ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
चुनौतियों को चीरता भारत विनिर्माण केन्द्र
चुनौतियों को चीरता भारत विनिर्माण केन्द्र

कृषि, औद्योगिक, सूचना और ज्ञान क्रांतियों ने विश्व के कई देशों की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन को बेहतर बनाया। स्वतंत्र देश सजग थे, शिक्षा को बढ़ावा दिया और नवाचार को प्रोत्साहन। औद्योगिक क्रांति ने देशों को विकसित, विकासशील और अविकसित देशों में बांट दिया। औद्योगिक क्रांति ने 18वीं सदी के उत्तरार् ...

मेक इन इंडिया में स्वदेशी भागीदारी भी हो
मेक इन इंडिया में स्वदेशी भागीदारी भी हो

निति आयोग अध्यक्ष अरविन्द पानगड़िया ने 20 दिसंबर 2015 के इंडियन एक्सप्रेस में कहा कि भारत एक मार्केट इकानॉमी है अर्थात यह खरीद-बिक्री की बाजार व्यवस्था पर निर्भर अर्थव्यवस्था है। अब यदि यहां बाजार व्यवस्था पर टिकी अर्थव्यवस्था का मॉडल लागू होता जा रहा है तो बाजार की ताकतें ही इसको नियंत्रित करेंगी ...

पारम्परिक ज्ञान भी मेक इन इंडिया है
पारम्परिक ज्ञान भी मेक इन इंडिया है

भारत उन विरले देशों में है जहां के नागरिक अपने पारम्परिक विवेक और ज्ञान से लगभग अलग हो चुके हैं। इसे इस तरह भी कह सकते हैं कि भारत एक ऐसी सभ्यता है जहां आत्म विस्मृत नागरिकों का वास है। इसका एक बड़ा कारण भारत का करीब सौ से अधिक वर्षों का उपनिवेशीकरण है। अंग्रेजों ने भारत को उपनिवेश बनाने के बाद उस ...

मेक इन इंडिया के मायने
मेक इन इंडिया के मायने

भारत भले ही उन्नति के कितने ही ऊंचे शिखर पर स्थापित हो जाए परंतु उसको अपनी पहचान आर्थिक रूप से संपन्न एवं स्वनिर्मित उत्पादनों में सक्षम की बनानी होगी। भारत को आर्थिक वै?िाक सक्षम बनाने की एक उत्कृष्ट पहल के रूप "मेक इन इंडिया' अभियान प्रारंभ हुआ। इसके अनुसार भारत का आर्थिक विकास तभी संभव है जब ह ...

मेक इन इंडिया की मुश्किलें
मेक इन इंडिया की मुश्किलें

आज की तारीख़ में राजनैतिक गलियारों से लेकर महानगरों, छोटे शहरों, कस्बों यहां तक कि गाँवों तक में "मेक इन इंडिया' जुमले को सुना जा सकता है। यह परियोजना यदि अपने पूर्ण स्वत्र्द्यण् में साकार होती है तो भारत को पुनः सोने की चिड़िया वाले युग की ओर प्रशस्त किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 ...

निवेशक मित्र और विकास में सहभागी हैं
निवेशक  मित्र और विकास में सहभागी हैं

प्रश्न - मध्यप्रदेश में प्रवासी भारतीयों की पूंजी निवेश की आपकी महत्वाकांक्षी योजना में सिंगापुर यात्रा की उपलब्धि के बारे में क्या कहेंगे।
उत्तर - देखिये मैं सिंगापुर सरकार के नियंत्रण पर गया था। मध्यप्रदेश ने सिंचाई, कृषि, महिला सशक्तिकरण समावेशी विकास के क्षेत्र में जो उल्लेखनीय उपलब्धिया ...

मॉल-संस्कृति को देखने भारत नहीं आऊँगी
मॉल-संस्कृति को देखने  भारत नहीं आऊँगी

डॉ योको तावादा जयपुर साहित्य सम्मेलन में भाग  लेने ले लिए भारत आर्इं। वे उस सम्मलेन में भाग लेने वाला पहली जापानी साहित्यकार हैं। आपका जन्म जापान के तोक्यो में हुआ और वे 1982 से जर्मनी में रहती हैं। डॉ. तावादा जापानी और जर्मन दोनों भाषाओं में साहित्य लेखन करने वाली दुर्लभ लेखिका हैं। आपकी उत ...

गणतंत्र एक मत है
गणतंत्र एक मत है

भारत 1947 में स्वाधीन हुआ। साफ और समुचित तरीके से देश का शासन संचालित करने की अपेक्षा यह आसान रहा है। यह दायित्व अधिक कठिन प्रतीत होता है। इसके लिए निःस्वार्थ नेतृत्व के साथ ईमानदार और सुयोग्य सिविल सेवा, अनुशासित सेना तथा पुलिस बल की जरूरत होती है। हमें विशेषज्ञ ओद्यौगिक प्रबन्धकों, हुनरमंद मजदू ...

