ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
2016 May
आवरण (7)
पानी बिच मीन पियासी
01-May-2016 12:00 AM 1076 पानी बिच मीन पियासी

प्रकृति में हर तरह का स्वतः प्रबंधन है- जल, मल, जनसंख्या, विभिन्न जीवों का संतुलन आदि। लेकिन मनुष्य की विकास की नई अवधारणा के कारण प्रकृति की इस व्यवस्था को कई तरह से प्रभावित किया है- सकारात्मक कम


रमेश जोशी Author : रमेश जोशी, USA
जल-संकट से मुक्ति की ओर चीन
01-May-2016 12:00 AM 1072 जल-संकट से मुक्ति की ओर चीन

हवा के बाद जीवन में अगर सबसे अधिक महत्त्व किसी का है तो वह पानी का ही है। ¶ारीर के पांच तत्त्वों में से पृथ्वी के प¶चात् यही तत्त्व है, जिसे आसानी से देखा-जाना और समझा जा सकता है। जीवन को


डॉ. गंगा प्रसाद शर्मा Author : डॉ. गंगा प्रसाद शर्मा, CHINA
अब ज़रूरत है जल सत्याग्रह की
01-May-2016 12:00 AM 1067 अब ज़रूरत है जल सत्याग्रह की

सबकी जरूरत की चीज़ नमक पर जब फिरंगियों ने कर लगाया तो महात्मा गांधी नमक कानून तोड़ने दाण्डी कूच पर निकल पड़े थे। पूरी दुनिया में इस अनूठे सविनय अवज्ञा आन्दोलन की मिसाल ढँूढे नहीं मिलती। वे गुलामी के द


ध्रुव शुक्ल Author : ध्रुव शुक्ल, INDIA
हम अभी भी नहीं सुधर रहे हैं
01-May-2016 12:00 AM 1070 हम अभी भी नहीं सुधर रहे हैं

आजादी के बाद के विकसित भारत के सबसे गंभीर सूखे से जूझ रहे दे¶ा में योजना व घोषणा के नाम पर भले ही खूब कागजी घोड़े दौड़ रहे हों, लेकिन हकीकत के धरातल पर ना तो समाज और ना ही सरकार के नजरिये में कु


पंकज चतुर्वेदी Author : पंकज चतुर्वेदी, India
लातूर का सूखा और "रैंगो' का कछुआ
01-May-2016 12:00 AM 1089 लातूर का सूखा और

बालीवुड की एनिमे¶ान फिल्म "रैंगों' का एक सीन है जिसमें मेयर (कछुआ) के दफ्तर में जब रैंगो (गिरगिट) मिलने जाता है तो मेयर उसे एक बोतल से पानी निकाल कर देता है। सीन में पानी को पे¶ा करने का


पंकज रामेन्दु Author : पंकज रामेन्दु, India
जीवन-रक्षा के लिये पानी की खेती करें
01-May-2016 12:00 AM 1074 जीवन-रक्षा के लिये पानी की खेती करें

अगला वि·ा युद्ध पानी के लिए होगा। इस वाक्य को हमारे आसपास रहने वाले लोग बड़ी आसानी से चर्चा में ¶ाुमार करते हैं और यह भी जानते व पढ़ते रहते हैं कि पानी की उपलब्धता दिन दुनी रात चौगनी गति


संतोष कुमार वर्मा Author : संतोष कुमार वर्मा, INDIA
किंवदन्ती बन गई किताब
01-May-2016 12:00 AM 1234 किंवदन्ती बन गई किताब

कीसी भी हिंदी लेखक की पुस्तक के यदि तीन संस्करण यानि 1500 किताबें प्रका¶िात हो जाए तो उसका मन टेड़ा-टेड़ा चलने लगता है। कभी कोई हिन्दी लेखक कल्पना में भी सोच नही सकता कि उसकी पुस्तक की लाख प्रति


नीलम कुलश्रेष्ठ Author : नीलम कुलश्रेष्ठ, India
कविता (6)
शब्द
01-May-2016 12:00 AM 1107 शब्द

शब्द सरल होते हैं
नि¶चल, निर्मल
मन को सुकून दे जाते हैं

शब्द कठोर होते हैं
निष्ठुर, जटिल
¶ाूल की तरह चुभ जाते हैं

शब्द चंचल होते हैं
¶ा


अर्चना भारद्वाज Author : अर्चना भारद्वाज, India
परकटी चिड़िया एक और पड़ाव
01-May-2016 12:00 AM 1121 परकटी चिड़िया एक और पड़ाव

परकटी चिड़िया


क्या बिगड़ गया
जो पंख कट गया
अब भी देखो
घूमती हूँ मस्ती से!

