ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
प्रवासी भारतीय दिवस क्यों मनाएं
प्रवासी भारतीय दिवस क्यों मनाएं

ई शताब्दियों से भारतीय दूसरे देशों में स्थाई या अस्थायी रूप से बस रहे हैं। लेकिन प्रवासी भारतीय दिवस मनाने के लिए हमें 9 जनवरी 2003 तक प्रतीक्षा करनी पड़ी। अधिकतर प्रवासी भारतीय भावनात्मक रूप से भारत से जुड़े होते हैं परन्तु यह लगाव व्यक्तिगत या सामाजिक स्तर तक ही सीमित था। प्रवासी भारतीय दिवस ने इ ...

प्रवासी भारतीय दिवस के मायने
प्रवासी भारतीय दिवस के मायने

प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन अब एक परम्परा बन गया है। 9 जनवरी 2003 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने "सदा खुले हैं द्वार' कविता-पंक्ति सुनाकर विश्व भर में फैले प्रवासी-आप्रवासी भारतीयों को संदेश भेज दिया था कि भारत उनका स्वागत अभिनंदन करना चाहता है। उनके संघर्ष, उनकी उद्यमशील ...

प्रवासी भारतवंशियों की गाथा
प्रवासी भारतवंशियों की गाथा

भारतवंशी विश्व के अनेक देशों में बसे हैं। उनके पूर्वज जीविकोपार्जन के लिए अलग-अलग समय पर अनेक देशों में गए। अनेक तत्कालीन परिस्थितियों से वशीभूत होकर वहीं बस गए। आज वहां के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन से उनका जीवन जुड़ा हुआ है। जीवन-मूल्य, परंपराएं, धर्म, रीति-रिवाज, लोकगीत, लोककथाएं उनके ...

भारत की विदेश नीति और भारतवंशी
भारत की विदेश नीति और भारतवंशी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की विदेश नीति के सोये हुए समुद्र में नई लहरें पैदा कर दी हैं। अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में सैंतीस देशों की यात्राएं करके उन्होंने साबित कर दिया है कि वे चुपचाप बैठे रहने वाले प्रधानमंत्री नहीं हैं। वे दुनिया भर में भारत की छवि चमकाने में लगे हुए हैं। वे चाहते है ...

नया साल मुबारक हो
नया साल मुबारक हो

काई पन्द्रह साल पहले की घटना है। महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी वि?ाविद्यालय के दिल्ली केंद्र में एक भद्र महिला आर्इं। बताया गया कि वे अमरीका से आई हैं। बैठते ही उन्होंने शिकायत की कि हालाँकि हम अंतरराष्ट्रीय कहते हैं खुद को लेकिन बाहर बसे भारतीयों के लिए कुछ नहीं करते। वे इससे बहुत चिंतित थीं ...

प्रवासी भारतीयों से एक संवाद
प्रवासी भारतीयों से एक संवाद

इसके पहले कि मैं प्रवासी भारतीयों से संवाद स्थापित करने की कोशिश करूँ, मैं अपने बारे में कुछ कह लूँ। इसे एक तरह से अपने "क्रीडेंशल' स्थापित करना भी कह सकते हैं। मैं कुल मिलाकर तकरीबन साढ़े आठ साल संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) में रहा हूँ। इसके अलावा इंग्लैंड के ब्रिास्टल में तीन गर्मियाँ बिताई हैं ...

भारतवंशियों, पीछे नहीं आगे देखो
भारतवंशियों, पीछे नहीं आगे देखो

भारतीय मीडिया में परोसी जा रही सूचनाओं को देखा जाए तो ऐसा प्रतीत होगा मानो दुनिया भर में बसे भारतवंशी और प्रवासी भारतीय अभूतपूर्व आत्मवि?ाास, उत्साह और देशप्रेम से सराबोर हैं। टीवी के परदे पर लहराती, जुनूनी तस्वीरें यही ज़ाहिर करती हैं मानो पहली बार उन्हें अपने देश पर नाज़ हो रहा है और वे उसके लिए ...

