ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
2016 Mar
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गुरु गाँव से गुड़गाँवा तक
गुरु गाँव से गुड़गाँवा तक जब भी बहिन के यहाँ गया हूँ, पालम विहार मोड़ पर खड़े हो-हो कर उँगलियों के बीच करीने से नोटें दबाए आरटीवी के कंडक्टर "गुड़गाँवा-गुड़गाँवा' चिल्लाते हुए मुझे बहुत आकर्षित करते रहे हैं। ये ठेठ भाषा में बात करते हैं। कोई कितना भी तुर्रम खाँ क्यों न हो इनकी
गुड़गांंव : खूबियों से घनीभूत शहर
गुड़गांंव : खूबियों से घनीभूत शहर एक खूबी हो तो गिना दें। गुड़गांंव अनेकानेक खूबियों से घनीभूत शहर है। कदम-कदम पर यहां विदेशी सरजमी सा अहसास होता है। नेशनल हाई-वे संख्या आठ से जो लोग कुछ साल पहले गुजरे होंगे, उन्हें सिंगापुर की तर्ज पर बहुमंजिली इमारतें अचंभित करती होंगी। कुछ वर्षो
महिला दिवस और फ्रेंच टोस्ट
महिला दिवस और फ्रेंच टोस्ट वह महिला दिवस की खुशनुमा सुबह थी। यानी पूरी तरह अपनी, सिर्फ एक महिला की सुबह। इस सुबह में किसी पुरुष का हस्तक्षेप बिलकुल नहीं था। (क्योंकि पुरुष अभी सो रहा था)। मुझे सारा संसार महिलामय दृष्टिगत हो रहा था। करोड़ों साल से उगते आ रहे सूर्य का प्रभामंड
चल सन्यासी मंदिर में
चल सन्यासी मंदिर में साहबान! सन्यासी या तो मंदिर में जायेगा या जंगल में। ग़लत! डार्विन के अनुसार जब बन्दर ड्ढध्दृथ्ध्ड्ढ होकर इंसान बन सकता है तो साधु व्यापारी क्यों नहीं बन सकता? बन सकता नहीं हुज़ूर बन चुका है। सुना नहीं -- नीचे पान की दुकान, ऊपर गोरी का मकान और बिचली
नदी-सी मैं
नदी-सी मैं बाँहें फैलाएस्वागत को आतुर प्रतिक्षाकुल तुमसमो लेते हो मुझे...बेकल मैं भी समरस होने कोपनीली देह लिएमीलों मील चली... अतृप्तभेदकर चट्टानेंवज्र देह शिलाएं यूँ लाँघती बेखौफ
तीर की छलांग
तीर की छलांग प्रिय भाई, आज जा रहा हूँ, तुमसे दूरतुम्हारी नसीहत से दूर बहुत दूर, जहाँ नहीं पहुँचेंगीतुम्हारी आकांक्षाओं की किरण।स्वयं में बांध कर बहुत जी चुका मैं,आज के मूल्यों में बंध बहुत ढोया संबंधों का बोझ!