न हुआ आसमान
ज़मीन ही सही
परवाज़ के लिए
आका&pa


रेखा मैत्र Author : रेखा मैत्र,
आधा हिस्सा
01-May-2016 12:00 AM 1107 आधा हिस्सा

 
मैं उस टूटे रि¶ते का आधा हिस्सा
आधा भी रह न सका
समय की अभि¶ाप्त आँधी में
उड़ते तिनके-सा टकराता रहा।
 
वह दिन, जब हमारा रि¶ता टूटा
उस दिन


विजय निकोर Author : विजय निकोर,
बहुत हुई
01-May-2016 12:00 AM 1102 बहुत हुई

अँधेरों की वो जद्दोजहद

बहुत हुई अँधेरों की वो जद्दोजहद
चलो आज सितारों की बात करते हैं
चाँद के साथ उन सितारों की छाँव तले
चलो आज चाँदनी में नहा आते हैं


डॉ. श्रीमती रेणु मिश्रा Author : डॉ. श्रीमती रेणु मिश्रा, India
जब कोलाहल नहीं होगा
01-May-2016 12:00 AM 1109 जब कोलाहल नहीं होगा

प्रातः का स्वर्णिम विहान हो
उड़ान भरते हों पाखी
या सुरमई साँझ हो
विश्रांति हेतु स्वप्न-सा लिए
नीड़ को लौटते हों पाखी
कलरव तब ही सुन पाओगे
जब कोलाहल नहीं होगा।


अनुपमा त्रिपाठी Author : अनुपमा त्रिपाठी , India
माँ का घर
01-May-2016 12:00 AM 1118 माँ का घर

पत्ते और पंछी,
दूर हो जाते हैं बड़े होकर,
पत्ते, जो निकलते हैं कोंपलों से, हरियाते हैं,
झूमते हुए बड़े होते हैं, लहलहाते हैं,
और एक दिन टूट जाते हैं अपनी ¶ााख से,
और पी


नीरज चड्ढा Author : नीरज चड्ढा, India
विमर्श (2)
कस्मै देवाय हविषा विधेम
01-May-2016 12:00 AM 1409 कस्मै देवाय हविषा विधेम

जब भारतीय वैज्ञानिक विरासत की बात होती है, तो मन में ध्वनित हो उठता है ऋग्वेद के नासदीय सूक्त और हिरण्यगर्भ सूक्त के इन पद्यनुवादों का। ये पद्यानुवाद पं. जवाहरलाल नेहरू रचित पुस्तक "डिस्कवरी ऑफ़ इंड


राजेश करमहे Author : राजेश करमहे, India
पुण्य सलिला गंगा
01-May-2016 12:00 AM 1155 पुण्य सलिला गंगा

वाल्मीकि प्रकृति कवि हैं। उनके कवित्व से घटनाएँ स्वाभाविक हो जाती हैं। वह आका¶ा, तारों, पर्वतों, मेघों, वनों, वृक्षों, प¶ाुओं, सर्पों, पक्षियों, नदियों, मछलियों, नारियों और नरों के प्रेक्


डॉ. विजय मिश्र Author : डॉ. विजय मिश्र, INDIA
मन की बात (2)
हिंदी के सूत्र और संदर्भ
01-May-2016 12:00 AM 1210 हिंदी के सूत्र और संदर्भ

हिंदी के संदर्भ में गाँधी जी ने 1918 में इंदौर में हुए हिंदी साहित्य सम्मेलन के दौरान कहा था कि हिंदी वह भाषा है, जिसको हिंदू व मुसलमान बोलते हैं और जो नागरी अथवा फारसी लिपि में लिखी जाती है। सच है