खाड़ी के मजदूरों का स्याह पक्ष
खाड़ी के मजदूरों का स्याह पक्ष

अपने देश में यह गहरी मान्यता है कि जो परदेश में रहते हैं वे सर्वथा सम्पन्न होते हैं। अतएव परदेशियों को यहाँ तिलस्मी चश्मे से देखा जाता है। युवा बेहतर जीवन और रोजगार की तलाश में विदेश पलायन करना चाहते हैं। युवतियाँ "परदेश जा के परदेशिया, भूल न जाना पिया ...' जैसे गीत गुनगुनाते हुए परदेशी बालम का स ...

वेश मे पदार्पण करेगा - ललित याज्ञिक
वेश मे पदार्पण करेगा - ललित याज्ञिक

ठीक ही कहा है, भ्रष्टाचार-भ्रष्टाचार चिल्लाने से कुछ नहीं होगा। उसे दूर करने के उपाय ढूंढने में लग जाना चाहिये। लेकिन क्या इस क्षेत्र में तकनीकी कुछ मदद कर सकती है? इतिहास साक्षी है छोटे-मोटे तकनीकी-नवीनीकरण का श्रेय भले व्यापार-विश्लेषण को जाता है पर शत-प्रतिशत नवीनीकरण में सफलता तब मिली है जब ह ...

असाधारण सफलता का सफ़र
असाधारण सफलता का सफ़र

यह कहानी एक ऐसे अप्रवासी भारतीय उद्यमी की है जिसने अपनी पहली कंपनी (उद्यम) "कोरल नेटवक्र्स' सन 1988 में शुरू की और 1990 में दो वर्ष के बाद मात्र 26.95 डालर में बेच दी थी। इस उद्यमी ने बेचने से मिले उस चेक की प्रति को कांच में जड़वाकर अपने पास रखा है, असफलता की इस याद और सफल होने के जुनून के कारण, ...

कारोबार में सिंगापुर तो है सदाबहार
कारोबार में सिंगापुर तो है सदाबहार

विविधता और बहुसांस्कृतिक सुन्दरता सिंगापुर को अपने व्यापार-स्थल के रूप में चुनने के कई कारणों में से एक है। यहाँ के व्यापारिक माहौल और निम्न कर दर की वजह से लोग अपने कारोबार का फैलाव करते यहीं जम जाते हैं। कई भारतीय मूल के व्यापारियों ने न सिर्फ यहाँ की अर्थव्यवस्था में अपना योगदान दिया है बल्कि ...

व्यावसायिक नज़रिये ने तरक्की की राह दिखायी - विष्णु ताम्बी
व्यावसायिक नज़रिये ने तरक्की की राह दिखायी - विष्णु ताम्बी

इंजीनियरिंग के हजारों विद्यार्थियों में कुछेक ऐसे होते हैं जो नया करने के जुनून में चुनौतियों का डटकर मुकाबला करते हैं। विष्णु ताम्बी भी ऐसा ही एक नाम है, जिन्होंने व्यावसायिक सफलता के मुकाम तक पहुँचने के लिये अनेक उतार-चढ़ावों का सामना किया। 1988 में कम्प्यूटर इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर करने के ...

अमेरिका में हिंदी-यूएसए का अभिनव प्रयोग
अमेरिका में हिंदी-यूएसए का अभिनव प्रयोग

अमेरिका में हिंदी यूएसए के जरिये हिंदी के प्रचार- प्रसार से जुड़ने का विचार देवेंद्र सिंह की कल्पना में तक नहीं था। उनका बचपन भारत में बीता। पैंतीस वर्ष पहले जब वे पढ़ने के लिये अमेरिका पहुँचे तो वहाँ के वातावरण में अपने आप को व्यवस्थित करने में कुछ समय लगा। अमेरिका में लोगों की ईमानदारी और कार्य क ...

पूँजी का सम्मान करना होगा - राजीव कौल
पूँजी का सम्मान करना होगा - राजीव कौल

श्रीनगर में पैदा होने वाले राजीव कौल ने अस्सी के दशक में भोपाल के हमीदिया कॉलेज भोपाल से बी.कॉम, एम.कॉम किया और सीए की पढ़ाई की। कुछ समय तक मोदी जेराक्स में काम करने के बाद 1998 में वे सेंटजान यूनिवर्सिटी से फाइनेंस में एमबीए की डिग्री हासिल करने अमेरिका आ गये। वे सीपीए हैं और उन्होंने फाइनेंस, नि ...