जीवनशैली प्रबंधन
जीवनशैली प्रबंधन

सही जीवन शैली का तात्पर्य सुरक्षित, सुचारू, सहूलियतदायी, सरल, स्वस्थ और सुखी जीवन जीने के तरीके से है। बदलते सामाजिक - आर्थिक माहौल के कारण, कुछ लोग ऐसी आदतों को अपना लेते हैं जिससे उनका जीवन बर्बादी की ओर अग्रसर हो जाता है। बाद में इस तरह के गलत तरीके की परिणति जीवन शैली जनित रोगों में तब्दील हो ...

ओस की बूंद
ओस की बूंद

आँसू नभ के
रात के सन्नाटे में
भू पे चमके ।
नभ का प्यार
करे ओस बूंदों से
भू का श्रृंगार ।
निखर गए
पा कर ओस संग
प्रकृति रंग।
भू आल्हादित
मिला ओस का साथ
शीत जो आई।
रवि का ताप
करे ओस को भाप
एक पल में।...

ग़ज़ल कल्पना रामानी
ग़ज़ल कल्पना रामानी

एक

 

मुझको तो गुज़रा ज़माना चाहिए
फिर वही बचपन सुहाना चाहिए
जिस जगह उनसे मिली पहली दफा
उस गली का वो मुहाना चाहिए
तैरती हों दुम हिलातीं मछलियाँ
वो पुनः पोखर पुराना चाहिए
चुभ रही आबोहवा शहरी बहुत
गाँव में इक आशियाना चाहिए
भीड़ कोलाहल भरा ...

ख़ूबसूरत स्विट्ज़रलैंड की यादें
ख़ूबसूरत स्विट्ज़रलैंड की यादें

    काफी समय से मेरे व मेरे परिवार का यूरोप घूमने का मन था। पिछले वर्ष जनवरी-        फ़रवरी में "कंडक्टेड टूर' की तरफ से आकर्षक पैकेज निकले तो हम तीनों- मेरे पति, मैं व हमारा बेटा की बुकिंग हो गयी। जिन देशों में हम घूमने वाले थे, वो थे - फ्रांस, बेल्जिय ...

अपनी बात दार्जिलिंग
अपनी बात दार्जिलिंग

कवि दार्जिलिंग के होटल ठहरा था। सुबह सोकर उठा खिड़की खोली, तो भौंचक रह गया। हिमाच्छादित कंचनजंगा पर सुनहली धूप की पृष्ठभूमि में रंग-बिरंगे फूलों का मेला। निहारता ही रह गया कवि। फिर उसका मन मान से भर गया। मेरी भागीदारी एवम् उपस्थिति के बग़ैर प्रकृति ने इतना सुन्दर आयोजन सजा लिया!
राजशेखर को पहल ...

अब फिर एक नवजागरण हा
अब फिर एक नवजागरण हा

उन्नीसवीं शताब्दी के आरम्भ से भारत के नवशिक्षित बौद्धिकों में एक नई चेतना का उदय हुआ जिसके अग्रदूत राजा राममोहन राय माने जाते हैं। इस चेतना को यूरोप के रिनेसाँस के वजन पर अपने देश में ही पुनर्जागरण और कहीं नवजागरण कहा जाता है। चेतना की यह लहर देर-सबेर कमोबेश भारत के सभी प्रदेशों में फैली। किन्तु ...

ए बी सी डी या त्रिशंकु
ए बी सी डी या त्रिशंकु

    जीहाँ एबीसीडी सीखते ही हर भारतवासी अपने आप को "गोरा साहब' समझने लगता है। गलत-    सलत अंग्रेज़ी में गिट-पिट करते ही उसमें एक सुपीरियर कॉम्पलेक्स जन्म ले लेता है और उसकी नज़रें हिंदी तथा अन्य वर्नाकुलर भाषा- भाषियों (जिन्हें अंग्रेज़ी नहीं आती) को कुछ ऐसे देखने लगती ह ...

उमा न कछु कपि के अधिकाई। प्रभु प्रताप जो कालहि खाई। गिरि पर चढ़ि लंका तेहिं देखी। कहि न जाइ अति दुर्ग विसेषी। अति उतंग जलनिधि चहु पासा। कनक कोट कर परम प्रकासा।
उमा न कछु कपि के अधिकाई। प्रभु प्रताप जो कालहि खाई। गिरि पर चढ़ि लंका तेहिं देखी। कहि न जाइ अति दुर्ग विसेषी। अति उतंग जलनिधि चहु पासा। कनक कोट कर परम प्रकासा।

तुलसी की आधुनिकता कथा के इन छोटे छोटे ट्रीटमेंट तक में देखी जा सकती है। इसके पहले के अध्याय में हमने इस बात को रेखांकित किया था कि तुलसी के यहां प्रसंग प्रातिनिधिक (Representational) हो जाते हैं। वे इतिहास नहीं, कविता लिख रहे हैं लेकिन आधुनिक कविता। वे जब "सैल बिसाल देखि एक आगें' कहते हैं तो उसे ...

