ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
कविता (9)
कहाँ है चाँद की वह चाँदनी?
01-Dec-2016 12:00 AM 1487 कहाँ है चाँद की वह चाँदनी?

कहाँ है चाँद की वह चाँदनी
शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा की
रजतमय वह रोशनी?
प्रश्नकर्ता मैं नहीं
वह है पक्षियों की मंडली
भूख प्यास को त्यागकर
भ्रमण करते दूर तक
आँखे


डॉ. कौशल किशोर श्रीवास्तव Author : डॉ. कौशल किशोर श्रीवास्तव, India
बदली दिया याद घुटन
01-Dec-2016 12:00 AM 1508 बदली दिया याद घुटन

बदली

आज बदली है
मेरी यादों से बचना
काई है
उन राहों की फिसलन से बचना
पगडण्डी सूखेगी तभी
जब लम्बी धूप होगी
इन्तज़ार करना।
अहसास
न छूना
न पास आना


ललित मोहन जोशी Author : ललित मोहन जोशी ,
प्रकृति अनंत
01-Dec-2016 12:00 AM 1521 प्रकृति अनंत

प्रकृति

एक आम, मामूली-सी पहाड़ी-सी लड़की
सीढ़ीनुमा खेतों में  बेफ़िक्र घूमती-सी लड़की
देखकर जल जाए कोई ख़ुशगवार-सी लड़की,
पर कुछ ख़ास नहीं, क्यों? आकर्षक-सी लड़क


प्रेरणा मित्तल Author : प्रेरणा मित्तल,
युद्ध की कालिख
01-Dec-2016 12:00 AM 1516 युद्ध की कालिख

भूरी धरती के स्याह माथे पर
तुमने देखी है युद्ध की कालिख?
खून, बारूद में सने बच्चे!
अपने हाथों में माँ का हाथ लिए
एक आवाक बेजुबां बच्ची!
तुमने देखा है अपने लालच को
बम ध


शार्दुला झा नोगजा Author : शार्दुला झा नोगजा, Singapore
बंधन में स्पंदन
01-Dec-2016 12:00 AM 1502 बंधन में स्पंदन

तुझे क्या हुआ?
तू तो ठीक है, मस्त है
पका पेड़ है, फिर भी स्वस्थ है
मेरा क्या?
माँ मेरा क्या....

कर्तव्यों की सूली पर चढ़ा हूँ
अधिकारों की बाढ़ में फंसा हूँ


चित्रा गुप्ता Author : चित्रा गुप्ता, Singapore
माँ का सिंगार
01-Dec-2016 12:00 AM 1512 माँ का सिंगार

निज भाषा के प्रचार
और प्रसार के लिए
हर प्रयास तुम करो
हाँ ये आस तुम करो
विकास तुम करो।

माँ भारती की गोद में लेखनी स्वतंत्र है
है बोलने का हक़ भी विचार भी स्व


अंजली त्रिपाठी Author : अंजली त्रिपाठी , Singapore
इबारत देवदास
01-Dec-2016 12:00 AM 1501 इबारत देवदास

इबारत

ज़िन्दगी से शिकायत अक्सर तो कभी बाद मुद्दत करते हैं,
उस मुलाकात के बाद अब हम  रंगों से मुहब्बत करते हैं
हम चंद हर्फ़ लिखते हैं जज़्बात से  हमे शायर न समझो
वो


राहुल पारीक Author : राहुल पारीक, Singapore
गीत लिखूं मैं ऐसा मेघा ऐसे बरसो तुम
01-Dec-2016 12:00 AM 1500 गीत लिखूं मैं ऐसा मेघा ऐसे बरसो तुम

इक गीत लिखूँ मैं ऐसा कल-कल झरने जैसा।
दिल में सोयी आग जला दे
परिवर्तन का बिगुल बजा दे
निज हाथों किस्मत लिखने का
मन में दृढ़ संकल्प जगा दे
पावन गीता के जैसा, मीरा भक्ति के जै


आलोक मिश्रा Author : आलोक मिश्रा, Singapore
एक दो
01-Dec-2016 12:00 AM 1526 एक दो

एक

कई साल पहले किसी ने उसके हाथ में
कुछ कागज़ पकड़ाए थे
जो आज पीले से बीमार पड़े हैं
उसकी ज़ेब में

एक पीला बीमार-सा वातावरण घेरे है
ग्यारह मंज़िल की इस इमा


आशीष बिहानी Author : आशीष बिहानी, INDIA
रंगमंच-स्मृति (4)
हिंदी रंगमंच
01-Dec-2016 12:00 AM 1365 हिंदी रंगमंच