आर्थिक तरक्की के लिये व्यापार-मित्र बनना होगा - अजय भट्ट
आर्थिक तरक्की के लिये व्यापार-मित्र बनना होगा - अजय भट्ट

लखनऊ में पैदा हुए अजय भट्ट ने अस्सी के दशक में भोपाल के मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। विदेश व्यापार संस्थान, दिल्ली से एमबीए डिग्री करने के बाद उन्होंने थाईलैंड की कंपनी को ज्वाइन किया। यह कम्पनी एग्रीकल्चर बेस्ड मटेरियल को पुनर्नियोजन के ...

भारत-चीन व्यापार की सुदृढ़ होती डोर
भारत-चीन व्यापार की सुदृढ़ होती डोर

वर्तमान में चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक मित्र है और भारत चीन का दसवां सबसे बड़ा व्यापारिक मित्र हैं। भारत-चीन व्यापारिक सम्बन्धों का इतिहास इन दोनों देशों के बीच के सांस्कृतिक संबंधों जितना ही पुराना है। प्राचीन काल का मशहूर रेशम मार्ग यह व्यापारिक मार्ग ही था। रेशम का एक अन्य नाम चीनांशुक भी ह ...

उत्तर प्रदेश प्रवासी भारतीय दिवस यादगार होगा - अखिलेश यादव
उत्तर प्रदेश प्रवासी भारतीय दिवस यादगार होगा - अखिलेश यादव

प्रश्न : आगरा में 4 से 6 जनवरी 2016 को पहला "उत्तर प्रदेश प्रवासी भारतीय दिवस' मनाया जा रहा है। इसकी आवश्यकता पर प्रकाश डालेंगे। उत्तर : पिछली सरकार के ठीक उलट वर्तमान सरकार अपने गठन के बाद से ही प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार काम कर रही है और फैसले ले रही है। इन कार्यों और फैसलों की प्र ...

स्वीडन में भारतीय समाज
स्वीडन में भारतीय समाज

भारतीय और भारतवंश का समाज यूरोप में ब्रााडफोर्ड जैसी जगहों को छोड़कर बिलकुल अल्पसंख्यक है लेकिन भारतीय संस्कृति की पहचान बढ़ती जा रही है और इसके साथ भारत एक प्रमुख आर्थिक खिलाड़ी बन गया है। यूरोप में भारतीय माइग्रेशन द्वितीय महायुद्ध से पहले इंडियन इंडिपेंडेंस और इसके बाद लगातार लहरों में हुआ करता थ ...

यूरोप में प्रवासी भारतीय समाज
यूरोप में प्रवासी भारतीय समाज

आज यूरोप के कई देशों के महानगरों में विभिन्न देशों से लोग आकर बसे हैं। औद्योगिक क्रांति के पश्चात बीसवीं पूर्वार्ध तक लंदन, पेरिस, बर्लिन जैसे महानगर दूर-दूर के लोगों को अपनी और खींचने लगे थे, पर जैसा हाल 1940 के दशक के दौरान द्वितीय वि?ायुद्ध की समाप्ति के बाद बदला, उसने सारे वि?ा के जनसांख्यिकी ...

जापान में प्रवासी भारतीय
जापान में प्रवासी भारतीय

दिसंबर 2014 के आंकड़े के अनुसार जापान में 24 हजार 524 प्रवासी भारतीय रहते हैं। 2005 में जापान में प्रवासी विदेशियों की संख्या जापान की जनसंख्या का 1.6 प्र.श. था। उसमें भारतीयों की संख्या 16 हजार 988 थी। यह जापान में प्रवासी विदेशियों का मात्र 0.8 प्र.श. था। लेकिन 1990 से 2005 के बीच जापान में प्रव ...

ऑस्ट्रेलियाई भारतीयवंशियों के सरोकार
ऑस्ट्रेलियाई भारतीयवंशियों के सरोकार

इस साल मैंने कई समारोहों में भाग लिया, जिनमें मैंने अनुभव किया कि ऑस्ट्रेलिया में प्रवासी भारतीय समाज अब प्रगति की राह पर है। हाल ही में, 23 नवंबर को, ऑस्ट्रेलिया के संसद भवन में दीपावली के समरोह बड़े धूमधाम से मनाया गया। सभा को संबोधित करते हुए भारतीय उच्च आयुक्त श्री नवदीप सुरी ने कहा कि यहाँ भा ...

