ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
आवरण (14)
कबीर का समाज
01-Jun-2016 12:00 AM 1386 कबीर का समाज

अल्बर्ट आइंस्टीन से क्षमा-याचना सहित उनके ¶ाब्दों को बदलकर मैं कहना चाहूँगा कि आने वाली पीढ़ियां कैसे वि·ाास करेंगी कि पंद्रहवीं ¶ाताब्दी में एक ऐसा इंसान हाड़-मांस युक्त जन्मा था जि


हरिहर झा Author : हरिहर झा, ऑस्ट्रेलिया
दास कबीर जतन ते ओढ़ी
01-Jun-2016 12:00 AM 1356 दास कबीर जतन ते ओढ़ी

कबीर ने मानव देह का झीनी चादर का प्रतीक लेकर एक अति स¶ाक्त साँग-रूपक रचा है जिसके अंत में वे अन्यों और स्वयं के बारे में जो धाकड़ घोषणा करते हैं वह गर्वोक्ति नहीं, एक सिर चढ़कर बोलने वाला सच है।


रमेश जोशी Author : रमेश जोशी, USA
कबीर की उलटबांसी
01-Jun-2016 12:00 AM 1583 कबीर की उलटबांसी

मसि कागज छूवो नहीं, कलम गही नहिं हाथ, के बावजूद कबीरदास का नाम हिंदी भक्त कवियों में बहुत ऊँचा है। वे सच्चे अर्थों में समाज-सुधारक तथा युग पुरुष थे। कबीर निर्गुण भक्ति धारा की ज्ञानमार्गी ¶ााख


डॉ. सुरेश राय Author : डॉ. सुरेश राय,
सुनो भई साधो
01-Jun-2016 12:00 AM 1353 सुनो भई साधो

हिंदी के संत साहित्य में कबीर का अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है। चार प्रमुख भक्त कवियों में कबीर सबसे पहले आते हैं। भक्तिकाल का समय मुहम्मद बिन तुगलक से ¶ाुरू होकर मुगलों के ¶ाासनकाल तक मान


डॉ. शैलजा सक्सेना Author : डॉ. शैलजा सक्सेना,
सुरत निरत के भेद
01-Jun-2016 12:00 AM 412 सुरत निरत के भेद

कभी-कभी लगता है कि इतिहास तो अपनी गति से आगे बढ़ता चला गया है, लेकिन हम वहीं के वहीं खड़े रह गए हैं, जहां थे। है तो यह विडम्बना ही। इक्कीसवीं सदी की पन्द्रहवीं ¶ाताब्दी के युग से तुलना। लेकिन लग


गुलशन मधुर Author : गुलशन मधुर,
अविस्मरणीय कबीर
01-Jun-2016 12:00 AM 1342 अविस्मरणीय कबीर

कबीर किसी धर्म के प्रवर्तक नहीं मात्र मानवता और सत्य के पुजारी हैं। वे संसार में रहते हुए सांसारिक मोह से परे, सत्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। फक्कड़ कबीर ने समाज की प्रचलित कुप्रथाओं की खुलकर


मीरा गोयल Author : मीरा गोयल,
कबीर के मायने
01-Jun-2016 12:00 AM 1367 कबीर के मायने

जिन शब्दों के पीछे शा·ात सत्य हैं शक्ति और प्रभाव उन्हीं में होता है। वे ही शा·ाती पाकर त्रिकालजयी होते हैं और समय का वह काल खण्ड स्वयं इनके ही नाम हो जाता है।
तैसे ध्यान धरहु जि


डॉ. मृदुल कीर्ति Author : डॉ. मृदुल कीर्ति,
साधो, सहज समाधि भली
01-Jun-2016 12:00 AM 1358 साधो, सहज समाधि भली

प्रायः महापुरुषों के अनेक रूप होते हैं। कबीर के भी अनेक रूप हैं। किसी के लिए वे दैनिक जीवन के लिए उपयोगी सूत्र देने वाले कवि हैं, तो किसी के लिए एक वि¶ोष पंथ के प्रवर्तक। किसी के लिए वे वर्तमा


नवोदिता माथुर Author : नवोदिता माथुर,
हमन है इश्क मस्ताना
01-Jun-2016 12:00 AM 1312 हमन है इश्क मस्ताना

भारत की सभ्यता में कबीर का योग अनूठा है। उनके युग में न तो उग्रवाद था और न आज जैसा भ्रष्टाचार। मुस्लिम ¶ाासन होने के कारण धर्म-परिवर्तन के लिये जोर-जबरदस्ती जरूर की जाती थी। कबीर के समकालीन ना


प्रो. मोहनकान्त गौतम Author : प्रो. मोहनकान्त गौतम,
माया महा ठगनी
01-Jun-2016 12:00 AM 1296 माया महा ठगनी