जीवनशैली प्रबंधन भाग : दा
जीवनशैली प्रबंधन भाग : दा क्रोध पर नियंत्रण कैसे करें?अंग्रेजी का शब्द 'ठ्ठदढ़ड्ढद्ध' (क्रोध)  इस भाषा के एक अन्य शब्द 'ड्डठ्ठदढ़ड्ढद्ध' (खतरा) से मात्र एक अक्षर 'ड्ड' हटा देने से बन जाता है। सचमुच 'ठ्ठदढ़ड्ढद्ध' या क्रोध अंगार जैसा खतरनाक होता है। यह स्वयं का दुश्
नई विश्व सभ्यता
नई विश्व सभ्यता मनुष्य हर जगह एक ही हैं और सबों के महानतम मूल्य एक समान होते हैं। उनके बीच फर्क, जो तयशुदा तौर अर्थपूर्ण होते हैं, का सरोकार बाहरी, अस्थायी सामाजिक हालात से रहता है तथा उन हालात के साथ ही बदलता रहता है। आज के परिवहन एवम् संचार के तरीके सीमाओं को भ
स्मृति चारण
स्मृति चारण जीवन के कुछ अनुभव ऐसे होते हैं जिनकी हम व्याख्या नहीं कर पाते। मैं मात्र बीस महीनों के लिए ईशान भारत के असम राज्य के सिलचर में रहा था। यह बात करीब छप्पन साल पहले की है। वहाँ के लोगों से अप्रत्याशित रूप में बहुत ही स्नेह, सम्मान और स्वीकृति मिली। ल
हिन्दी और आंचलिक भाषाओं की सच्चाइ
हिन्दी और आंचलिक भाषाओं की सच्चाइ भाषा वस्तुतः किसी भूभाग के जन की भावनाओं, जन की मनोदशा, जन के मूलभूत आचरण, जन की उच्चारण क्षमता तथा उच्चारण ग्राह्रता के सापेक्ष संप्रेषण की कुल शाब्दिक सुव्यवस्था का परिपालन हुआ करती है। इस परिप्रेक्ष्य में हिन्दी की वर्तमान दशा को समझना आवश्यक ह
विदेशी छात्रों की कारकपरक त्रुटिया
विदेशी छात्रों की कारकपरक त्रुटिया विदेशी छात्र एवं छात्राएं हिंदी सीखने के लिए भारत आते हैं अथवा अपने ही देश में हिंदी सीखते हैं, उनकी सीमाएं और शक्तियां भिन्न प्रकार की होती हैं। प्रत्येक छात्र अपने देश की भाषा की संरचना के अनुसार हिंदी को समझने की चेष्टा करता है। अनेक देशों में
सूफी नृत्य की रूहानी दुनिया
सूफी नृत्य की रूहानी दुनिया सुफीमत से हर कोई परिचित है। परन्तु अधिकांश लोगों को इसके मर्म, उद्देश्य और सबसे महत्त्वपूर्ण और चैतन्य बोध प्राप्ति आदि का सम्भवतः पूर्ण ज्ञान न हो। सूफीमत में देखा जाए तो इस्लाम से इतर उसमें बौद्ध, ईसाई मत, हिन्दुत्व, ईरानी, जर्थुस्त्रवाद के अंशो
सपनों को साकार करने का मिशन जारी है
सपनों को  साकार करने का  मिशन जारी है भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम साहब कहते थे कि नई सोच का दुस्साहस दिखाओ। हमने भी अपनी सोच को नयी दिशा दी है। हमारी आँखों में भी सुनहरे सपने तैरते हैं, जो एक न एक दिन ज़रूर ही साकार होंगे।मेरा जन्म झाँसी में हुआ। कॉलेज की पढ़ाई के बाद
बिना सम्मान समता का मूल्य नहीं
बिना सम्मान समता का मूल्य नहीं हमारा यह समय अन्याय चीजों के लिए जाना जायेगा। मसलन बाजार के घर के कोनों तक में घुस आने के लिए, बुद्धि के तिरस्कार के लिए पुस्तकों की अवमानना के लिये, बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों के स्थापित होने के लिए, परम्परा के अवमूल्यन के लिए आदि-आदि। इन सब पर अलग से ब
जेएनयू में क्या हुआ
जेएनयू में क्या हुआ इंसान धरती पर तरक्की के उरूज पर पहुँच गया है। अधिकतर ग़रीब लोगों की आबादी के भारत जैसे मुल्क ने चाँद और मंगल ग्रह तक महाकाशयान पहुँचाएँ हैं। पिछली सदियों की तुलना में सारी दुनिया में लोकतांत्रिक ताकतें मौजूद हुई हैं। यह सब इंसानी काबिलियत, लियाकत औ
