ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
लंदन में बरसात के दिन
लंदन में बरसात के दिन

अक्सर कहा जाता है कि लंदन या ब्रिाटेन में वर्षाऋतु नहीं होती केवल बरसात का मौसम होता है। यहाँ जब लोग घर से निकलते हैं तो झोले में घर की चाबी, खाने का डिब्बा, ट्रेन में पढ़ने के लिए एक किताब के अलावा, एक छाता ज़रूर रखते हैं। न जाने किस मोड़ पर इन्द्रदेव से मुलाक़ात हो जाये। बीबीसी उर्दू सर्विस के मेरे ...

इंग्लैंड की बरसातें
इंग्लैंड की बरसातें

यह चुटकुला इंग्लैंड में बेहद प्रसिद्ध है कि "इंग्लैंड में बारि¶ा साल में सिर्फ दो बार होती है- जुलाई से मार्च तक और अप्रैल से जून तक।'
और यह ही क्यों इंग्लैंड में अधिकाँ¶ा चुटकुले मौसम और बारि¶ा को लेकर ही होते हैं और किसी भी बातचीत की ¶ाुरुआत ज्यादातर मौसम से ही ¶ाु ...

ऑस्ट्रेलिया में बरखा
ऑस्ट्रेलिया में बरखा

लोग मुझसे मौसम के बारे में कुछ भी पूछने से कतराते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि मैं मौसम- विभाग में काम करता हूँ उन्हें आँकड़े सुना-सुना कर हलकान कर दूंगा। आँकड़े सुनाना किसी हथियार-प्रयोग में शामिल नहीं है। पत्थर से ले कर पिस्तौल या बम तक कुछ भी इस्तेमाल न हुआ हो तो पुलिस या अदालत कुछ बिगाड़ नहीं सकत ...

शिकागो में वर्षा-बहार
शिकागो में वर्षा-बहार

अमेरिका में शिकागो को यूँ तो विंडी सिटी के रूप में जाना जाता है, पर यहां हर मौसम का अलग ही रोमांचक अनुभव है। शिकागो शहर की ठण्ड की तो जैसे बात करने की ज़रूरत ही नहीं। इतनी ठण्ड की इस समय कोई भी यहां भूल से भी आकर घूमने की योजना नहीं बना सकता। जबकि शिकागो इतना सुंदर शहर है कि हर एक कम से कम एक बार ...

सिआटेल में उदासीन मन-मयूर
सिआटेल में उदासीन मन-मयूर

सिआटेल आने के पहले इस नगर के सौन्दर्य के विषय में सुन रखा था। सिआटेल में पहुंचते ही यहाँ की हरीतिमा ने मुग्ध कर दिया। मेरी कल्पना से भी अधिक सुन्दर है यह नगर। ऐसा लगता है मानो विधाता ने हरे रंग की कूची से पूरे नगर को हरे रंग में रंग दिया है। यहाँ आने के पूर्व मेरे बेटे ने कहा था, इस नगर में सब कु ...

नेपरविल में बरसात की छटायें
नेपरविल में बरसात की छटायें

अमेरिका में बरसात की छटा बड़ी निराली होती है। प्रकृति की
बरसाती छटा और बसंती सौन्दर्य को देख कर प्राणी कुछ
पल के लिये जीवन की उलझनों को भूल जाता है।

बरसात का मौसम हर चर-अचर को शीतलता प्रदान करता है। इन्द्र देव की कृपा से जब वर्षा रानी आकाश से रिमझिम संगीत के साथ धरती पर उतरत ...

मेघों का घर नीदरलैंड
मेघों का घर नीदरलैंड

नीदरलैंड में वर्षाऋतु आती नहीं है वह सर्वदा यहीं रहती है। हमेशाा आकाशा में बिना कोलाहल किए बादलों की क्रीड़ा होती रहती है। कभी उत्तरी क्षेत्र से ठंडी हवाओं के मेघों का दल घुमड़ते हुए आता है और ठंडी बरसात का असर छोड़ जाता है। कभी नार्थ-सी की पशिचमी हवाएं बादलों का समशाीतोष्ण समुदाय लाती हैं जो सधी हु ...