    बीर सन्त भक्त कवि हैं। उनकी दृष्टि से समाज की
    कौन-सी ऐसी समस्या थी जो अछूती रह गई हो।
    उनकी रचनाएँ अब भी राह दिखाती हैं। प्र¶न


डॉ. सरोज अग्रवाल Author : डॉ. सरोज अग्रवाल,
कबिरा खड़ा बाज़ार में
01-Jun-2016 12:00 AM 1273 कबिरा खड़ा बाज़ार में

मानस में एक चित्र उभरता है, राग-द्वेष से परे, कौन है यह संत जो सबकी खैर की कामना करता है? यह संत और कोई नहीं, मध्यकालीन भारत में व्याप्त अन्धकार को अपने ज्ञान की ज्योति से ज्योतिर्मय करने वाले अग्र


पुष्पा सक्सेना Author : पुष्पा सक्सेना, USA
कबीर गरब न कीजिये
01-Jun-2016 12:00 AM 1262 कबीर गरब न कीजिये

कबीर ऊपरी दिखावे की बहुत आलोचना करते हैं। कुछ लोग माला तो फेरते है लेकिन उनका ध्यान कहीं और होता है। जाति-प्रथा पर चोट करते हुए वे कहते हैं कि केवल ऊँचे कुल में जन्म लेने से कुछ नहीं होता है जब तक


डॉ. दिनेश श्रीवास्तव Author : डॉ. दिनेश श्रीवास्तव,
मन रे जागत रहिये भाई
01-Jun-2016 12:00 AM 1173 मन रे जागत रहिये भाई

मै कबीर को पढ़ता नहीं सुनता हूँ। मैंने कबीर को पढ़ कर नहीं जाना, सुन कर जाना है : कुमार गन्धर्व से सुना है, पद्मश्री भारती बन्धु से सुना है, प्रह्लाद सिंह टिपाणिया से सुना है, मधुप मुद्गल से सुना है,


अनिल प्रसाद Author : अनिल प्रसाद,
भया कबीर उदास
01-Jun-2016 12:00 AM 1119 भया कबीर उदास

कबीर भारत की वो आत्मा है जिसने रूढ़ियों और कर्मकाडों से मुक्ति की कल्पना की। कबीर वो पहचान है जिन्होंने जाति-वर्ग की दीवार गिराने का जोखिम उठाया। अपनी सरलता, साधु स्वभाव तथा संत प्रवृत्ति के कारण आज


नीना वाही Author : नीना वाही,
विमर्श (4)
ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया
01-Jun-2016 12:00 AM 1333 ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया

1
बहुत बरस नहीं हुए जब कबीर-गायन सुनते हुये मेरी मुलाकात एक बूढ़े ग्रामीण से हुई। उन्होंने पहले काफी संकोच से मुझसे समय पूछा और फिर मुझे कबीर में भीगता देख हल्के से पूछा, ""क्या आप जानते हैं कि


उदयन वाजपेयी Author : उदयन वाजपेयी, INDIA
लागा चुनरी में दाग़
01-Jun-2016 12:00 AM 1278 लागा चुनरी में दाग़

पण्डित कुमार गंधर्व की आवाज़ आ रही है। वे कबीर के करघे की लय पर गा रहे हैं-
दास कबीर जतन सों ओढ़ी, ज्यों की त्यों धर दीन्हीं चदरिया।
झीनी-झीनी बीनी चदरिया।
अपने कर्म की लय पर रचा गया क


ध्रुव शुक्ल Author : ध्रुव शुक्ल, INDIA
धर्म कर्म कछु नहीं उहंवां
01-Jun-2016 12:00 AM 1309 धर्म कर्म कछु नहीं उहंवां

रामानन्द के ¶िाष्य, संवादी कबीर ने स्वयं को न कभी धर्मगुरु कहा, न अवतार। वे स्वयं को न पैगंबर के रूप में देखते हैं, न नये धर्म के संस्थापक के रूप में। उनके नाम से पंथ का प्रवर्तन किया धनी धर्म


पुरुषोत्तम अग्रवाल Author : पुरुषोत्तम अग्रवाल,
द्विविधा भंजक कबीर
01-Jun-2016 12:00 AM 1381 द्विविधा भंजक कबीर

कर्मकाण्डी समाज को और कोई क्या झकझोरेगा? आज किसी को ये बातें कह दें, सामने वाला मटियामेट कर देगा। समाज तनावग्रस्त हो जाएगा। लेकिन, कबीर साहिब साधारण, तरीका साधारण, पर बात असाधारण।
सुनो! सबसे प


हेम चन्द सिरोही Author : हेम चन्द सिरोही, INDIA
कविता (2)
लोक में कबीर
01-Jun-2016 12:00 AM 1229 लोक में कबीर

बुन्देली

नैहर खेल लेव चार दिन चारी
पैले लुबउवा तीन जनें आये, नाई बामन बारी।
बाँह पकर माता सें बोली, अबकी गवन देव टारी।।
दुजे लुबउवा ससुर जू आये, कर घोड़ा असवारी।
बाँह


Editor Author : Editor, INDIA
एक कबीर नहीं बना सकते?
01-Jun-2016 12:00 AM 1150 एक कबीर नहीं बना सकते?

