ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
बावरा मन
बावरा मन चहकती चिड़िया संगकभी लगे चहकनेदूर गगन में लंबीऔर ऊँची उड़ान भरेकभी तितली संगफूलों पर लगे मँडरानेबावरा मन मेरा। पूनम की रात मेंपूर्णमासी चाँद के संगलगे पूरी रात बिताने शीतल चाँदनी मेंखोया हुआअध खुली आँखों स्वप्न कोई बुनताबावरा मन मेरा। कभी विरह के गीत गाताकभी मिलन के स्वप्न सँजोताप्रस्फुटित आनन्द के
जीर्णोद्धार नुमाइश
जीर्णोद्धार नुमाइश चन्दन-चन्दन संगमरमरीदेह पीताम्बर छूटे... दरवाजे का नीम बिफरता सखी सहेली सिसकेंतुलसी चौरा राह रोकताबाबुल रोएँ छिप के धीमी पड़ती सभी गुहारें रिश्ते नाते छूटे,देह पीताम्बर छूटे... लिए दुशाला हाथ खड़ी माँ आँसू से तर होकरचीखें वापस टकराती हैं आकुल व्याकुल होकरमंदिर मस्जिद तनिक न भाएलगे तीर्थ सब झूठेदेह प
एकाकीपन
 एकाकीपन ख़ाली झोली रीते हाथ पूछ रही हूँ ख़ुद से आजक्या खोया क्या पाया हैजीवन आज कहाँ ले आया है। सब कुछ होकर कुछ भी नहींअपने हैं पर पास नहींयादों की अब क्या बिसातहर ले जो सूनेपन का संताप। किल्लोल करता वह बचपनआँगन में पायल की रुनझुन खोज रहा मन घर का मधुबनजो वीराना-सा है आज। अपने संगी साथियों के साथजब तुम घर व
आओ टिवस्ट करें
आओ टिवस्ट करें समझदारी से कोई लेना-देना नहींबहुत सहजता से इस नाटक में गंदा करने का सिलसिला जारीपागलपन को कब तक बर्दाश्त करतादु:ख के बादल जल्द ही छटेसड़कों पर मौसमों के साथ बदलती बिखरती जिंदगीजिंदगी न मिलेगी दोबारामगन है उसे परवाह नहींफिर धीरे से यह एक बात कहीजानलेवा समय से मुखातिबपहले आसमान की ओर देखासत्ता जहर हैइस
गर्म हवा
गर्म हवा जाड़े का मौसम आ गया यारों लेकिन हवा गर्म है। आप पूछेंगे भई ये क्या बात हुई? बताते हैं, पहले हम तो समझ लें। बरसात का धूप से कुछ लेना-देना नहीं होता। सर्दियों का भी तपती लू से कोई संबंध नहीं होता। परन्तु क़ुदरत को तमाशा करने की खुजली उठती है। अब इस मज़ाक़ की बात पर एक संजीदा शेर याद आ गया जो ख़ाक़सार ने इसी
पॉकेट में क्या रखा है!
पॉकेट में क्या रखा है! जबसे सुना हूँ कि पॉकेट में क्या रखा है, सब कुछ तो ब्रीफ़केस में है भाई! तबसे मेरा ध्यान बरबस पॉकेट पर ही जाता रहता है; क्योंकि "ब्रीफ़केस" तो हम लोगों के वश की बात है नहीं। जब भी कपड़ा बदलता हूँ या पहनता हूँ, पॉकेट देखना नहीं भूलता, उसमें कुछ न कुछ चीजें रखता ही हूँ। चाहे रूमाल हो, चाहे मोबाइल हो, चाहे
पर्यावरणी वरण
पर्यावरणी वरण परे हट यार! तुझे कब वरण करना चाहा मैंने! मुझे तो तू फूटी आँख भी नहीं सुहाता। उस पर न जाने कहाँ से पकड़ लाए ख़र-दूषण (प्रदूषण) को और हिलगाए रहता है। सचमुच में मेरा-तेरा दूर-दूर तक कुछ मेल नहीं खाता। फिर भी गले पड़ता है। मैं क्यों खामख्वाह तेरी कलाई पकड़ूँ भला! अब तो चिढ़ सी होने लगी है तेरे नाम से।बताऊँ क
अवैध नगरी
अवैध नगरी अचानक उसकी दृष्टि स्थिर हो गई। जिस ट्यूब को वह देख रहा था, उसमें उसकी चेतना मूर्त होकर पत्थर हो गई थी। कहीं कुछ दरक गया था। संशयों और अविश्वास के बीच उस की अंगुलियां ठिठक गई थी और मानसिकता कुंद हो गई थी। ऐसे कैसे हो सकता है!क्या सच में ऐसा हो सकता है?ये तो जान चुका है कि वह आज से तीस बरस पहले का जन्
मैं बुरा नहीं हूँ