लायडन में रिमझिम बरसात
लायडन में रिमझिम बरसात

नीदरलैंड्स में पिछले छह दशाकों से मौसम में काफी परिवर्तन हुआ है। पहले यहां बसंत, हेमंत, शाीत और ग्रीष्म ऋतुएं निर्धारित निशिचत समय पर होती थीं। भारत की भांति यहां वर्षाऋतु निशिचत कभी नहीं रही है। कभी-कभी एक ही दिन में गहरा कुहरा, तूफान, बारिशा, ओले, हिमपात और सूरज की धूप की गर्मी एक साथ हुई है। इ ...

ट्रिनिडाड की बरसात में देश की यादें
ट्रिनिडाड की बरसात में देश की यादें

बरसात का मौसम हमेशाा ही मन में रोमांच पैदा करने वाला होता है। ट्रिनिडाड और टोबेगो में बरसात का मौसम जून से दिसम्बर तक छह महीनों का होता है। यहाँ पर बरसात अपने उत्तर भारत की तरह सिर्फ जुलाई से अगस्त में नहीं होती है। बल्कि कभी-कभी साल के किसी भी महीनों में पानी बरस जाता है।
यहाँ पूरे प्रायद्व ...

बहरीन में वर्षा
बहरीन में वर्षा

बहरीन का अरबी नाम है- मुम्लिकत अल-बहरईन। इसकी राजधानी है मनामा। ये अरब जगत का एक हिस्सा है जो एक द्वीप पर बसा हुआ है। बहरीन 1971 में स्वतंत्र हुआ और संवैधानिक राजतंत्र की स्थापना हुई, जिसका प्रमुख अमीर होता है। 1975 में यहां की नेशानल असेंबली भंग हुई, जो अब तक बहाल नहीं हो पाई है। 1990 में कुवैत ...

वर्षा वर्णन
वर्षा वर्णन

गोस्वामी तुलसीदास
प्रयाग के पास बाँदा जिले में राजापुर नामक गाँव में संवत् 1554 को जन्म। का¶ाी में पंद्रह वर्षों तक वेदों और दूसरे संस्कृत ग्रंथों का अध्ययन। विवाह के बाद पत्नी मोह और पत्नी की फटकार के बाद सन्यासी हो गये। संवत् 1631 में घर-घर में पढ़े जाने वाले ग्रन्थ रामचरित मानस और विन ...

काले बादल
काले बादल

सुमित्रानंदन पंत
बीसवीं सदी का पूर्वाद्र्ध छायावादी कवियों का उत्थान काल था। उसी समय अल्मोड़ा निवासी सुमित्रानंदन पंत उस नये युग के प्रवर्तक के रूप में हिन्दी साहित्य में अभिहित हुये। इस युग को जय¶ांकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और रामकुमार वर्मा जैसे छायावादी प्र ...

बादल राग
बादल राग

सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला'
वसंत पंचमी, 1896, मेदिनीपुर, प¶िचम बंगाल में जन्म। मुख्य कृतियाँ : उपन्यास : अप्सरा, अलका, प्रभावती, निरुपमा, कुल्ली भाट, बिल्लेसुर बकरिहा। कविता संग्रह : अनामिका,परिमल, गीतिका, द्वितीय अनामिका, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, अणिमा, बेला, नये पत्ते, अर्चना, आराधना, ग ...

घर की याद
घर की याद

भवानीप्रसाद मिश्र
29 मार्च 1913, टिगरिया, हो¶ांगाबाद में जन्म। कविता संग्रह : गीतफरो¶ा, चकित है दुख, गांधी पंच¶ाती, बुनी हुई रस्सी, खु¶ाबू के ¶िालालेख, त्रिकाल संध्या, व्यक्तिगत, परिवर्तन जिए, अनाम तुम आते हो, इदं न मम, ¶ारीर कविता फसलें और फूल, मान-सरोवर दिन, स ...

