ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
कविता (4)
कुछ चीज जेब
01-Apr-2017 01:06 AM 85 कुछ चीज जेब

कुछ चीज

कुछ चीजें
एक छोटी-सी चूक
थोड़ी-सी भूल
ज़रा सी लापरवाही से
खराब हो जातीं हैं...
खो देतीं है
अपना रंग रूप
अपनी चमक
अपनी महक...
हो जातीं


मंजूषा मन Author : मंजूषा मन,
कविता एक दो
01-Apr-2017 01:04 AM 100 कविता एक दो

एक

देख रहे है नींद का रास्ता एकटक
चौखट पर नज़रें टिका कर
वो दबे पाँव चली गयी
मुझसे नज़रें बचा कर
जब हम लगे खोजने
नींद को इधर-उधर
वो बैठी थी आपके नयनों में छुप


शुभ्रा ओझा Author : शुभ्रा ओझा,
आदमी होना नन्ही-सी चिड़िया
01-Apr-2017 12:58 AM 78 आदमी होना नन्ही-सी चिड़िया

आदमी होना

मैं पेड़ों की तरफ
पीठ करके चिल्लाऊंगा
ठीक तुम्हारे सामने
और पीछे खड़े पेड़ हिनहिनाएंगे
घोड़े की तरह जान जाएंगे
कि कभी पेड़ ही था मैं भी
मगर मुझे नहीं


डॉ. राकेश जोशी Author : डॉ. राकेश जोशी,
प्रवासी का दुःख गृहिणी की शिकायत
01-Apr-2017 12:47 AM 728 प्रवासी का दुःख   गृहिणी की शिकायत

प्रवासी का दुःख

बहुत दिनों तक मौन रही
अब देती हूँ आवाज़
क्या है एक प्रवासी का दुःख
बतलाती हूँ आज

जब से जन्मी, घर में आई
चौक बुहारा, मेज़ सज


प्रतिभा खंडेलवाल Author : प्रतिभा खंडेलवाल,
आवरण (3)
पत्रकारिता में इतिहास बोध और राजेन्द्र माथुर
01-Apr-2017 11:58 PM 510 पत्रकारिता में इतिहास बोध और राजेन्द्र माथुर

अतीत की बुनियाद पर हमेशा भविष्य की इमारत खड़ी होती है। जब तक इतिहास की ईंटें मज़बूत रहती हैं, हर सभ्यता फलती-फूलती और जवान होती है। लेकिन जैसे ही ईंटें खिसकने लगतीं हैं, इमारत कमज़ोर होती जाती है। शिल


राजेश बादल Author : राजेश बादल, India
हिंदी पत्रकारिता का वैचारिक संकट
01-Apr-2017 11:48 PM 499 हिंदी पत्रकारिता का वैचारिक संकट

पत्रकार शिरोमणि बाबूराव विष्णु पराड़कर ने लगभग एक शताब्दी साल पहले हिंदी संपादक सम्मेलन में कहा था, "पत्र निकालकर सफलतापूर्वक चलाना बड़े-बड़े धनिकों तथा सुसंगठित कंपनियों के लिए संभव होगा। पत्र सर्वां


अरुण कुमार त्रिपाठी Author : अरुण कुमार त्रिपाठी,
हिंदी की नामी पत्रिकाएँ
01-Apr-2017 12:02 AM 368 हिंदी की नामी पत्रिकाएँ

जब मैंने सुचित्रा-माधुरी का समारंभ किया तो मेरे सामने एक स्पष्ट नज़रिया था। मैं एक ऐसे संस्थान के लिए पत्रिका का आरंभ करने वाला था, जो पहले से ही अंगरेजी की लोकप्रिय पत्रिका फ़िल्मफ़ेअर का प्रकाशन कर


अरविंद कुमार Author : अरविंद कुमार, INDIA
विमर्श (3)
आधी आबादी का पक्ष
01-Apr-2017 12:25 AM 356 आधी आबादी का पक्ष

पिछले महीने की आठ तारीख़ यानी आठ मार्च को जब दुनियाभर में अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा था तो मेरे दिमाग़ की शिराओं में महिलाओं की सदियों से चली आ रही व्यथा कथा की चित्रमाला दौड़ रही थी। अपने


विनीता तिवारी Author : विनीता तिवारी, America
भौतिकवादी संस्कृति का वैश्वीकरण
01-Apr-2017 12:21 AM 487 भौतिकवादी संस्कृति का वैश्वीकरण