रह-रह कर पूछता हूँ तुमसे
इतना बनाते रहते हो तुम
इतना बनाते रहते हैं हम
एक कबीर ही नहीं बना सकते?

पूछता हूँ लोगों से मैं
जो हैं महान वैज्ञानिक
आविष्कारक
नूतन


राधेकांत दवे Author : राधेकांत दवे,
रपट (2)
एडीसन में हिंदी महोत्सव सम्पन्न
01-Jun-2016 12:00 AM 1229 एडीसन में हिंदी महोत्सव सम्पन्न

न्यूजर्सी के एडिसन ¶ाहर में 21 व 22 मई को "हिंदी यूएसए' ने अपने पन्द्रहवें हिंदी महोत्सव का आयोजन किया। दो दिनों तक चले इस आयोजन में पूरी तरह से हिंदी का आधिपत्य रहा। भिन्न-भिन्न उम्र वर्ग के


Editor Author : Editor, INDIA
अमरीका में हिंदी का दीपक
01-Jun-2016 12:00 AM 1224 अमरीका में हिंदी का दीपक

न्यूयॉर्क में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी का तीन दिवसीय आयोजन 29 अप्रैल से 1 मई 2016 तक सम्पन्न हुआ। भारत के जनरल कांसुलेट के हॉल में सम्पन्न समारोह में ¶ाामिल होने दे¶ा-विदे¶ा से


डॉ. हाइंस वर्नर वेसलर Author : डॉ. हाइंस वर्नर वेसलर,
शिकागो की डायरी (1)
गुम होती पहचान
01-Jun-2016 12:00 AM 1233 गुम होती पहचान

शिष्टाचार, आदर, संस्कार भारतीय संस्कृति की सुंदर वि¶ोषताएँ कही जाती हैैं, लेकिन आधुनिक समय में क्या यह कोरे ¶ाब्द भर नहीं रह गये हैं? और धीरे-धीर अपनी चमक खो रहे हैं। हर संस्कृति के अपने


अपर्णा राय Author : अपर्णा राय, USA
अनुवाद (1)
मानस प्रबंधन अंग्रेजी से अनुवाद राजेश करमहे भाग : दो
01-Jun-2016 12:00 AM 1167 मानस प्रबंधन अंग्रेजी से अनुवाद राजेश करमहे भाग : दो

असली आधुनिकता क्या है?
मात्र पाँच सौ वर्ष पहले कोलंबस के द्वारा अमेरिका की खोज की गई थी। ज़ल्दी ही यह समृद्ध समाज बन गया। कठिन और चुस्त-दुरुस्त कार्यों और दृष्टिकोण की वजह से इसका सर्वांगीण विक


बी.मरिया कुमार Author : बी.मरिया कुमार,
सम्पादकीय (1)
चल हंसा वा देस
01-Jun-2016 12:00 AM 1267 चल हंसा वा देस

अपना देश, खासकर मध्यकालीन भारत फ़क़ीरों का देश रहा है। अरबी का एक मूल है -फ़-क़-र, जिसका अर्थ है - निर्धनता। इसी मूल से फ़क़ीर शब्द की निष्पत्ति हुई है। फ़क़ीर परंपरा को मध्यकाल में देश पर बाह्र आक्रमणों क


Editor Author : Editor, INDIA
रम्य रचना (1)
कहत कबीर सुनो भई साधो
01-Jun-2016 12:00 AM 1334 कहत कबीर सुनो भई साधो

कबीरदास बड़े ही विलक्षण व्यक्ति थे। एकदम बिंदास, बिलकुल हमारी तरह। उन्हीं की तरह हमारी भी ना किसी से दोस्ती है (अरे, दोस्त तो बहुत हैं हमारे - मगर चमचागिरी वाला रि¶ता किसी से नहीं है।) और ना ही


सुधा दीक्षित Author : सुधा दीक्षित, INDIA
व्याख्या (1)
कस्मै देवाय हविषा विधेम?
01-Jun-2016 12:00 AM 1559 कस्मै देवाय हविषा विधेम?

गर्भनाल पत्रिका, मई 2016 अंक में प्राचीन भारत में ज्ञान-विज्ञान की चर्चा करते हुए वैदिक युग की वैज्ञानिक जिज्ञासाओं और संभावनाओं को रेखांकित किया गया था। इस चर्चा की शुरुआत राइबोसोम पर अपने अनुसंधा


राजेश करमहे Author : राजेश करमहे, India
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