इला कुमार Author : इला कुमार, India
भारतीय लोक कलाएँ रुचिकर हैं
01-May-2016 12:00 AM 1148 भारतीय लोक कलाएँ रुचिकर हैं

आप सभी हिंदी प्रेमियों से अपने मन की बात करूं इससे पहले अपना परिचय देना चाहती हूँ। हालांकि नहीं जानती कि खुद अपने बारे में बात करना अच्छी माना जाता है या नहीं। मेरा नाम मिलेना वेस्लोव्सकाया है। मैं


मिलेना वेस्लोव्सकाया Author : मिलेना वेस्लोव्सकाया, Masco
शिकागो की डायरी (1)
अच्छा करने की धुन
01-May-2016 12:00 AM 1154 अच्छा करने की धुन

शिकागो में अप्रवासी भारतीयों की संख्या बहुत है पर उसमें से कुछेक लोग ही हैं जो अपनी कम्युनिटी के लिए कुछ नया करने की इच्छा रखते हैं। ऐसे ही लोगों में एक नाम है प्रोमिला कुमार जी का। हाल ही में उनसे


अपर्णा राय Author : अपर्णा राय, USA
सिंगापुर की डायरी (1)
मज़दूर दिवस बनाम प्रवासी मज़दूर
01-May-2016 12:00 AM 1135 मज़दूर दिवस बनाम प्रवासी मज़दूर

प्रवासी ¶ाब्द बड़ा मनमोहक है। सुनकर लगता है जैसे एक बड़ा तगमा जुड़ गया हो। सिंगापुर में भी प्रवासियों की कमी नहीं। हर दे¶ा की तरह यहाँ भी कुछ प्रवासी सुनहरे सपने पूरे कर रहे हैं तो कुछ सुनहर


डॉ. संध्या सिंह Author : डॉ. संध्या सिंह, Singapore
अनुवाद (1)
मानस प्रबंधन
01-May-2016 12:00 AM 1197 मानस प्रबंधन

इस दुनियाँ में सभी मनुष्य एक समान नहीं हैं। हर कोई दूसरे से व्यवहार, स्वभाव, पसंद, महत्वाकांक्षा इत्यादि में भिन्न है। यह सब वैयक्तिक अंतर कहलाता है। लेकिन हमें विभिन्न मानसिकता वाले  लोगों के


बी.मरिया कुमार Author : बी.मरिया कुमार,
सम्पादकीय (1)
जल-जागृति
01-May-2016 12:00 AM 228 जल-जागृति

जल ही जीवन है। इस ¶ाा·ात सत्य से कौन इनकार करेगा? लेकिन इस सत्य के पक्ष में बोलना एक बात है और रोजमर्रा के आचरण में उतारना बिलकुल दूसरी बात। जल की महिमा सनातनकाल गायी जाती रही है। रहिमन


सुषमा शर्मा Author : सुषमा शर्मा, India
तथ्य (1)
चीनी युवाओं में भारत का आकर्षण
01-May-2016 12:00 AM 1130 चीनी युवाओं में भारत का आकर्षण

सदियों से चीनी जनमानस के मनोमस्तिष्क में भारत वास करता आया है। भारत और चीन पिछले दो हजार से भी ज्यादा वर्षों से एक-दूसरे की सभ्यता-संस्कृति को प्रभावित करते हुए सम्पूर्ण मानव समाज के उत्थान में अपन


डॉ. विवेक मणि त्रिपाठी Author : डॉ. विवेक मणि त्रिपाठी , India
नजरिया (1)
झूठ का समाजशास्त्र
01-May-2016 12:00 AM 1142 झूठ का समाजशास्त्र

कवि ¶ाुंतारी तानी कावा ने अपनी एक कविता में लिखा है : "कुछ बातें हम झूठ बोलकर ही कह सकते हैं।' बात सही है सचमुच कुछ ऐसी बातें होती हैं, जो बोली ही नहीं जा सकतीं। उन्हें प्रकट करने के लिए झूठ क


