ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
2016 Sep
कृति-स्मृति (10)
एक पुरानी चट्टान
01-Sep-2016 12:00 AM 2417 एक पुरानी चट्टान

आज जब हम अंग्रेजी हटाने की बात करते हैं, तब सवाल अंग्रेजी का नहीं है। सवाल तीन हजार साल पुरानी आदत बदलने का है। यह चट्टान अंग्रेजों ने हमारे ऊपर नहीं रखी है। वह एक प्रागैतिहासिक चट्टान है, जो आजादी


राजेन्द्र माथुर Author : राजेन्द्र माथुर, India
राम की शक्ति पूजा
01-Sep-2016 12:00 AM 2455 राम की शक्ति पूजा

है अमानिशा, उगलता गगन घन अन्धकार
खो रहा दिशा का ज्ञान, स्तब्ध है पवन-चार
अप्रतिहत गरज रहा पीछे अम्बुधि विशाल
भूधर ज्यों ध्यानमग्न, केवल जलती मशाल।

स्थिर राघवेन्द्र को हिला


सूर्यकांत त्रिपाठी Author : सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला", India
निःशस्त्र सेनानी
01-Sep-2016 12:00 AM 2429 निःशस्त्र सेनानी

सुजन, ये कौन खड़े हैं? बन्धु! नाम ही है इनका बेनाम।
कौन करते है ये काम? काम ही है बस इनका काम।
 
बहन-भाई, हां कल ही सुना, अहिंसा आत्मिक बल का नाम
पिता! सुनते है श्री विश्वेश


माखनलाल चतुर्वेदी Author : माखनलाल चतुर्वेदी, INDIA
सखि वे मुझसे कह कर जाते
01-Sep-2016 12:00 AM 2430 सखि वे मुझसे कह कर जाते

सखि, वे मुझसे कहकर जाते,
कह, तो क्या मुझको वे अपनी
पथ-बाधा ही पाते?
मुझको बहुत उन्होंने माना
फिर भी क्या पूरा पहचाना?
मैंने मुख्य उसी को जाना
जो वे मन में लाते।


मैथिलीशरण गुप्त Author : मैथिलीशरण गुप्त, INDIA
कामायनी
01-Sep-2016 12:00 AM 2437 कामायनी

कोमल किसलय के अंचल में
नन्हीं कलिका ज्यों छिपती-सी
गोधूली के धूमिल पट में
दीपक के स्वर में दिपती-सी।

मंजुल स्वप्नों की विस्मृति में
मन का उन्माद निखरता ज्यों-
सु


जयशंकर प्रसाद Author : जयशंकर प्रसाद, INDIA
वीरों का कैसा हो बसंत
01-Sep-2016 12:00 AM 2424 वीरों का कैसा हो बसंत

आ रही हिमालय से पुकार
है उदधि गरजता बार-बार
प्राची पश्चिम भू नभ अपार
सब पूछ रहे हैं दिग-दिगन्त-
वीरों का कैसा हो बसन्त।।
 
फूली सरसों ने दिया रंग
मधु लेकर आ


सुभद्रा कुमारी चौहान Author : सुभद्रा कुमारी चौहान, INDIA
ब्रह्मराक्षस
01-Sep-2016 12:00 AM 2419 ब्रह्मराक्षस

शहर के उस ओर खँडहर की तरफ़
परित्यक्त सूनी बावड़ी
के भीतरी
ठण्डे अँधेरे में
बसी गहराइयाँ जल की
सीढ़ियाँ डूबी अनेकों
उस पुराने घिरे पानी में
समझ में आ न सकता हो


गजानन माधव मुक्तिबोध Author : गजानन माधव मुक्तिबोध, INDIA
नदी के द्वीप
01-Sep-2016 12:00 AM 2420 नदी के द्वीप

हम नदी के द्वीप हैं।
हम नहीं कहते कि हमको छोड़ कर स्रोतस्विन बह जाय।
वह हमें आकार देती है।
हमारे कोण, गलियां, अन्तरीप, उभार, सैकत-कूल,
सब गोलाइयां उसकी गढ़ी हैं।
 


सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय Author : सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय, INDIA
दुखी जीवन
01-Sep-2016 12:00 AM 119 दुखी जीवन

दुख का एक बड़ा कारण है अपने-ही-आप में डूबे रहना, हमेशा अपने ही विषय में सोचते रहना। हम यों करते तो यों होते, वकालत पास करके
अपनी मिट्टी खराब की, इससे कहीं अच्छा होता कि नौकरी कर ली होती। अगर न