एक नई भोर
एक नई भोर

तूम पुरुष हो ना
क्यों न हो तुममें दम्भ
तुम पैदा ही ताकतवर हुए
तुम्हारा बनाया समाज
ख़ूब पोसता है तुम्हारे दम्भ को
सिखाता है तुम्हें
कि तमाम कमियों
तमाम ख़ामियों के बावज़ूद
तुम्हीं हो मुखिया
घर-संसार के मालिक
रखना ही होगा तुम्हें अंकुश
कि स्त्रिय ...

अच्छे दिनों की आस में दीवारो-दर हैं चुप
अच्छे दिनों की आस में दीवारो-दर हैं चुप

ऐसे अशआर पढ़कर अचानक मुंह से कोई बोल नहीं फूटते। ऐसे कुंदन से अशआर यूँही कागज़ पर नहीं उतरते, इसके लिए शायर को उम्र भर सोने की तरह तपना पड़ता है। इस तपे हुए सोने जैसे शायर का नाम है- निश्तर खानकाही। उनकी किताब "मेरे लहू की आग' से हिंदी के पाठक बहुत अधिक परिचित न होंगे, क्यूँ की निश्तर साहब उन शायरों ...

जनवरी का साहित्य
जनवरी का साहित्य

पहली जनवरी। नये वर्ष के स्वागत का दिन, पूरे विश्व में उत्सव का दिन। लगता है संसार एक हो गया। पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, सबों का भेद ख़त्म हो गया। संघर्षों में युद्ध विराम आ गया, दुश्मन भी आपस में मिठाई बाँट रहे हैं। फायरवर्क की गगनचुम्बी बहुरंगी लपटों से रात का गहरा अन्धकार दूर हो रहा है, मानो म ...

एक-वचन और बहु-वचन के द्वन्द्व
एक-वचन और बहु-वचन के द्वन्द्व

जब भी "संस्कृति' शब्द बहस में आता है, भारत का समूचा बौध्दिक जगत और दलीय राजनीति ग़फलत के गर्क में पड़ जाती है। क्योंकि, सबसे पहले तो उनके सामने इसकी "परिभाषा' का ही प्रश्न आकर खड़ा हो जाता है और वह हरेक से अपने लिए एक वाजिब उत्तर की मांग करने लगता है कि क्या किसी राष्ट्र की कोई निश्चित "संस्कृति' हो ...

बंदूक की संस्कृति
बंदूक की संस्कृति

अमरीका के राष्ट्रपति ओबामा अमरीका में जब-तब अकारण होने वाले हादसों के सन्दर्भ में बंदूक-संस्कृति को अनुशासित करने के बारे में जब बोल रहे थे तो उनके आँसू छलक पड़े। जिसे प्याज से लाए नकली आँसू भी कहा गया क्योंकि कहीं की भी राजनीति में न नीति है और न ही राज, हाँ बहुत से घिनौने राज़ ज़रूर छिपे हैं। इस स ...

चिकित्सा सेवा की स्वयंसेवी राह
चिकित्सा सेवा की स्वयंसेवी राह

भारतीय चिकित्सकों ने विश्व को जो दिया उसके बारे जितनी भी बात करें कम है। पूरी दुनिया में भारतीय चिकित्सक अपना उल्लेखनीय स्थान बना चुके हैं। आज अनगिनत भारतीय चिकित्सक पूरी दुनिया में लोगों की सेवा कर रहे हैं। शिकागो में चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में एक आर्गेनाइजेशन सालों से काम कर रहा है। जिसका नाम ...

विश्व हिन्दी दिवस का आयोजन सम्पन्न
विश्व हिन्दी दिवस का आयोजन सम्पन्न

बैंक ऑफ बड़ौदा, न्यूयार्क द्वारा अपने परिसर में विगत 20 जनवरी को "वि?ा हिन्दी दिवस' का आयोजन किया गया। न्यूयार्क में भारत के डिप्टी कौंसुल जनरल डॉ. मनोज कुमार मोहपात्रा समारोह के मुख्य अतिथि थे। कार्यक्रम में न्यूयार्क, न्यूजर्सी एवं पेनसिलवेनिया से हिन्दी के प्रतिष्ठित विद्वानों डॉ. सुरेंद्र गंभी ...

म.प्र. के मुख्यमंत्री की गौरवपूर्ण उपलब्धि
म.प्र. के मुख्यमंत्री की गौरवपूर्ण उपलब्धि

किसी भी भारतीय के लिए यह गर्व की बात होगी कि उसके देश के एक मुख्यमंत्री को अच्छी सरकार, विकास और उपलब्धियों के लिए सिंगापुर की तरफ से "ली क्वान यूू फेलोशिप' प्रदान की जाये। यह सौभाग्य मिला है मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को। यह फेलोशिप चौथे भारतीय को मिली है और पूरी दुनिया में ...

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