भौतिकवादी संस्कृति क्या है? इसकी किताबी परिभाषा क्या है? इसकी जमीनी पहचान क्या है? क्या इसका रूप अपरिवर्तनशील है? निरपेक्ष है? या समाज और समय की परिधि में परिवर्तनशील है? यदि यह सापेक्ष है तो तुलना


डॉ. कौशल किशोर श्रीवास्तव Author : डॉ. कौशल किशोर श्रीवास्तव, India
चार पुरुषार्थ - आधुनिक नजरिया
01-Apr-2017 12:16 AM 356 चार पुरुषार्थ - आधुनिक नजरिया

मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ माने गए हैं। ये हैं- धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष। लेकिन इन चारों का उद्देश्य क्या है? धर्म का उद्देश्य मोक्ष है, अर्थ नहीं। धर्म के अनुकूल आचरण करो तो किसके लिए? मोक्ष के


हरिहर झा Author : हरिहर झा, ऑस्ट्रेलिया
रम्य रचना (1)
गुजरते समय में पत्रकारिता
01-Apr-2017 12:40 AM 92 गुजरते समय में पत्रकारिता

सुना है कि जब से इंडिया टीवी का मालिक बदल गया है, उसका लहज़ा भी
बदल गया। ज़ाहिर है वे कार्यकर्ता हैं और अपने अन्नदाता की ही भाषा बोलेंगे -
his master's voice!


सुधा दीक्षित Author : सुधा दीक्षित, INDIA
विशेष (1)
अनुकरणीय पहल
01-Apr-2017 01:19 AM 259 अनुकरणीय पहल

भारतीय मूल के अप्रवासी डॉ. आलोक एवं डॉ. संगीता अग्रवाल अचानक जब हैदराबाद में अपने स्कूल के समय की शिक्षिका कुमारी सुमना जी से मिले और उनके सामाजिक कार्य और उनके त्याग का पता चला, तो त्यागमयी प्रवृत


डॉ. सरोज अग्रवाल Author : डॉ. सरोज अग्रवाल,
शायरी की बात (1)
शाम होती है तो घर ज़ाने को जी चाहता है
01-Apr-2017 01:17 AM 112 शाम होती है तो घर ज़ाने को जी चाहता है

शायरी की किताबों को खोजते हुए जब
    नए मौसम की खुशबू किताब पर
     मेरी नज़र पड़ी तो लगा जैसे गढ़ा खज़ाना हाथ लग गया है। इस किताब के शायर हैं जनाब इफ्तिख़ार आरिफ


नीरज गोस्वामी Author : नीरज गोस्वामी ,
जन्नत की हकीकत (1)
मुक्ति के पिंजरे
01-Apr-2017 12:28 AM 259 मुक्ति के पिंजरे

शिक्षा, चिकित्सा और न्याय ये तीन क्षेत्र ऐसे हैं जिनसे और जहाँ से समाज के स्वरूप, निर्माण और विकास की दिशाएँ तय होती हैं। ये किसी के पद, धन, वंश, नस्ल आदि के आधार पर नहीं बल्कि आवश्यकता और पात्रता


रमेश जोशी Author : रमेश जोशी, USA
शिकागो की डायरी (1)
भारतीय भाषाओं के अखबार
01-Apr-2017 12:31 AM 61 भारतीय भाषाओं के अखबार

अनेकों बार इस प्रश्न से सामना करती हूँ कि शिकागो में गुजराती, तमिल,
तेलुगु, भाषाओं के अखबार तो छपते हैं, लेकिन हिंदी में कोई अखबार क्यों
नहीं प्रकाशित होता?


अपर्णा राय Author : अपर्णा राय, USA
स्मरण (1)
नये वर्ष की देहरी पर राम की याद
01-Apr-2017 12:36 AM 257 नये वर्ष की देहरी पर राम की याद

हे राम मेरा यह हृदय ही तुम्हारा घर है और इस पर बड़ी विपत्ति आयी हुई है। इस घर
पर काम-क्रोध-लोभ-अहंकार ने धावा बोल दिया है। ये चारों तस्करों की तरह तुम्हारे
घर


ध्रुव शुक्ल Author : ध्रुव शुक्ल, INDIA
ग़ज़ल (1)
ग़ज़ल एक दो
01-Apr-2017 01:11 AM 86 ग़ज़ल एक दो

