ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
2016 Nov
कविता (4)
दूसरा पहलू
01-Nov-2016 12:00 AM 2128 दूसरा पहलू


सभ्यता का दूसरा पहलू
विकास का वीभत्स चेहरा
उघाड़ देती है आग
जलकर-झुलसकर मरती
जीव-जातियों की दर्दनाक चीखें
और उससे भी भयानक
खामोशियों के बीच
बहरे बने हु


दीपक चौरसिया Author : दीपक चौरसिया "मशाल", UK
रंग मंच
01-Nov-2016 12:00 AM 2133 रंग मंच

जरस बज रहा है
गुंबद ऊंचाई का प्रतीक
आधार स्तम्भ
बाहुबलि भुजाएँ

कमल मकरंद से सुरभित
मूर्तिमान देवता
वैभव के रसिया पुजारी
रूप के दीवाने पुरोहित

हवा


दिलेर दिओल आशना Author : दिलेर दिओल आशना, INDIA
आज का शिवाला
01-Nov-2016 12:00 AM 2127 आज का शिवाला

पहले थी कतारें,
पात्र हाथ में गोरस का
व्याकुलता रहती, मन में
कब दर्शन होगा अर्घा का।

आज भी दिखती वही कतारें
हाथ में पैसा मेहनत का
मन सबका व्याकुल उतना ही


श्यामा कुमार Author : श्यामा कुमार, UK
दरवाजे और खिड़कियाँ
01-Nov-2016 12:00 AM 2124 दरवाजे और खिड़कियाँ

दरवाज़े व्यवहारिक होते हैं
और खिड़कियाँ भावुक।

दरवाज़े सिर्फ समझते हैं
साँकल की बोली
कदमों की आहटें।

खिड़कियाँ पहचानती हैं
दबे पाँव पुरवाई का
चुपके से अंद


वंदना सिंह Author : वंदना सिंह, UK
आवरण (4)
दूर-देशों के भारतवंंशी गिरमिटिया
01-Nov-2016 12:00 AM 2136 दूर-देशों के भारतवंंशी गिरमिटिया

यह मानव का नैसर्गिक स्वभाव है कि वह जोखिम भरे कामों को आगे बढ़कर उत्साहपूर्वक करता है। जब मानव को समुद्री मार्गों से यात्रा करना सुरक्षित लगने लगा, तब इंग्लैंड, पुर्तगाल, स्पेन और फ्रांस के विस्तारव


मनोहर पुरी Author : मनोहर पुरी, INDIA
फ़ीजी के भारतवंशी
01-Nov-2016 12:00 AM 2162 फ़ीजी के भारतवंशी

प्रथम प्रवासी भारतीय श्रमिक के फीजी में अपना पग रखते ही हिंदी का प्रवेश यहाँ हो गया था। क्योंकि अधिकांश श्रमिक भारतवर्ष के हिंदी भाषी प्रदेशों से यहाँ आए थे अतः यहाँ उन्हीं की ही भाषा स्थापित हुई औ


डॉ. विवेकानंद शर्मा Author : डॉ. विवेकानंद शर्मा, INDIA
अस्मिता के संघर्षशील सिपाही
01-Nov-2016 12:00 AM 2132 अस्मिता के संघर्षशील सिपाही

सन् 1498 में 31 जुलाई की दोपहर समुद्र में अपनी यात्रा के दौरान किसी जमीन की तलाश में हताश कोलंबस को जब उसके एक नाविक ने जहाज की छत से देखकर बताया कि पश्चिम की ओर तीन पहाड़ियां दिखाई दे रही हैं तो को


डॉ. प्रेम जनमेजय Author : डॉ. प्रेम जनमेजय, INDIA
सूरीनाम की धरती पर धड़कता भारत
01-Nov-2016 12:00 AM 2168 सूरीनाम की धरती पर धड़कता भारत