प्राचीनतम भाषा और नवीनतम प्रौद्योगिकी
प्राचीनतम भाषा और नवीनतम प्रौद्योगिकी

आस्ट्रेलिया में संस्कृत का अध्ययन पुराने साँचे को तोड़ देता है। ऑस्ट्रेलियन नेशनल युनिवर्सिटी के सह-प्राध्यापक मैकॉमास अपने पुरस्कृत संस्कृत प्रोग्राम के बारे में अपने अनुभव को इस तरह कहते हैं, वि?ा की प्राचीनतम भाषाओं में में से एक का वि?ा की नवीनतम प्रौद्योगिकी के जरिए अध्यापन करना अनोखी बात है। ...

जन्मभूमि और कर्मभूमि का झूला
जन्मभूमि और कर्मभूमि का झूला

आस्ट्रेलिया में भारतीय मूल समूह बहुत ही मिश्रित है, जो विभिन्न व्यवसायों, विभिन्न संस्कृतियों और विभिन्न राज्यों से डॉक्टरों और इंजीनियरों से लेकर रसोइये जैसे व्यक्तियों के शामिल लोगों से बना है। यह मुख्य रूप से निर्भर करता है कि ऑस्ट्रेलिया की व्यवसायों की पसंदीदा माइग्रेशन सूची में कौन से व्यवस ...

भारतीय बुज़ुर्ग जाएँ तो जाएँ कहाँ?
भारतीय बुज़ुर्ग जाएँ तो जाएँ कहाँ?

आस्ट्रेलिया में प्रवासी भारतीयों का इतिहास दशकों पुराना है। भारतीय मूल के जो बुज़ुर्ग चार-पाँच दशक पहले आए वे सुस्थापित होकर सम्पन्न हो चुके हैं। हालांकि स्थानीय जीवन-शैली अपनाते हुए वे अपने बहू-बेटियों और नाते-पोतियों से अलग होकर एकाकी जीवन बिताते रहे हैं लेकिन कुल मिलाकर उन्हें ज़िंदगी से कोई शिक ...

रूस में प्रवासी भारतीय समाज
रूस में प्रवासी भारतीय समाज

भारत वि?ा का दूसरा सबसे बड़ा डायस्पोरा है। पचास देशों से अधिक में रह रहे प्रवासी भारतीयों की जनसंख्या करीब दो करोड़ है। रूस के सांख्यिकी विभाग गरोसस्तात'त के अनुसार रूस में बीस हज़ार से अधिक भारतीय रहते हैं। जो रूस में अपने वातावरण और संस्कृति से कटे होने तथा अपनी विरासत और रूसी सभ्यता से तालमेल, रह ...

अमेरिका में प्रवासी भारतीय
अमेरिका में प्रवासी भारतीय

जेसे मानवेतर जीव भोजन, पानी और सुरक्षा के लिए समस्त सृष्टि में इधर-उधर भ्रमण करते रहते हैं वैसे ही मनुष्य के यत्र-तत्र भरण और प्रवासन का इतिहास भी रहा है। बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए उत्तर-पूर्व भारत के तथा व्यापार के लिए दक्षिण के चेट्टियार व्यापारियों के सुदूर दक्षिण-पूर्व में आवागमन का ...

न्यूयार्क में भारतवंशी
न्यूयार्क में भारतवंशी

न्यूयार्क में भारतीयों की संख्या लगभग सात लाख है। भारतीय यहां चीनियों के बाद दूसरे एशियन- अमेरिकन के रूप में रहते हैं। आप यहां भारतीयों को बड़ी आसानी से सबवे ट्रेन में आते-जाते, दुकानों में, बाजारों में पहचान सकते हैं, हां कभी-कभी पूछने पर पता चलता है कि वह भारतीय नहीं बंग्लादेशी या पाकिस्तानी हैं ...

शिकागो में हिंदुस्तानी
 शिकागो में हिंदुस्तानी

हम लोग यहाँ नए नहीं हैं। हमारे बहुत पहले से यहाँ लोग है। किसी से छुपी नहीं हैं स्वामी विवेकानंद के बहुत पहले से यहाँ आने की आदर्श कहानियाँ! शिकागो में आयोजित हुए वि?ा धर्म महासभा के बारे में भी सभी जानते हैं, जिसमें भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व स्वामी विवेकानंद ने किया था। आज आधुनिक अ ...