भटका मेघ
भटका मेघ

श्रीकांत वर्मा
18 सितंबर 1931 को बिलासपुर में जन्म। कविता संग्रह : भटका मेघ, मायादर्पण, दिनारंभ, जलसाघर, मगध। कहानी संग्रह : झाड़ी, संवाद। उपन्यास : दूसरी बार। आलोचना : जिरह। यात्रा वृत्तांत : अपोलो का रथ। अन्य : बीसवीं सदी के अँधेरे में। अनुवाद : फैसले का दिन (कविताएँ : आंद्रेई वोज्नेसेंस्की ...

मेरे राम का मुकुट भीग रहा है
मेरे राम का मुकुट भीग रहा है

विद्यानिवास मिश्र
28 जनवरी 1925 को पकड़डीहा, गोरखपुर में जन्म। मुख्य कृतियाँ : स्वरूप-विमर्¶ा, कितने मोरचे, गांधी का करुण रस, चिड़िया रैन बसेरा, छितवन की छाँह, तुलसीदास भक्ति प्रबंध का नया उत्कर्ष, थोड़ी सी जगह दें, फागुन दुइ रे दिना, बसंत आ गया पर कोई उत्कंठा नहीं, भारतीय संस्कृति के आधार ...

पानी की आवाज सुनो
पानी की आवाज सुनो

अब पानी सब व्यक्तियों, व्यापारियों और व्यवस्थाओं के खिलाफ आंदोलन पर है
कि मेरे रास्ते से हटो। मेरा रास्ता मत रोको। मुझे नदी में बहने दो, कुइया में,
पोखर में, ताल में भरने दो, कुओं में आहिस्ता-आहिस्ता रिसने दो, पर्वत से
मुक्त झरने दो। मुझे बाँधते क्यों हो। क्यों मेरा रास्ते मोड़ते ...

मुंबई की बरसात
मुंबई की बरसात

इस साल जून के महीने में बरसात का कहीं नामोनिशाां नहीं दिखा। गरमी और पसीने से त्राहिमाम् करते लोगों को देखकर पिछले बरस की बरसात की शाुरूआत का खूबसूरत मंजर अनायास ही आंखों के आगे झूम उठता है। मई का महीना था, बरसात अभी शाुरू नहीं हुई थी। ऐसी ही एक शााम मरीन ड्राइव पर अपने पति के साथ पत्थर पर बैठे हु ...

बारिश में मुंबई
बारिश में मुंबई

समुंदर की लहरें उफान पर हैं। किनारे से टकराकर, किनारे को भिगोकर, कोलतार की स्याह सड़कों पर उछलकर फिर से लौट रही है, समुंदर में। किनारे से दूर खड़ी उस चाय की टपरी से "बरखा रानी, जरा जमके बरसो, मेरा दिलबर जा न पाये...' मुकेशा की आवाज कुछ इस तरह झरते हुए दिल में उतर रही है कि कुछ पुरानी बातें याद आ रह ...

हिमाचल में बरसात का रोमांच
हिमाचल में बरसात का रोमांच

देश के मैदानी इलाकों में भले ही बरसात का मौसम आफत लेकर आता हो लेकिन ऊँचे पहाड़ों पर यही बरसात कुदरत की खूबसूरत नैमतें लेकर आती है। कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाये तो बरसात पहाड़ों को इस तरह सजाती संवारती है की सदैव पहाड़ों पर रहने वाले लोग भी इस सौन्दर्य पर फ़िदा हो जाते हैं। बच्चे, बूढ़े, नवयुवक, नवयुवत ...

बोले रे पपीहरा, अब घन गरजे
बोले रे पपीहरा, अब घन गरजे

मेघाच्छादित आकाशा को देख मयूर नाचने लगते हैं। पपीहा "पिय आया, पिय आया' गाने लगता है।
दादुर और झींगुर अपनी हर्षध्वनि से पावस ऋतु का स्वागत करते हैं। कुल मिलाकर, प्रकृति के संगीत
और मानवीय उमंग का एक सुंदर संपर्क बन जाता है। चहुँ ओर मंगल वर्षा होने लगती है।

भारत में ऋतुओं की संख ...