एक

जहाँ पर हो गयी समझो शम"अ से बंदगी की हद
वहीं पे ख़त्म होती है पतंगे की ख़ुदी की हद
खड़ी पाई का तो बस काम ही है रोकना सबको
किसी दिन तय करेगी ये मेरी भी ज़िंदगी की हद
जह


के.पी. अनमोल Author : के.पी. अनमोल,
सम्पादकीय (1)
पत्रकारिता : स्वतंत्र या स्वच्छंद
01-Apr-2017 11:42 PM 71 पत्रकारिता : स्वतंत्र या स्वच्छंद

समाचार-पत्र आधुनिक मनुष्य के ऊपर एक बहुत बड़ा अत्याचार है। साथ ही, वह हमारी संवैधानिक आज़ादी का माध्यम भी है। ...मनुष्य की आजादी एक टेढ़ी खीर है। किसी भी व्यवस्थित समाज में अभिव्यक्ति की पगडंडियां बनत


सुषमा शर्मा Author : सुषमा शर्मा, India
तथ्य (1)
मीडिया पर "लाल" पहरा
01-Apr-2017 12:12 AM 65 मीडिया पर

मैंने ये फ़ैसला कर लिया था कि अब मैं अपनी नौकरी से त्यागपत्र दे अशेष के साथ चीन चली जाऊँगी। आखिर मैं कब तक घर, नौकरी सबकुछ अकेली संभालती रहती। वैसे भी ग्रेजुएशन के बाद से ही शिक्षण, अख़बार, रेडियो, ट


रीना गुप्ता Author : रीना गुप्ता,
रपट (1)
कवि-सम्मेलन बनाम वार्षिक मिलन समारोह
01-Apr-2017 01:22 AM 89 कवि-सम्मेलन बनाम वार्षिक मिलन समारोह

भारतवंशियों की युवा पीढ़ी परम्परागत संस्कृति और उसके आयोजन में रुचि नहीं
लेती, इस धारणा को बदलना होगा। हमें युवाओं को आगे बढ़कर मंच पर
सहभागिता के लिये प्रेरित


रामानुज शर्मा Author : रामानुज शर्मा,
कहानी (1)
सुनो तुम्हारी भी कहानी है
01-Apr-2017 12:43 AM 372 सुनो तुम्हारी भी कहानी है

तुम्हें तो पत्नी, पत्नी की सहेली या कामवाली बाई में कोई फर्क ही नजर नहीं आता था, तुम्हें तो बस एक नयापन चाहिये। कौन-कौन से फार्मूलों की बात किया करते थे तुम, जैसे बहुत ब


रेखा भाटिया Author : रेखा भाटिया,
नीदरलैंड की डायरी (1)
यूरोपीय पत्रकारिता का चरित्र
01-Apr-2017 12:34 AM 73 यूरोपीय पत्रकारिता का चरित्र

यूरोप की पत्रकारिता का इतिहास यूरोप के ही समानान्तर है। भारत की पत्रकारिता यूरोपीय देशों तक पहुंचते-पहुंचते जर्नलिज्म में और नीदरलैंड में आकर न्यूज़ ज़ुर्नाल में तब्दील हो जाती है। तकनीकी साधनों की स


प्रो. डॉ. पुष्पिता अवस्थी Author : प्रो. डॉ. पुष्पिता अवस्थी, Netherlands
सन्दर्भ (1)
गांधी जी और पत्रकारिता
01-Apr-2017 12:08 AM 254 गांधी जी और पत्रकारिता

गांधी जी ने पत्रकारिता को कभी एक व्यवसाय के रूप में
स्वीकार नहीं किया। वे एक मिशनरी पत्रकार थे और
वे इस बात को अच्छी तरह समझते थे कि उनके
मिशन की सफलता


डॉ. सुरेन्द्र वर्मा Author : डॉ. सुरेन्द्र वर्मा, INDIA
अभिव्यक्ति (1)
मेरे देश की मिट्टी
01-Apr-2017 01:25 AM 350 मेरे देश की मिट्टी

अब तो सभी जानते हैं कि कज़ाकिस्तान एक युवा और स्वतंत्र राज्य है। जिसकी अर्थव्यवस्था सफलतापूर्वक लगातार विकसित हो रही है। हमारा देश कैस्पियन सागर से चीन तक फैला हुआ है। मेरे लिए कज़ाकिस्तान सिर्फ जमीन


आइदाना तुरार साबीतोवना Author : आइदाना तुरार साबीतोवना,
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