कैलिफ़ोर्निया में छज्जू का चौबारा
कैलिफ़ोर्निया में छज्जू का चौबारा

सारी दुनिया देखी हमने
देखा बल्ख़ बुख़ारे में
पर वह बात नहीं पाई
जो छज्जू के चौबारे में।
कैलिफ़ोर्निया के कूपरटीनो नगर में प्रतिष्ठित छज्जू का चौबारा इस उक्ति को सार्थक करता है। ये बुज़ुर्गों का चमन है, जहाँ सभी को मिलता है अपनापन। स्वदेश से दूर, विदेश की भूमि पर इसकी स्थापना वरिष् ...

डंडीनोग : ऑस्ट्रेलिया में लिटिल इंडिया
डंडीनोग : ऑस्ट्रेलिया में लिटिल इंडिया

आस्ट्रेलिया का डंडीनोग इलाका "लिटिल इंडिया' कहलाता है। यहाँ भारतीयों की बहुलता के कारण भारतीय वस्तुएं, खान-पान, मसाले, कपड़े, ज्वेलरी आदि की 200 से ज्यादा दुकानें आपको भारतवर्ष में होने का एहसास कराती हैं।
पार्?ा में बजते बॉलीवुड गाने, मसालों की पारम्परिक सुगंध, खाने-पीने की चीजों से महकता वा ...

तलाश एक भूमि की
तलाश एक भूमि की

मंगरू आज ठीक समय पर आजा के पास आकर बैठ गया। आज उसके साथ उस का दोस्त सरजू भी आया था। मंगरू ने कहा - आजा, कल आपने फत्तेल रोज़ाक के आने की कहानी सुनायी, बहुत दर्द भरी कहानी थी। रोचक तो थी ही। आप ने कहा था कि इन लोगों को बताया गया था कि यहाँ आप को सोना बिखरा मिलेगा। क्या जब फत्तेल रोज़ाक यहाँ पहुंचा वा ...

विलायती मामा
विलायती मामा

1.
उन दिनों "प्रवासी' शब्द इस्तेमाल नहीं होता था। शायद इसीलिए इंग्लैंड में रह रहे अपने मामा को हम विलायत गया बताये थे। वे इंग्लैंड में रहकर दूर अवश्य रह रहे थे पर प्रवासी नहीं थे। उनके दूर होने का दु:ख हमारे नाना-नानी की बूढ़ी आँखों की गहरायी में कभी-कभी हमें भी बिजली की कौंध-सा दीख जाता था प ...

ब्रादर शैनॉन मूल बांग्ला से अनुवाद गंगानन्द झा
ब्रादर शैनॉन मूल बांग्ला से अनुवाद गंगानन्द झा

आज के हायर सेकण्डरी को हमारे समय में प्रि-    युनिवर्सिटी कहा जाता था। प्रि-युनिवर्सिटी के दो साल मैं शिलांग शहर के प्रसिद्ध शिक्षण प्रतिष्ठान सेंट एडमण्ड्स कॉलेज का छात्र था। तब एडमण्ड्स कॉलेज के पिं्रसिपल थे ब्रादर शैनॉन। विशालकाय और गंजे, बलिष्ठ और तने हुए। पादरी की सफेद कैसक और ...

पांच पत्र मैथिली से अनुवाद जगदीश चन्द्र ठाकुर
पांच पत्र मैथिली से अनुवाद जगदीश चन्द्र ठाकुर

(1)
दरभंगा, 1-1-19
प्रियतमे!
तुम्हारी लिखी चार पंक्तियाँ मैंने चार सौ बार पढ़ी, फिर भी मन नही भरा। आचार्य की परीक्षा सर पर है, मगर किताब पढ़ने में जरा भी मन नही लगता। हमेशा तुम्हारी ही मोहिनी मूरत आंखों के सामने नाचती रहती है।
मेरी राधा रानी, मन करता है कि तुम्हारा गाँव वृन्दाव ...

अंतिम व्यक्ति को वै·िाक करने का स्वप्न
अंतिम व्यक्ति को वै·िाक करने का स्वप्न

वर्ष दो हजार पंद्रह की दूसरी छमाही का आरम्भ भारत के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। इस समय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने "डिजिटल इंडिया' योजना का उद्घाटन किया, जिसमें द इंटरनेट से शासन में सुधार की शक्ति, रोजगार सृजन और नई-नई सम्भावनाओं का सृजन कर भारत के वंचितों और सुविधा सम्पन्न लोगों के बीच की ...