मैं बुरा नहीं हूँ कल मेरी पत्नी का जन्मदिन था। संयोगवश मैं कार्यालय के काम से बैंकॉक गया था। मैंने उसे रात को इमेल से जन्मदिन की बधाई भेजी। सुबह इमेल खोलता हूँ तो देखता हूँ उसने सिर्फ थैंक्स लिखा था। स्क्रीन पर इधर-उधर झांकता हूँ शायद कुछ और भी लिख हो, जिसे मैं पढ़ सकूँ। कुछ लिखा ही नहीं था तो दिखाई कैसे देता? मैंने अ
शिक्षा व्यवस्था के शेष प्रश्न
शिक्षा व्यवस्था के शेष प्रश्न शिक्षा का प्रश्न इतना महत्वपूर्ण है कि सरकार कोई भी आये देश और समाज के हित में इससे बच नहीं सकती। एक खबिरया चैनल भी इन प्रश्नों से जूझ रहा है। कुछ वाजिव् चिताऐं भी सामने आयी हैं जिसमें सबसे ज्यादा तवज्जों इस बात को दी गयी है कि हजारों पद देश भर के विश्वविद्यालयों में खाली पड़े हैं और संविदा या तदर्थ
प्रौद्योगिकी और शिक्षा के भारतीय संदर्भ
प्रौद्योगिकी और शिक्षा के भारतीय संदर्भ दुनियाभर में प्रौद्योगिकी न केवल जीवन का अभिन्न भाग हो चुका है, बल्कि उसके प्रेरक-चालक के रूप में जानी जाती है। प्रौद्योगिकी द्वारा पिछले पचास साल में जितना परिवर्तन-बदलाव हुआ है, उतना बदलाव पूर्व के सैकड़ों साल के दौरान में नहीं हुआ था। पश्चिम में हम लोग अब प्रौद्योेगिकी के बिना नहीं जी सकते। कल्पना
रामकथा की अद्भुत परम्परा
रामकथा की अद्भुत परम्परा एक ऐसा देश जिसका धर्म तो इस्लाम है और संस्कृति है रामायण। नब्बे फीसदी मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया में न केवल लोग बेहतर मनुष्य बनने के लिए रामायण पढ़ते हैं बल्कि इसके पात्र वहां की स्कूली शिक्षा का भी अभिन्न हिस्सा हैं।इंडोनेशिया के शिक्षा और संस्कृति मंत्री अनीस बास्वेदन का कथन उल्लेखनीय है। उन्हों
पर्यावरण और ऑस्ट्रेलिया की जीवनशैली
पर्यावरण और ऑस्ट्रेलिया की जीवनशैली जलवायु परिवर्तन विश्व में चिंता का एक बहुत बड़ा और भयावह कारण बन गया है जिसे आज विश्व का प्रत्येक प्राणी अनुभव भी कर रहा है और उसे इस का अनुभव होना भी चाहिए क्योंकि इस के दीर्घकालिक नकारात्मक परिणाम सीधे हमारी जीवन शैली को हानिकारक रूप में प्रभावित कर रहे हैं। इस का हमारे जीवन के विभिन्न अंगों पर सीध
वह लड़की और चीन का योंगे मंदिर
वह लड़की और चीन का योंगे मंदिर हम चीन गए। बेजिंग में चार दिन ठहरे। एक के बाद एक अपनी तालिका में दर्ज किये सभी दर्शनीय स्थल देख लिए। चीन की दीवार पर चढ़े। समर पैलेस, राजाओं की कब्रें, शाही महल, म्यूजियम, थेमअमन स्क्वेयर आदि देखा। नया स्टेडियम बना देखा। दी फोर्बिडन पैलेस जो अब चीन का प्रशासनिक भवन है और भी जाने क्या-क्या। तीन दिन खू
जौहर की ज्वाला के आधुनिक संदर्भ
जौहर की ज्वाला के आधुनिक संदर्भ भारत में किसी फ़िल्म को लेकर इतना बवाल, इतनी तोड़फोड़ और मरने मारने की धमकियाँ सुनने और देखने का यह मेरा पहला और अनोखा अनुभव है। एक फ़िल्म जो अभी परदे तक पहुँची भी नहीं और जन सामान्य ने देखी भी नहीं, मगर फिर भी कही सुनी बातों और पूर्वानुमानों के आधार पर उसे रोकने की मांग करना किस तरह से जनता को जायज़ प्र
नया काव्य-मुख
नया काव्य-मुख सागर विश्व विद्यालय की देहरी छूते हुए अशोक वाजपेयी के कविता संग्रह "शहर अब भी सम्भावना है" से सामना हुआ और उसे पढ़ते हुए लगा कि मैं भी फूल खिला सकता हूँ। मेरी किशोरवय में एक ऐसा कवि सामने आया जिसने असंख्य छायाभासों, काँपते-सिहरते लयों के सुनसानों, झिलमिल उत्सुक उजालों के बहावों, खुलती आभाओं और उषाओं
