ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
भय
भय किसी आती हुई आपदा की भावना या दुख के कारण के साक्षात्कार से जो एक प्रकार का आवेगपूर्ण अथवा स्तंभ-कारक मनोविकार होता है उसी को भय कहते हैं। क्रोध दुख के कारण पर प्रभाव डालने के लिए आकुल करता है और भय उसकी पहुँच से बाहर होने के लिए। क्रोध दुख के कारण के स्वरूपबोध के बिना नहीं होता। यदि दुख का कारण चेत ...
भीष्म को क्षमा नहीं किया गया
भीष्म को क्षमा नहीं किया गया मेरे एक मित्र हैं, बड़े विद्वान, स्पष्टवादी और नीतिमान। वह इस राज्य के बहुत प्रतिष्ठित नागरिक हैं। उनसे मिलने से सदा नई स्फूर्ति मिलती है। यद्यपि वह अवस्था में मुझसे छोटे हैं, तथापि मुझे सदा सम्मान देते हैं। इस देश में यह एक अच्छी बात है कि सब प्रकार से हीन होकर भी यदि कोई उम्र में बड़ा हो, तो थोड़ा-सा ...
भारतीयता
भारतीयता भारत की आत्मा सनातन है, भारतीयता केवल एक भौगोलिक परिवृत्ति की छाप नहीं, एक विशिष्ट आध्यात्मिक गुण है, जो भारतीय को सारे संसार से पृथक करता है। भारतीयता मानवीयता का निचोड़ है, उस की हृदय मणि है, उस का शिर सावतंस है, उस के नाक का बेसर है..आप कहते चले जाइए, सो श्रोताओं में से एक को- नहीं, आप को हजार श्र ...
पूर्व और पश्चिम
पूर्व और पश्चिम मैं अपनी बात एक स्मृति से आरंभ करना चाहूँगा। कुछ वर्ष पहले मुझे एक सम्मेलन में कोलोन जाने का अवसर मिला था। बात 1982 या 83 की है, जब एक ओर पश्चिम और दूसरी ओर सोवियत संघ के बीच तनाव चरमोत्कर्ष पर था। जर्मनी की एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था ने विश्व के लेखकों को आमंत्रित किया था, ताकि शीत-युद्ध के स्थान पर ...
सोना हिरनी
सोना हिरनी सोना की आज अचानक स्मृति हो आने का कारण है। मेरे परिचित स्वर्गीय डाक्टर धीरेन्द्र नाथ वसु की पौत्री सस्मिता ने लिखा है : "गत वर्ष अपने पड़ोसी से मुझे एक हिरन मिला था। बीते कुछ महीनों में हम उससे बहुत स्नेह करने लगे हैं। परन्तु अब मैं अनुभव करती हूँ कि सघन जंगल से सम्बद्ध रहने के कारण तथा अब बड़े हो जान ...
भाषा बहता नीर
भाषा बहता नीर भाषा बहता नीर। भाषा एक प्रवाहमान नदी। भाषा बहता हुआ जल। बात बावन तोले पाव रत्ती सही। कबीर की कही हुई है तो सही होनी ही चाहिए। कबीर थे बड़े दबंग और उनका दिल बड़ा साफ था। अतः इस बात के पीछे उनके दिल की सफाई और सहजता झाँकती है, इससे किसी को भी एतराज नहीं हो सकता।बहुत कुछ ऐसी ही स्थिति है कबीर की उक्ति की ...
सच्चे मित्र हैं पुस्तकालय
सच्चे मित्र हैं पुस्तकालय विदेश पहुंचने के पश्चात अक्सर प्रवासियों को अपने देश की याद सताती है। मुझे भी अमेरिका पहुंचने के बाद भारत की बहुत याद आती थी, लेकिन एक चीज़ जिसने उदास होने से बचाये रखा वे थे अमेरिका के पुस्तकालय। वहां पहुंचकर मैंने नोट किया कि अगर शहर में स्कूल, गिरजाघर, बाज़ार आदि हैं तो पुस्तकालय भी अलग शान से जमे ...
तू मेरी पीठ खुजायेगा मैं तेरी पीठ खुजाऊँगा
तू मेरी पीठ खुजायेगा मैं तेरी पीठ खुजाऊँगा यह बात सही है कि हिंदी में अच्छे लेखकों की कमी नहीं, कमी है तो पाठकों की। दरअस्ल पाठकों की कमी का एक कारण ख़ुद लेखक ही हैं। लेखकों के कई खेमें हैं, खेमों में बंटे होने से लेखक अपने खेमे के लेखक की रचना ही पढ़ना पसंद करता है और इस शेर को साकार रूप दे रहा है -तू मुझसे राहत पायेगा मैं तुझसे राहत पाऊँगा त ...
