तक आ ही गये हैं तो दो दिनों के लिए ऐतिहासिक नगरी एडनबर्ग, स्कॉटलैंड भी हो आया जाया। इच्छा जाहिर करने पर सबसे पहले यह बताया गया कि इस शहर को लिखते एडनबर्ग हैं मगर कहते


समीर लाल Author : समीर लाल "समीर",
ऐतिहासिक शहरों की रोमांचक यात्रा
01-Feb-2017 12:15 AM 588 ऐतिहासिक शहरों की रोमांचक यात्रा

सेंट लुइस मिसौरी प्रान्त में एक बहुत बड़ा और खूबसूरत शहर है जो की मिसिसिप्पी नदी के किनारे पर है। बहुत समय से इस शहर को देखने का मन था इसलिए हाल ही में वहां जाने का अच्छा अवसर मिला। कभी पहले किसी ने


अपर्णा राय Author : अपर्णा राय, USA
अमेरिका में रहकर भारत की ललक
01-Feb-2017 12:09 AM 2060 अमेरिका में रहकर भारत की ललक

भारतवंशी रहें कहीं भी दूर या पास, हृदय में बंशी भारत की ही बजती है। कितने भी सुख साधन उपलब्ध हों, दिल की हर धड़कन में नाम भारत का ही धड़कता है। दूर, सुदूर रहकर जब कोई अपना भारतवंशी मिलता है तो लगता ह


नीलू गुप्ता Author : नीलू गुप्ता, America
कहानी (1)
वह तैयार है
01-Feb-2017 12:37 AM 678 वह तैयार है

ईवान का चेहरा पीला पड़ा हुआ था। हाथों में थरथाराने की कंपन थी। उसने अपनी फाइलों और नोटबुक से अँटी मेज़ का कोना पकड़ लिया। कुछ पल वह ऐसे ही खड़ी रही। पीछे से उसे नैंसी का स्वर सुनाई दिया, "क्या हुआ ईवान


डॉ. शैलजा सक्सेना Author : डॉ. शैलजा सक्सेना,
यात्रा-संदर्भ (1)
पण्डित पदयात्रियों की हिमालय यात्राएँ
01-Feb-2017 12:02 AM 2440 पण्डित पदयात्रियों की हिमालय यात्राएँ

भारत में सन् 1857 के असफल स्वतंत्रता संग्राम ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी की चूलें हिला दी थीं। तत्कालीन सरकार देश के अंदरूनी इलाकों के साथ-साथ सीमावर्ती प्रदेशों को सुरक्षित करने में जुट गयी। भारत की उत


अनुपमा दीक्षित Author : अनुपमा दीक्षित,
यात्रा-वृत्तांत (1)
पालिम्यू जंगल और अमर इंडियन
01-Feb-2017 12:05 AM 2069 पालिम्यू जंगल और अमर इंडियन

तारीखों के इतिहास में बंद पड़ा है अतीत के एक सौ चालीस वर्षों का दर्दनाक इतिहास। अहर्निश होने वाली वर्षा ने धोया है, बहाया है दु:ख-दर्द का इतिहास। लेकिन पानी के धोने और बहाने से नहीं खतम होता है-ऐतिह


प्रो. डॉ. पुष्पिता अवस्थी Author : प्रो. डॉ. पुष्पिता अवस्थी, Netherlands
शायरी की बात (1)
मैं उस जगह हूँ जहाँ फासला रहे तुमसे
01-Feb-2017 01:02 AM 641 मैं उस जगह हूँ जहाँ फासला रहे तुमसे

जयपुर के लोकायत प्रकाशन पर जिस किताब पर मेरी नज़र पड़ी, वह थी आवाज़ चली आती है। इस नायाब किताब के शायर हैं मरहूम जनाब शाज़ तमकनत साहब। हिंदी पाठकों के लिए शायद ये नाम अंजाना हो लेकिन दकन में इनका नाम ब


नीरज गोस्वामी Author : नीरज गोस्वामी ,
जन्नत की हकीकत (1)
देखणा सो भूलणा नहीं
01-Feb-2017 12:30 AM 617 देखणा सो भूलणा नहीं

जीव का मूल स्वभाव है जिज्ञासा। यह उसकी मूलभूत जैविक आवश्यकताओं के कारण भी हो सकती है और मानसिक व वैचारिक ज़रूरतों के तहत भी। यह जिज्ञासा ही जीव को घुमाती है, सिखाती है और भटकाती भी है। परिस्थितिवश य


रमेश जोशी Author : रमेश जोशी, USA
सम्पादकीय (1)
अरे यायावर रहेगा याद
01-Feb-2017 12:00 AM 2429 अरे यायावर रहेगा याद

आज यात्राएं होती हैं पर वे पूंजी निवेश के लिये जितनी हैं उतनी शब्द निवेश के लिये नहीं। शब्द निवेश के बिना पूंजी की अर्थहीनता विश्व को ही डुबो देगी। क्योंकि विश्व पूंजी में नहीं शब्द में बसता है। इस


सुषमा शर्मा Author : सुषमा शर्मा, India
शब्द चित्र (1)
होना शुरू होना
01-Feb-2017 12:28 AM 610 होना शुरू होना

सागर शहर की झील के किनारे नजरबाग की सीढ़ियों पर बैठा निर्मल वर्मा के निबन्धों की किताब -- शब्द और स्मृति -- पढ़ रहा हूँ। जैसे कोई जलस्रोत किसी नदी में मिल जाने के लिए आकुल हो। दूर ठहरी हुई शब्दों की


ध्रुव शुक्ल Author : ध्रुव शुक्ल, INDIA
विमर्श (1)
अमेरिकन-ऑस्ट्रेलियन संस्कृति के बिम्ब
01-Feb-2017 12:32 AM 587 अमेरिकन-ऑस्ट्रेलियन संस्कृति के बिम्ब

छब्बीस वर्ष पूर्व मैं भारत छोड़कर ऑस्ट्रेलिया आया था, यहाँ बस जाने के लिये। अपनी जड़ों से अलग होने के कारण यह स्वाभाविक था कि किसी भी प्रवासी की तरह यहाँ की भाषा, रहन-सहन खान-पान और संस्कृति को सीखते


हरिहर झा Author : हरिहर झा, ऑस्ट्रेलिया
रम्य रचना (1)
चलो विलायत
01-Feb-2017 12:34 AM 623 चलो विलायत

आख़िर लोग यात्रा क्यों करते हैं? आराम से घर क्यों नहीं बैठते? लो यह भी कोई पूछने की बात है! यह तो इंसानी  फ़ितरत है साहब। सुना है ना कि खाली दिमाग़ शैतान का घर होता है। जब तक काम काज में मसरूफ़ रह


सुधा दीक्षित Author : सुधा दीक्षित, INDIA
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