प्रेमचंद Author : प्रेमचंद, INDIA
अंग्रेजी के गुण और दोष
01-Sep-2016 12:00 AM 118 अंग्रेजी के गुण और दोष

जब से भारत में राष्ट्रीयता का आविर्भाव हुआ, लोग अंग्रेजी शिक्षा के विरुद्ध बहुत-सी बातें कहने लगे हैं। इस शिक्षा का सबसे बड़ा दोष यह बताया जाता है कि इसके कारण भारत के शिक्षितों और अशिक्षितों के बीच


रामधारी सिंह दिनकर Author : रामधारी सिंह दिनकर, INDIA
कृति-अंश (4)
लाल टीन की छत
01-Sep-2016 12:00 AM 2439 लाल टीन की छत

सब तैयार था। बिस्तर, पोटलियाँ-एक सूटकेस। बाहर एक कुली खड़ा था, टट्टू की रास थामे-अनमने भाव से उस मकान को देख रहा था, जहाँ चार प्राणी गलियारे में खड़े थे- एक आदमी, एक औरत, एक बहुत छोटी औरत, जो बौनी-सी


निर्मल वर्मा Author : निर्मल वर्मा , India
गोदान
01-Sep-2016 12:00 AM 2458 गोदान

होरीराम ने दोनों बैलों को सानी-पानी देकर अपनी स्त्री धनिया से कहा- "गोबर को ऊख गोड़ने भेज
देना। मैं न जाने कब लौटूं। जरा मेरी लाठी दे दो।" धनिया के हाथ गोबर से भरे थे। उपले थापकर आयी थी। बोली-


प्रेमचंद Author : प्रेमचंद, INDIA
खंजन नयन
01-Sep-2016 12:00 AM 2443 खंजन नयन

वृन्दावन से लगभग दो कोस पहले ही पानीगांव के पास वाले किनारे पर खड़े चार-छह लोगों ने सुरीर से आती हुई नाव को हाथ हिला-हिलाकर अपने पास बुला लिया : "मथुरा मती जइयों। आज खून की मल्हारें गाई जा रही हैं व


अमृतलाल नागर Author : अमृतलाल नागर, INDIA
मैला आँचल
01-Sep-2016 12:00 AM 2436 मैला आँचल

गाँव में यह खबर बिजली की तरह फैल गई - मलेटरी ने बहरा चेथरू को गिरफ्तार कर लिया है और लोबिनलाल के कुँए से बाल्टी खोलकर ले गए हैं। यद्यपि 1942 के जन-आन्दोलन के समय इस गाँव में न तो फौजियों का कोई उत्


फणीश्वरनाथ रेणु Author : फणीश्वरनाथ रेणु, INDIA
कृति-विमर्श (4)
जीवित रहेगा प्रमथ्यु
01-Sep-2016 12:00 AM 2441 जीवित रहेगा प्रमथ्यु

कभी-कभी इतिहास में ऐसे क्षण आते हैं और अक्सर आते हैं, जब जीवन के किसी मोड़ पर देखी, सुनी या पढ़ी रचना साक्षात् मूर्त हो जाती है। सामयिक और प्रासंगिक हो जाती है। उसके प्रतीक नूतन अर्थ के आलोक में भास्


प्रो. सुरेश ऋतुपर्ण Author : प्रो. सुरेश ऋतुपर्ण, India
महेश अनघ की कहानियां कौतूहल काव्य रस और सामाजिक न्याय की त्रिवेणी
01-Sep-2016 12:00 AM 2422 महेश अनघ की कहानियां  कौतूहल काव्य रस और सामाजिक न्याय की त्रिवेणी

समकालीन हिन्दी की कृतियों में "जोग लिखी" और "शेषकुशल" नवगीतकार और कथाकार महेश अनघ के ये    दो कहानी संग्रह, इस कारण से उल्लेखनीय कहे जा सकते हैं क्योंकि इनमें कौतूहल काव्य रस और सामा


ब्राजेन्द्र श्रीवास्तव Author : ब्राजेन्द्र श्रीवास्तव, India
गुजिश्ता दौर के ऐतिहासिक चरित्र
01-Sep-2016 12:00 AM 2416 गुजिश्ता दौर के ऐतिहासिक चरित्र

साहित्यिक दृष्टि से आज हिंदी बहुत समृद्ध है। नाना विधाओं के साहित्य से हिन्दी का रचना संसार जगर-मगर है। कविता की सरिता तो आठवीं-नवीं सदी में ही बह निकली थी। लेकिन गद्य का झरना उन्नीसवीं सदी में आके