खिचड़ी दाढ़ी, दो सितारा आँखों से फिसलती हुई दबी हँसी से सनी आवाज आई "मैं अंदर आ जाऊँ गुरु जी?" कहते हुए 20 साल का युवक दक्षिण अमेरिका के सूरीनाम देश के पारामारिबो शहर के भारतीय सांस्कृतिक केंद्र के ह


कविता मालवीय Author : कविता मालवीय, INDIA
संस्मरण (2)
उष्ण कटिबन्ध के प्रवासी
01-Nov-2016 12:00 AM 2056 उष्ण कटिबन्ध के प्रवासी

संयोगवश करीब तेरह बरस पहले मुझे मॉरीशस जाने का अवसर मिला। हिन्द महासागर में अपनी थोड़ी सी जगह में फैले इस व्दीप पर भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी फ्रांसीसियों और अफ्रीकियों के साथ रहती है। अंग्रेज


ध्रुव शुक्ल Author : ध्रुव शुक्ल, INDIA
गावं हेईनार देस सूरीनाम
01-Nov-2016 12:00 AM 2088 गावं हेईनार देस सूरीनाम

हालांकि केएलएम का जंबो जब पारामारिबू पर उतर रहा था तो आसमान में घने बादल थे। फिर भी उनके बीच से नीचे का सघन वन दिख जाता था। वह यूरोप के नगरों के बाहर लगाए गए वन जैसा पंक्तिबद्ध नहीं था। पानी गिरते


प्रभाष जोशी Author : प्रभाष जोशी, INDIA
किताब (1)
छिन्नमूल : भारतवंशी मन का द्वंद्व
01-Nov-2016 12:00 AM 2025 छिन्नमूल : भारतवंशी मन का द्वंद्व

औपनिवेशिक साम्राज्य की लालसा के चरम पर समूचे विश्व में कई भू-भाग पर साम्राज्यवादी सत्ता ने, समूहों में भारत के श्रमजीवियों को अपने निहित कारोबारी स्वार्थ की पूर्ति के लिये बसा दिया था। ये श्रमजीवी


राजा दुबे Author : राजा दुबे, INDIA
कहानी (1)
रॉनी
01-Nov-2016 12:00 AM 2104 रॉनी

इधर कुछ दिनों से स्टाफ़-रूम में बैठकर चाय पीना मेरे लिए एक सज़ा से कम नहीं था। दूसरी टीचर्स की बातों में छिपा व्यंग्य और कटाक्ष मुझे अक्सर ही झेलना पड़ता था। रॉनी के बारे में मि. ह्यूबर्ट के किए गए कम


उषा वर्मा Author : उषा वर्मा, INDIA
विमर्श (1)
चित्रकूट पर राम-भरत मिलन
01-Nov-2016 12:00 AM 2076 चित्रकूट पर राम-भरत मिलन

रामायण हमारे समाज की कहानी है। भाइयों की आपसी आदत, उनका बर्ताव और फिर उनमें स्नेह और सम्मान रामायण की कहानी है। बड़े भाई राम को अच्छा जाना जाता है, छोटे भाई उनको मानते हैं। आजकल के समाज का द्वेष, ईष


डॉ. विजय मिश्र Author : डॉ. विजय मिश्र, INDIA
रम्य रचना (1)
त्रिशंकु
01-Nov-2016 12:00 AM 2075 त्रिशंकु

विदेश में बसे भारतवंशियों के लिए रह रहकर एक ही शब्द ज़हन में आकर टकराता है; और वह है - त्रिशंकु। त्रिशंकु महाराज सशरीर स्वर्ग जाना चाहते थे। महान मुनि श्री विश्वामित्र  ने उन्हें पहुँचा भी दिया


सुधा दीक्षित Author : सुधा दीक्षित, INDIA
शायरी की बात (1)
ग़म तो है हासिले ज़िन्दगी दोस्तो
01-Nov-2016 12:00 AM 2114 ग़म तो है हासिले ज़िन्दगी दोस्तो