उदयन वाजपेयी Author : उदयन वाजपेयी, INDIA
किताब (1)
पांचों नौबत बाजती
01-May-2016 12:00 AM 1118 पांचों नौबत बाजती

कल्पना कीजिये, कल्पना क्यों - ये दो वास्तविक प्रकरण हैं। मंच पर कुमार गन्धर्व का गायन चल रहा है - उड़ जायेगा... हंस अकेला... भक्ति की रस धार बह रही है, गायक के स्वर सीधे ब्राहृ से जुड़े हैं श्रोता वर


बी.एन. गोयल Author : बी.एन. गोयल,
अभिमत (1)
एक सोच को बदलने की जरूरत
01-May-2016 12:00 AM 1100 एक सोच को बदलने की जरूरत

क्या जरूरत है तुम्हें शादी करने की? यों ही जिंदगी की गुजर-बसर हो ही जायेगी और यदि कर ही ली है तो ये विचार कैसे पनपा आपके ह्मदय स्थल पर कि छोड़कर एक-दूसरे को जीवन अच्छा चलेगा। कभी सोचा है कि आपकी जरा


मनमोहन शर्मा Author : मनमोहन शर्मा, Thailand
रम्य रचना (1)
मुग़ालतों का दौर
01-May-2016 12:00 AM 1152 मुग़ालतों का दौर

जैसे उम्मीद पर दुनिया क़ायम है उसी तरह गलत-फहमियों में क़ायनात टिकी है। आख़िर ¶ाराफ़त भी कोई चीज़ है। अक्सर महफ़िलों में बेसुरे-बेताले मुतरिब (गायक) के लिए भी "बहुत अच्छा', "बहुत बढ़िया' कहना पड़ता है


सुधा दीक्षित Author : सुधा दीक्षित, INDIA
व्याख्या (1)
करि जतन भट कोटिन्ह,बिकट तन नगर चहुँ दिसि रच्छहीं। कहुँ महिष मानुष धेनु, खर अज खल निसाचर भच्छही। एहि लागि तुलसीदास, इन्ह की कथा कछु एक है कही। रघुबीर सर तीरथ सरीरन्हि, त्यागि गति पैहहिं सही।
01-May-2016 12:00 AM 1088 करि जतन भट कोटिन्ह,बिकट तन नगर चहुँ दिसि रच्छहीं। कहुँ महिष मानुष धेनु, खर अज खल निसाचर भच्छही। एहि लागि तुलसीदास, इन्ह की कथा कछु एक है कही। रघुबीर सर तीरथ सरीरन्हि, त्यागि गति पैहहिं सही।

यह एक रक्ष-संस्कृति है। एक दो हजार लोग नहीं, करोड़ों लोग रक्षा के व्यवसाय में लगे हुये हैं। इसका विस्तार भी बहुत रहा होगा। भाषा भूगोल को भी बताती है। मलय भाषा में उन्हें राक्सासा और जापानी में रासेट


मनोज कुमार श्रीवास्तव Author : मनोज कुमार श्रीवास्तव,
विशेष (1)
किंवदन्ती बन गई किताब
01-May-2016 12:00 AM 1234 किंवदन्ती बन गई किताब

कीसी भी हिंदी लेखक की पुस्तक के यदि तीन संस्करण यानि 1500 किताबें प्रका¶िात हो जाए तो उसका मन टेड़ा-टेड़ा चलने लगता है। कभी कोई हिन्दी लेखक कल्पना में भी सोच नही सकता कि उसकी पुस्तक की लाख प्रति


नीलम कुलश्रेष्ठ Author : नीलम कुलश्रेष्ठ, India
शायरी की बात (1)
ख़ुश्बू की तरह से मैं फिजा में बिखर गया
01-May-2016 12:00 AM 1186 ख़ुश्बू की तरह से मैं फिजा में बिखर गया

रोज़ बढ़ती जा रही इन खाइयों का क्या करें
भीड़ में उगती हुई तन्हाइयों का क्या करें
हुक्मरानी हर तरफ बौनों की, उनका ही हजूम
हम ये अपने कद की इन ऊचाइयों का क्या करें
बौनों के हुजूम मे


नीरज गोस्वामी Author : नीरज गोस्वामी ,
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