डॉ. गंगा प्रसाद शर्मा Author : डॉ. गंगा प्रसाद शर्मा, CHINA
अद्र्धनारीश्वर : एक सम्पूर्ण व्यक्तित्व
01-Sep-2016 12:00 AM 2423 अद्र्धनारीश्वर : एक सम्पूर्ण व्यक्तित्व

काहानी, उपन्यास और नाटकों के रचनाकार विष्णु प्रभाकर वैसे तो हिंदी साहित्य के लिए एक प्रतिष्ठित नाम हैं किन्तु उनकी पुस्तक "आवारा मसीहा" ने उन्हें एक उत्कृष्ट जीवनीकार के रूप में भी स्थापित कर दिया


नीलम दीक्षित Author : नीलम दीक्षित, INDIA
मन की बात (3)
निज भाषा-लिपि स्वाधीनता का मूलाधार
01-Sep-2016 12:00 AM 2448 निज भाषा-लिपि स्वाधीनता का मूलाधार

पराधीनता का चित्त और चेतना से गहरा रिश्ता है। पराधीनता व्यक्ति को जितना पीड़ित और प्रताड़ित करती है। इसके विपरीत, स्वाधीनता उतना ही आह्लादित करती है वह फिर, राजनीतिक हो या व्यक्तिगत। स्वाधीनता वस्तुत


प्रो. डॉ. पुष्पिता अवस्थी Author : प्रो. डॉ. पुष्पिता अवस्थी, Netherlands
मेरी कुछ पसंदीदा किताबें
01-Sep-2016 12:00 AM 2442 मेरी कुछ पसंदीदा किताबें

पढ़ना मेरा शगल था। उस वक्त मैं बहुत छोटी थी, शायद दूसरी, तीसरी कक्षा में। पापा को पढ़ने का शौक aथा, वे लायब्ररी से पुस्तकें लाते थे। पुलिस की नौकरी, थककर आते थे और पढ़ते-पढ़ते सो जाते। उन्हें जासूसी कह


डॉ. सुलभा कोरे Author : डॉ. सुलभा कोरे,
मेरे प्रिय लेखकों की रचनाएँ
01-Sep-2016 12:00 AM 2429 मेरे प्रिय लेखकों की रचनाएँ

हिंदी साहित्य में बहुत कृतियाँ हैं जो मेरी नज़र में श्रेष्ठ हैं उनमें से कुछ का उल्लेख मैं यहाँ कर रही हूँ यशपाल की "दीनता का प्रायश्चित्त" हिंदी साहित्य की मेरी सबसे पसंदीदा और श्रेष्ठतम कहानी है।


डॉ. अमिता कौंडल Author : डॉ. अमिता कौंडल, America
विमर्श (2)
हिंदी वालों को कैसे जगाएं
01-Sep-2016 12:00 AM 2501 हिंदी वालों को कैसे जगाएं

हम अपनी मातृभाषा बोलने में ठीक वैसे ही शर्माते हैं जैसे कि एक मजदूर औरत के खून पसीने कि कमाई से पढ़ लिखकर बाबू बना बेटा अपनी उसी मजदूर माँ को, माँ कहते हुए शर्माता है। हिंदी उस रानी की तरह है जिसे ब


सपना मांगलिक Author : सपना मांगलिक, INDIA
सुनो गौर से हिंदी वालों
01-Sep-2016 12:00 AM 2474 सुनो गौर से हिंदी वालों

हिंदी दिवस मनाने का प्रचलन करने वालों ने भले और कुछ भी सोचा होगा, लेकिन निश्चित तौर पर उन लोगों ने इस दिन की कल्पना इस रूप में नहीं की होगी कि इस दिन हिंदी की दुर्दशा (वास्तविक या काल्पनिक) पर सामू


विनोद रिंगानिया Author : विनोद रिंगानिया, INDIA
रम्य रचना (1)
हमारा पुस्तक प्रेम
01-Sep-2016 12:00 AM 2456 हमारा पुस्तक प्रेम

पुनर्जन्म को मद्देनज़र रखते हुये रसखान बाबा की यह रचना हमें बड़ी पसन्द है। अब हम गांव में के ग्वालों के बीच में तो नहीं रह सकते, मिज़ाज से थोड़ा शहरी जो हैं; परन्तु "पंछी बनूँ, उड़ती फिरूँ मस्त गगन में"


सुधा दीक्षित Author : सुधा दीक्षित, INDIA
कविता (1)
मेरी हिंदी, मेरी भाषा, मेरी माँ
01-Sep-2016 12:00 AM 2510 मेरी हिंदी, मेरी भाषा, मेरी माँ