हरियाला सावन ढोल बजाता आया
हरियाला सावन ढोल बजाता आया

इस साल की भयानक गर्मी के बाद -- "सावन आया – धिन तक तक मन के मोर नचाता आया।' वर्षा और मोर का चोली दामन का साथ है। दोनों ही का संबंध नृत्य से भी है और नृत्य तो हर भारतीय की रग-रग में बसा है। मयूर यूँ ही तो नहीं राष्ट्रीय पक्षी घोषित कर दिया गया है।
"मन मोर मचावे शाोर, घटा घनघोर आई घिर-घ ...

कस्मै देवाय हविषा विधेम?
कस्मै देवाय हविषा विधेम?

भारतीय मानस की अनवरत् जिज्ञासा की कथा की यह कड़ी आधुनिक भारत में वैज्ञानिक विकास लिखने के क्रम में बारम्बार यही प्रशन मानस पटल पर उभर कर आता है, "कस्मै देवाय हविषा विधेम?' अर्थात् किस देवता की उपासना करें हम हवि देकर? क्या हमें वर्तमान वैज्ञानिक विकास के आलोक में अपने पूर्वजों के सत्य को जानने के ...

मानस प्रबंधन अंग्रेजी से अनुवाद राजेश करमहे भाग : तीन
मानस प्रबंधन अंग्रेजी से अनुवाद राजेश करमहे भाग : तीन

सामान्य बोध में असामान्य क्या है?
1776 के आरम्भिक समय में, जब थॉमस पेन लोगों को प्रेरित कर रहे थे; अमेरिका की ब्रिाटिशा शाासन से स्वतंत्रता प्रायः सन्निकट थी। यह जुलाई में घटित भी हुआ। पेन के प्रेरित करने वाले चिट्ठे का शाीर्षक था - सामान्य बोध। लोगों ने इसे लिया और अवलोकन किया। सामान्य बोध ...

वर्षा-मंगल
वर्षा-मंगल

ऋग्वेद के पाँचवे मंडल के 83वें सूक्त की इस प्रथम ऋचा में उस वैदिक महा¶ाक्ति¶ााली, दानवीर और भीम गर्जना करने वाले पर्जन्य देवता की स्तुति की गई है, जो वृषभ के समान निर्भीक है और पृथ्वीतल की औषधियों में बीजारोपण करके नवजीवन के आगमन की सूचना देते हैं। यहाँ पर्जन्य (पज्र्जन्य या पय्र्यन्य भ ...

अनूठा द्वीप तस्मानिया
अनूठा द्वीप तस्मानिया

शाीतोष्ण जलवायु होने के कारण तस्मानिया पहाड़ी एवं ठंडा प्रदेशा है। इसकी
नैसर्गिक शाोभा में विशााल पहाड़ों व घाटियों के साथ दो नदियाँ, झरने, झीलें,
सुंदर सागर तट, विशिाष्ट वनस्पतियाँ और जीव-जन्तु सम्मिलित हैं।

ऑस्ट्रेलिया का दक्षिणवर्ती प्रदेशा तस्मानिया मेनलैंड (ऑस्ट्रेलियन म ...

कबीर के बहाने मुँह चिढ़ाते सवाल
कबीर के बहाने मुँह चिढ़ाते सवाल

कबीर की बात करने वाला, उनके कहे के दम पर समाज में व्यापी विद्रूपता
पर कुठाराघात करने वाला समुदाय या वर्ग क्या वाकई कबीर के मंतव्यों का
अनुगामी है? और वही परिणाम चाहता है जैसी कबीर की अपेक्षाएँ थीं?

गर्भनाल पत्रिका का जून-2016 अंक प्राप्त हुआ। कबीर पर यथोचित सामग्री ने एक पठनीय ...

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