विदेश में देश
विदेश में देश देश से बाहर निकले करीब उन्नीस साल हो गए लेकिन इन उन्नीस वर्षों में से शुरू के लगभग तेरह वर्ष ऐसे थे, जिनमें हर दिन, हर पल अपने देश लौट जाने की चाह थी। उन्हीं, पीछे छूटी, भीड़-भाड़ वाली गलियों और चौराहों के सपने थे। जोर-जोर से बजने वाले लाउडस्पीकरों, शादी के बैण्ड-बाजों और माता के जागरणों की गुनगुनाहट ...
पुत्र के नाम
पुत्र के नाम मेरी मौत एक दिनकागज का टुकड़ाबन करतुम तक पहुंचेगी... तुम शून्य में ताक करएक बारगीबस रंगहीन होगेऔर पल भर मेंकागज का टुकड़ामरोड़ कररद्दी कीटोकरी में फेंक दोगे... फिर अपनी चेतना को सांकल लगा करदिनचर्या मेंलग कर भूल जाओगेसांय तक किदफ्तर की टोकरी मेंतुम्हारी माँ केमरने की मुड़ी-तुड़ीखबर पड़ी है...&nb ...
वह एक कमज़ोर औरत
वह एक कमज़ोर औरत             वह एक कमज़ोर औरत थी              जिसने बेटे को जीवनधन समझा             दुनिया की नज़रों से बचा     & ...
हां, मैं कवि हूं इस देश का....
हां, मैं कवि हूं इस देश का.... हां, मैं कवि हूं।मैं कवि हूं इस क्षेत्र काकहलाता हूं ऊंची नाक वालासमझता हूं समस्याएंअपने क्षेत्र कीयहां के निवासियों का दर्दमेरा दर्द है। हैरो की ज़मीन मेरी है....मैं कवि हूं इस शहर काजो केन्द्र है विश्व का।मैं हिस्सा हूं इस शहर की संस्कृति कायह करता है स्वागत सबकाअपना बनाता हैयह शहर केवल एक शहर नहीं ...
महात्मा गांधी चरित स्वयं ही काव्य
महात्मा गांधी चरित स्वयं ही काव्य भारत के हृदय प्रदेश के उज्जयिनी नगर निवासी यशस्वी कवि श्री शिवमंगल सिंह "सुमन" की नोटबुक में पण्डित नेहरू ने, 1954 में यह वाक्य लिख दिया था- "अपने जीवन को कविता बनाना चाहिये"।1989 में जब पूरे देश में नेहरू जन्मशती के आयोजन हुए, तभी इस अवसर पर भोपाल में कलाओं के घर भारत भवन में विश्व कविता समारोह आयो ...
साबरमती के तट पर
साबरमती के तट पर साबरमती नदी के तट को सीमेंट का बना दिया गया है। दूर से देखने पर अब वह पेरिस की सेन नदी के तट की फूहड़ आकृति जान पड़ता है। साबरमती के ही तट पर गांधी आश्रम, जिसे "साबरमती आश्रम"  नाम से जाना जाता है, स्थित है। यह आश्रम महात्मा गांधी और उनके करीब 20 सहयोगियों के लिए 20वीं शताब्दी के दूसरे दशक में बन ...
निबंध गद्य की कसौटी है...
निबंध गद्य की कसौटी है... हिंदी में निबंध उन्नीसवीं सदी के उदारतावादी युग में उपजा है। क्योंकि उस समय वैचारिक स्वाधीनता ही मनुष्य की पहली प्रतिज्ञा थी। स्वाधीनता के साथ वैचारिक सहिष्णुता भी अपने आप आती है। विचार प्रतिपादन के लिये लिखा गया गद्य आलोचकों ने निबंध ही माना है। अगर हम आरंभ से देखें तो हिंदी निबंध के पहले प्रयोगकर् ...
प्रवासी जीवन पर पहली कहानी शूद्रा
प्रवासी जीवन पर पहली कहानी शूद्रा प्रेमचंद हिन्दी कहानी के इतिहास में अनेक नये विषयों, सम्वेदनाओं एवं प्रवृत्तियों के उद्भावक थे। उन्होंने हिन्दी-उर्दू कहानी को आधुनिक बनाया, कहानी का नया शास्त्र दिया, उर्दू से हिन्दी में आकर नवोन्मेष किया, जीवन के उपेक्षित क्षेत्रों में पदार्पण किया, विदेशी पात्रों की कहानियां लिखीं और भारत से छल-क ...