उर्दू के मशहूर शायर जनाब नक्श लायलपुरी की किताब "तेरी गली की तरफ" का एक पृष्ठ देवनागरी में और दूसरा उर्दू लिपि में छपा है, जो इसे नायाब बनाता है।

लोग फूलों की तरह आयें
के पत्थर की तरह


नीरज गोस्वामी Author : नीरज गोस्वामी ,
जन्नत की हकीकत (1)
प्रवास के मंतव्य और मानसिकता
01-Nov-2016 12:00 AM 2092 प्रवास के मंतव्य और मानसिकता

आदिमकाल में मनुष्य का कोई निश्चित स्थान नहीं था और राष्ट्र जैसी अवधारणा तो कतई नहीं थी। भोजन के लिए पशुओं का पीछा करता या पशुपालन युग में अपने पशुओं के लिए चरागाहों और पानी की तलाश में मनुष्य जाने


रमेश जोशी Author : रमेश जोशी, USA
शिकागो की डायरी (1)
अफ्रीका घूमने का रोमांच
01-Nov-2016 12:00 AM 2061 अफ्रीका घूमने का रोमांच

अफ्रीका का नाम सुनते ही अभी भी बहुतों के मन में जंगली जीवन का दृश्य घूमने लगता है। कई सालों पहले काम के सिलसिले में कुछ समय के लिये जोहांसबर्ग शहर देखने का मौका मिला। पहले सोचा, वहाँ की जीवन शैली ब


अपर्णा राय Author : अपर्णा राय, USA
न्यूयॉर्क की डायरी (1)
साहित्य पढ़ने की उम्र
01-Nov-2016 12:00 AM 2064 साहित्य पढ़ने की उम्र

यह विचार कई दिनों से मेरे मन में आ रहा था कि साहित्य पढ़ने की क्या उम्र होनी चाहिए एवं किस उम्र में किस तरह का साहित्य आप पढ़ सकते हैं। मुझे अपने बचपन की एक घटना याद आती है जब मैं 11वीं की गर्मियों क


रामानुज शर्मा Author : रामानुज शर्मा,
सिंगापुर की डायरी (1)
सिंगापुर के भारतवंशी
01-Nov-2016 12:00 AM 2055 सिंगापुर के भारतवंशी

वाणिज्यिक मार्ग के संगम पर बसा सिंगापुर मलाया द्वीप समूह को नापता हुआ भिन्न मूल के लोगों के प्रवाह का गवाह रहा है। सिंगापुर में भारतीय समुदाय की गितनी तो उँगलियों पर ही है पर देश के विकास में छाप उ


डॉ. संध्या सिंह Author : डॉ. संध्या सिंह, Singapore
बातचीत (1)
भारतवंशियों के दंश और पीड़ा को समझना होगा
01-Nov-2016 12:00 AM 2130 भारतवंशियों के दंश और पीड़ा को समझना होगा

भारतवंशी संस्कृति की अध्येता साहित्यकार प्रो. डॉ. पुष्पिता अवस्थी से आत्माराम शर्मा की बातचीत

हिंदी यूनिवर्स फाउंडेशन, नीदरलैंड की अध्यक्ष एवं प्रख्यात साहित्यकार प्रो. डॉ. पुष्पिता अवस्


आत्माराम शर्मा Author : आत्माराम शर्मा, INDIA
सम्पादकीय (1)
छोड़ अइली हिंदुस्तनवा बबुआ पेटवा के खातिर
01-Nov-2016 12:00 AM 2046 छोड़ अइली हिंदुस्तनवा बबुआ  पेटवा के खातिर

भारत की हुनरमंद जातियां अपनी कारीगरी और कला कौशल के लिये पूरे संसार में पहचानी गयी हैं। भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के आने तक यही जातियां भारत को समृद्ध बनाने में सदियों से अपना योगदान दे रही थीं। व


सुषमा शर्मा Author : सुषमा शर्मा, India
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