ब्राहृर्षि वशिष्ठ
ब्राहृर्षि वशिष्ठ

ब्रहृर्षि, वैदिक महाकाव्यों के अनुसार ऋषियों की श्रेणी में सबसे ऊँचा पद है, और इस पद पर साथी ऋषि उसको शोभित करते थे, जिसने जीवन में सबसे ज्यादा ज्ञान प्राप्त कर लिया हो। इस पद के लिये कोई विधिवत प्रतिस्पर्धा नहीं होती थी, यह तो किसी के ज्ञान और सृजनात्मक कार्य के आधार पर ही निश्चित किया जाता था। ...

कुछ रूमानी हो जाएँ
कुछ रूमानी हो जाएँ

लफ़्फ़ाज़ी और तक़रीर बहुत हो गयी, आज मन है कि कुछ क़िस्सागोई हो। यानि आज हम अफ़साना-        निगार होना चाहते हैं। ऐसा है साहिबान, भाषण, प्रवचन, तक़रीर, लेक्चर वगैहरा कोई नहीं सुनता। सभा में बैठे लोग भी मुंडी हिलाते रहते हैं, ध्यान कहीं और होता है या फिर खुली आँखों से सोते र ...

तहां जाइ देखी बन सोभा। गुंजत चंचरीक मधु लोभा। नाना तरू फल फूल सुहाए। खग मृग बृंद देखि मन भाए। सैल बिसाल देखि एक आगें। ता पर धाइ चढ़ेउ भय त्यागें।
तहां जाइ देखी बन सोभा। गुंजत चंचरीक मधु लोभा। नाना तरू फल फूल सुहाए। खग मृग बृंद देखि मन भाए। सैल बिसाल देखि एक आगें। ता पर धाइ चढ़ेउ भय त्यागें।

हनुमान प्रकृति के पुत्र हैं। अब वह क्षण आता है जब प्रकृति की सुषमा के एक दूसरे आयाम से साक्षात्कृत होने का मौका उन्हें मिलता है। समुद्र से धरती पर आने का आनंद। बायरन के शब्दों में कहूं कि च्र्ण्ड्ढद्धड्ढ त्द्म ठ्ठ द्धठ्ठद्रद्यद्वद्धड्ढ दृद द्यण्ड्ढ थ्दृदड्ढथ्न्र् द्मण्दृद्धड्ढ.  समुद्रतट के ...

त्रिशंकू
त्रिशंकू

ना इधर के रहे
ना उधर के रहे
बीच अधर अटके रहे
ना इंडिया को भूला सके
ना अमेरिका को अपना सके
इंडियन-अमेरिकन बनके काम चलाते रहे

ना हिंदी को छोड़ सके
ना अंग्रेजी को पकड़ सके
देसी एक्सेंट में गोरों को कन्फ़ुस करते रहे
ना टर्की पका सके
ना ग्रेवी बना ...

ख़ुशी गम से अलग रहकर मुकम्मल हो नहीं सकती
ख़ुशी गम से अलग रहकर मुकम्मल हो नहीं सकती

जनाब अकील नोमानी साहब की किताब "रहगुज़र' पढ़कर खुद के उर्दू शायरी के जानकार होने की ग़लतफहमी दूर हो गयी। साठ-सत्तर शायरी की किताबें पढ़ लेने के बाद मुझे लगने लगा था कि मैंने उर्दू-हिंदी के बेहतरीन समकालीन शायरों को पढ़ लिया है और अब अधिक कुछ पढ़ने को बचा नहीं है।
सच कहूँ तो अकील साहब के बारे में अ ...

नव वर्ष का अभिनन्दन
नव वर्ष का अभिनन्दन

न्यता है कि रोमन देवता जेनस के दो चेहरे हैं। एक से वह आगे और दूसरे से पीछे देखता है। साल के पहले महीने का नाम जनवरी इसी रोमन देवता के सम्मान में रखा गया। एक से वह बीते हुए वर्ष को देखता है और दूसरे से अगले वर्ष को। बीते साल की संवेदना, स्मृति और सिलसिले के वाहक होने के साथ आगे के पथ की सम्भावनाओं ...

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