थोड़ी-सी मोहब्बत भी ज़रूरी है जिगर में
थोड़ी-सी मोहब्बत भी ज़रूरी है जिगर में शायर जनाब दिनेश ठाकुर की किताब परछाइयों के शहर में के बकमाल शेरों पर नज़र डालें :कभी तुम जड़ पकड़ते हो कभी शाखों को गिनते होहवा से पूछ लो न ये शजर कितना पुराना हैसमय ठहरा हुआ सा है हमारे गाँव में अब तकवही पायल, वही छमछम, वही दरिया पुराना हैझीलों की नगरी उदयपुर में जन्मे दिनेश की शायरी में गर्मी से तपती ...
भय का व्यवसाय
भय का व्यवसाय दवा कंपनियों से मिलकर डॉक्टर तरह-तरह की बीमारियों से डराते रहते हैं। स्वाइन फ्लू का डर भी इसी योजना का एक भाग था। अमरीका में भी स्वाइन फ्लू से ज्यादा लोग साधारण फ्लू से हर वर्ष मरते हैं। भारत में भी एड्स से ज्यादा लोग दस्त से मरते हैं।कुछ वर्ष पहले डेनमार्क के एक दैनिक "इन्फोर्मेशन" ने सूचना दी कि स ...
समाजसेवा के आधुनिक आयाम
समाजसेवा के आधुनिक आयाम सिम्पली वैदिक (च्त्थ्र्द्रथ्न्र् ज्ड्ढड्डत्ड़) जैसा कि नाम से ही उजागर होता है कि "सिंपल लाइफ हाई थिंकिंग।" ऐसी सोच ही इस फाउंडेशन की नींव है। इसी ऊँची सोच के साथ श्रीमती सरिता और श्रीमान नवीन शर्मा ने इस आर्गेनाईजेशन की शुरुआत की तकरीबन सात साल पहले। सिम्पली वैदिक प्राचीन ग्रंथों में भारत में होने व ...
प्रख्यात साहित्यकार डॉ. सुधाकर अदीब से राजू मिश्र की बातचीत
प्रख्यात साहित्यकार डॉ. सुधाकर अदीब से राजू मिश्र की बातचीत किताब बचेगी तो ही भाषा बचेगी सुधाकर अदीब की पैदाइश उसी अयोध्या में है जहां मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म हुआ। सरकारी चाकरी के बीच साहित्य सृजन बड़ी बात होती है, लेकिन उन्होंने समय निकालकर अपने लेखक को जिलाए रखा। बातचीत में सौम्य और मिलनसार सुधाकर के शब्दकोष में इन्कार शब्द मानो है ही नहीं। ...
स्विमिंग पूल
स्विमिंग पूल आज मैं निÏश्चत थी एकदम। उसे मैंने पूल से बाहर निकलते देखा तो एकदम चैन आ गया कि अब आराम से जब भी चाहेगा तो निकल जाऊंगी। वर्ना यही सिर पर भूत की तरह सवार हो जाता कि कहीं ऐसा न हो कि जब मैं बाहर निकलूं तभी वह निकले। और फिर ठीक से नहाना भी न हो सके।यूं यह भी बड़ी अजीब बात ही थी। उस यूनिवर्सिटी के पू ...
डच केरमिस बनाम मेला
डच केरमिस बनाम मेला मेला मानवीय संस्कृति का सजग प्रतिनिधि है। मनुष्यता के संरक्षण का विलक्षण पहरुआ है। "मेला" शब्द में सामूहिकता की जीवंत संस्कृति समाहित है। मेले के स्थल पर सभी वर्ग, जाति, धर्म, देश और भाषा के लोग एक ही स्थल पर सामाजिक-सांस्कृतिक मनोविनोद और उल्लास के लिये बगैर किसी भेदभाव और आग्रह-दुराग्रह के लिए एकत ...
हिंदी की चिंदी
हिंदी की चिंदी काले बालों वाली के आते ही तू मुझे भूल जायेगा, हिंदुस्तानी मायें अक्सर यह विलाप करती हैं। सही करती हैं। बहू के आते ही माँ पिछली सीट (डठ्ठड़त्त् डद्वद्धदड्ढद्ध) पर भेज दी जाती है। हमेशा ऐसा नहीं होता है लेकिन जब होता है बहुत दुखदायी होता है। औरत की तरह भाषा के भी कई रूप होते हैं। चलिए - माँ के रूप से श ...
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