दौड़ की दिशा
दौड़ की दिशा यह एक शाश्वत और सही मान्यता है कि गति कम है लेकिन दिशा सही है तो वांच्छित लक्ष्य की प्राप्ति थोड़ा विलंब से ही सही निश्चित है। इसका उदाहरण है वास्को-द-गामा द्वारा अफ्रीका का चक्कर लगाते हुए योरप से भारत पहुँचना। यदि ज्ञान हो और उस पर विश्वास हो तो कोई कोलंबस की तरह भारत की खोज में अटलांटिक महासागर को
कुँवर नारायण श्रद्धांजलि
कुँवर नारायण श्रद्धांजलि कविता एक उड़ान हैै। यह प्रसिद्ध पंक्तियां मेलबोर्न की साहित्य-संध्या में न जाने कितनी बार कही होंगी। इन पंक्तियों के साथ मैं कुँवर नारायण का क्या परिचय दूँ, खुद "कविता" का परिचय उनके ही शब्दों में दे दिया इतना हर्ष मुझे होता था। विद्यार्थी जीवन में "लहर" पत्रिका द्वारा आपकी कविताओं का रसास्वादन किया।
हम-तुम आज़ादी वो मैं हूं
हम-तुम आज़ादी वो मैं हूं हम-तुम होश में कैसे रहते आपकी नज़र में रहेकिया तो कुछ भी नहीं फिर भी हम ख़बर में रहेग़रीब गाँव का दुख हमसे तो देखा न गयातमाम ज़िंदग़ी हम इसलिए शहर में रहेजिन्हें न तुक का पता है न ख़बर लय की हैमगर वो कह रहे ग़ज़ल को कि बहर में रहेहमको मंदिर में न मस्जिद में नींद आती हैइसलिए रात को हम अपने-अपने घर में रहे
भारतीय समाज में रवीश की आवाज़
भारतीय समाज में रवीश की आवाज़ इस समय भारत में रवीश कुमार की आवाज़ घर-घर में गूँज रही है। वे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े हुए एक प्रसिद्ध रिपोर्टर हैं। एक ऐसे समय में जब मीडिया राजनेताओं की भक्ति करने में लगा हुआ है रवीश कुमार भारतीय समाज की अनेक समस्याओं को अपने "प्राईम टाइम" में उठा रहे हैं। आजकल वे शिक्षा की समस्या को लेकर चिंति
कफ़न मृत्यु नहीं, जीवन की कहानी है
कफ़न  मृत्यु नहीं, जीवन की कहानी है कफ़न (दिसंबर 1935) कहानी प्रेमचंद की सबसे अधिक चर्चित, विवादास्पद एवं लोकप्रिय कहानी है। कफ़न कहानी पर जितने दृष्टिकोणों, विचारों और वादों से विचार विवेचन हुआ है, यदि उसे यहाँ उद्धृत किया जाये तो एक पूरी पुस्तक ही तैयार हो जाएगी। इन सभी में राजेंद्र यादव के इस मत की विवेचना अधिक हुई है कि कि कफ़न हृदय-
हिन्दी सम्पर्क की भाषा है और रहेगी
हिन्दी सम्पर्क की भाषा है और रहेगी भारत से जुड़ा कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो हिंदी से अनभिज्ञ हो। और मैं सिर्फ़ उन शब्दों की बात नहीं कर रहा जो विश्व प्रसिद्ध हैं, जैसे मसाला, पण्डित या गुरू। मैं बात कर रहा हूँ, "दिल माँगे मोर" और "जय हो" जैसे जुमलों की। यदि हिंदी भाषा के विकास का आकलन करना है तो पुस्तकें या समाचार पत्र न गिनें। बल्क
भाषायी समाधान की साझी तकनीकि युक्ति
भाषायी समाधान की साझी तकनीकि युक्ति वर्तमान काल में विदेश में बसे भारतीय मूल के निवासियों की संख्या दो करोड़ के आसपास है। प्रस्तुत लेख उनके भाषा संबंधित विमर्श के लिये है। खासकर लेखन के लिये भारतीय भाषाओं व लिपियों को कम्प्यूटर के माध्यम में प्रस्थापित करने की सरल-सी युक्ति बतलाने के लिये ही यह लेखन सरोकार है। लेकिन मैं इसे उलटे तरीके
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