अभी तो अपना मुझे घर तलाश करना है
अभी तो अपना मुझे घर तलाश करना है शायर जनाब कुँवर "कुसुमेश' की लाजवाब ग़ज़लों की किताब "कुछ न हासिल हुआ' पढ़कर ऐसा महसूस होता है, जैसे कुछ नायाब हासिल हुआ है।जो बड़े प्यार से मिलता है लपककर तुझसेआदमी दिल का भी अच्छा हो वो ऐसा न समझआज के बच्चों पे है पश्चिमी जादू का अ
हिंदी-रूसी अनुवादक बनने का स्वप्न
हिंदी-रूसी अनुवादक बनने का स्वप्न मेंरा नाम अन्या शप्रान है। मेरी उम्र बीस साल की है। मैं विद्यार्थी हूँ और वि?ाविद्यालय से हिंदी भाषा में दर्शन शास्त्र सीख रही हूँ। मुझे पढ़ना बहुत पसंद है। हिंदी के अलावा मैं भारतीय साहित्य, इतिहास, संस्कृत, दर्शन शास्त्र, भूगोल भी सीख रही हूँ। वि
नेक्स्ट टू गॉडलीनेस
नेक्स्ट टू गॉडलीनेस सफाई के बारे में अंग्रेजी कहावत है- क्लीनली नेस इज नेक्स्ट टू गॉडलीनेस। ई?ार के बाद सफाई ही सबसे महत्त्वपूर्ण है। वैसे तो ई?ार भी सफाई पसंद करता है- मन की सफाई, विचारों की सफाई, कर्मों की सफाई, वाणी की सफाई- एक निश्च्छल मन जो अंततः जीवन को भी सुन्
ध्यान की बहुआयामी छटाए
ध्यान की बहुआयामी छटाए ध्यान, योग, आध्यात्मिकता, इन सबके बारे में सुनना, देखना, पढ़ना, लगभग हर दूसरे तीसरे दिन हो जाता है, पर इसका व्यक्तिगत अनुभव करने का अभी तक मौका नहीं मिला था। लेकिन हाल ही में मेरे छोटे भाई-भाभी, जो वाशिंगटन डीसी में रहते हैं, ने अपनी सालभर की बेटी
अवलोकी अज्ञेय
अवलोकी अज्ञेय कवि अज्ञेय की एक कविता उद्धरित करता हूँ। इसे स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में दिल्ली की जेल में लिखा गया। यह उनकी प्रारंभिक गद्य कविताओं में शामिल है। कविता बयान के शिल्प में रची गयी है--मैं अपने अपनेपन से मुक्त होकर, निरपेक्ष भाव से जी
धरती पर जन्नत है मालदीव
धरती पर जन्नत है मालदीव समंदर के गहरे नीले पानी में नीलम की अंगूठियों की तरह छितराए छोटे-छोटे द्वीपों की तस्वीरें जब भी देखता था तो उल्लासभरा सुकून मन में भर जाता था। भारत के दक्षिण में हिंद महासागर में मौजूद छोटे-से देश मालदीव के ये करीब 1100 द्वीप इस धरती को कुदरत के क
कृत सुन्दरायतना घना। चउहट्ट हट्ट सुबट्ट बीथीं चारु पुर बहु बिधि बना। गज बाजि खच्चर निकर पदचर रथ बरूथन्हि को गनै। बहुरूप निसिचर जूथ अतिबल सेन बरनत नहिं बनै।
कृत सुन्दरायतना घना। चउहट्ट हट्ट सुबट्ट बीथीं चारु पुर बहु बिधि बना। गज बाजि खच्चर निकर पदचर रथ बरूथन्हि को गनै। बहुरूप निसिचर जूथ अतिबल सेन बरनत नहिं बनै। इस बिन्दु पर पहुंचकर कथा की रिद्म बदलती है। यहां तुलसी ने जैसे एक स्टेज की सेटिंग की है। कथा-लय में यह परिवर्तन साभिप्राय है। अब हनुमान जो वनचर थे, सहसा एक नगर बल्कि राजधानी से साक्षात्कृत होते हैं। सुन्दर सहज अगम अनुमानी/कीन्हि तहाँ रावन रजधानी।
अयोध्या नगरी
अयोध्या नगरी रमायण ग्रन्थ की शुरुआत में ऋषि वाल्मीकि उस "आदर्श' मनुष्य की खोज के बारे में बताते हैं जो मनके चिंतन में है। उनको नारद ऋषि राम और रामायण कथा की रूपरेखा के बारे में बतलाते हैं। कहानी के नाटकीय विवरण के पश्चात, नारद ऋषि ने बताया कि राम "अयोध्या' नगर
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