जब मैं कोई अक्षर नहीं जानती थी तो मैंने सबसे पहले क्या बोला होगा? अपनी माँ को अपनी भाषा में शायद "माँ" कहा होगा जब मुझे कभी डर लगा होगा, तो भी मैं घबराकर चिल्लाई होऊंगी अपनी भाषा में मैं पहली बार ज


ललिता प्रदीप Author : ललिता प्रदीप, INDIA
शायरी की बात (1)
इतना हुए क़रीब कि हम दूर हो गए
01-Sep-2016 12:00 AM 2464 इतना हुए क़रीब कि हम दूर हो गए

बहते हुए अश्कों से ग़म की लज्जत उठाने वाले इस अज़ीम शायर का नाम है गणेश बिहारी "तर्ज़", जिनकी किताब "हिना बन गयी ग़ज़ल" के हिंदी संस्करण का अनावरण हो उससे  पहले ही 17 जुलाई 2009 को वे इस दुनिया-ऐ-फ़


नीरज गोस्वामी Author : नीरज गोस्वामी ,
जन्नत की हकीकत (1)
आदमी का विकल्प नहीं हो सकता
01-Sep-2016 12:00 AM 2460 आदमी का विकल्प नहीं हो सकता

जीवित होने का प्रमाण-पत्र जमा करवाने लगभग नौ महीने बाद बैंक गया। कारण एक तो पास बुक भरने वाली थी दूसरे कई महीने की प्रविष्टियाँ बाकी थीं। देखा, बैंक में कई परिवर्तन हो गए हैं। नौ महीने कम नहीं होते


रमेश जोशी Author : रमेश जोशी, USA
शिकागो की डायरी (1)
किताबें पढ़ने का अनुशासन
01-Sep-2016 12:00 AM 2438 किताबें पढ़ने का अनुशासन

भारत भाषा और संस्कृति की विविधता का देश है। भारत में ऐसे अनेकों महान लेखक, साहित्यकार, कवि, विचारक और दार्शनिक रहे हैं जिन्होंने एक पूरी पीढ़ी को अपनी कृतियों से प्रभावित किया है और नयी पीढ़ी के लिए


अपर्णा राय Author : अपर्णा राय, USA
बातचीत (1)
उर्दू साहित्यकार डॉ. वजाहत हुसैन रिजवी से प्रख्यात पत्रकार राजू मिश्र की बातचीत
01-Sep-2016 12:00 AM 2458 उर्दू साहित्यकार डॉ. वजाहत हुसैन रिजवी से प्रख्यात पत्रकार राजू मिश्र की बातचीत

जहां लफ्जों के मोती, एहसास की डोर में गुंथ जाते हैं तो शायरी का रूप धर लेते हैं और जब बोलों की शक्ल-सूरत अख्तियार करते हैं तो वो कहानी बन जाती है। शब्दों को किसी माला की मोतियों की मानिन्द सजाने-सं


राजू मिश्र Author : राजू मिश्र, INDIA
सम्पादकीय (1)
हिंदी नयी चाल में ढले...
01-Sep-2016 12:00 AM 2431 हिंदी नयी चाल में ढले...

इस बदलते विश्व में केवल अंग्रेजी को कोसने से काम नहीं चलेगा, बल्कि अपनी
भाषाओं को पोसने से ही हम पूरे संसार के साथ कदम मिलाकर चल सकेंगे।
हिंदी के लिये हिंदी


सुषमा शर्मा Author : सुषमा शर्मा, India
हमारा समय (1)
प्रतीति की भाप
01-Sep-2016 12:00 AM 2449 प्रतीति की भाप

भाषा एक सेतु की तरह लगती है जिसे मन और बुध्दि के बीच बाँधना पड़ता है। पीड़ाओं के खारेपन में हिलुरते भवसागर में अपनी नौका खेते कवि की आँखें बार-बार भर आती हैं और छलककर सागर में झर जाती हैं। कवि की आँख


ध्रुव शुक्ल Author : ध्रुव शुक्ल, INDIA
आलेख (1)
रस प्रधान भारत और चीनी स्वाद
01-Sep-2016 12:00 AM 2411 रस प्रधान भारत और चीनी स्वाद

पश्चिमी लोगों के ख्याल में स्वाद या रस का मतलब केवल शारीरिक जरूरत मिलने के लिए है, सौंदर्यबोध से संबंध नहीं रखा जाएगा। प्लेटो ने कहा था कि अगर हम कहते हैं कि स्वाद और सुगंध न केवल प्रसन्नता है बल्क


तिआन केपिंग Author : तिआन केपिंग, China
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