पहली बार सुनने पर यूँ तो हिन्दी रंगमंच, यह प्रयोग ही ठीक नहीं प्रतीत होता, क्योंकि भाषा का सम्बन्ध नाटक के साथ हो सकता है, रंगमंच के साथ नहीं। परन्तु नाटक जनजीवन की सांस्कृतिक मान्यताओं के अतिरिक्त


मोहन राकेश Author : मोहन राकेश, INDIA
हिंदी रंगमंच परिवर्तन और प्रयोगधर्मिता
01-Dec-2016 12:00 AM 1338 हिंदी रंगमंच परिवर्तन और प्रयोगधर्मिता

हिन्दी रंगमंच-नाटक का जो रूप स्वरूप, विधान आज हमारे सामने है, वह समय-समय पर हुये परिवर्तन और प्रयोगधर्मिता का ही परिणाम है। रंगमंच के नाटक ने नये आयाम स्थापित कर नये धरातलों को छुआ है, इसमें दो राय


मदन शर्मा Author : मदन शर्मा, INDIA
हिंदी नाटक कहाँ गया
01-Dec-2016 12:00 AM 1290 हिंदी नाटक कहाँ गया

अक्सर इस बात का रोना रोया जाता है कि हिंदी में अच्छे नाटक नहीं हैं। लेकिन इस बात पर कभी विचार नहीं किया जाता कि हिंदी में अच्छे नाटक क्यों नहीं हैं? क्या हिंदी के लेखक प्रतिभाशून्य हैं? क्या वे आधु


स्वयं प्रकाश Author : स्वयं प्रकाश, INDIA
सूत्रधार की रंगछवियाँ
01-Dec-2016 12:00 AM 1290 सूत्रधार की रंगछवियाँ

हमारी रंगपरंपरा में सूत्रधार को अपने नाम के अनुरूप महत्व प्राप्त है। भारतीय समाज में संसार को रंगमंच, जीवन को नाट्य, मनुष्य या जीव को अभिनेता और ईश्वर को सूत्रधार कहा जाता है। यह माना जाता है कि ईश


हृषीकेश सुलभ Author : हृषीकेश सुलभ, INDIA
रपट (2)
अहमदाबाद इंटरनेशनल लिट्रेचर फेस्टिवल सम्पन्न
01-Dec-2016 12:00 AM 1331 अहमदाबाद इंटरनेशनल लिट्रेचर फेस्टिवल सम्पन्न

विगत 12-13 नवम्बर को अहमदाबाद इंटरनेशनल लिट्रेचर फेस्टिवल का आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। उद्घाटन कार्यक्रम में सुविख्यात गुजराती साहित्यकार रघुवीर चौधरी, संगीत नाट्य अकादमी के चेयरमेन योगेश गढ़वी


डॉ. अवनीश सिंह चौहान Author : डॉ. अवनीश सिंह चौहान, INDIA
आधुनिक विमर्श के बहुआयामी सन्दर्भ
01-Dec-2016 12:00 AM 1322 आधुनिक विमर्श के बहुआयामी सन्दर्भ

लखनऊ एक्सप्रेशन द्वारा 18, 19 तथा 20 नवम्बर को लखनऊ शहर में आयोजित लिटरेचर फैस्टिवल साहित्यिक संपदाओं, विभूतियों के समागम का मेला था। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हिन्दी-उर्दू, अंग्रेजी जुबां के साह


डॉ. मधु चतुर्वेदी Author : डॉ. मधु चतुर्वेदी , INDIA
कहानी (1)
शिन नियेन (नव वर्ष)
01-Dec-2016 12:00 AM 1500 शिन नियेन (नव वर्ष)

पिंग पिंग जैसे ही अपने घर में घुसी अचानक ही दरवाज़े पर ही ठिठक गयी। यह क्या ऐसा सूना-सूना घर काटने को आ रहा था। जिस तीन बेडरूम वाले घर में सात लड़कियां रहती हैं, हर समय हो हल्ला छाया रहता है, आज उसी


अनीता शर्मा Author : अनीता शर्मा, China
विमर्श (1)
प्रेम होता है तो हो, ध्रुव उसे क्यों करते हो...
01-Dec-2016 12:00 AM 1376 प्रेम होता है तो हो, ध्रुव उसे क्यों करते हो...

किसी-किसी के लिए वह सिर्फ एक अहसास भर है और किसी के लिए आहट-सा सुनायी पड़ता है। किसी के लिए वह ऐसी खुशबू है जो पलकों में इशारों की तरह बस गयी है। किसी के लिए वह एक ख्वाब-सा है और किसी के लिए हाथों म


ध्रुव शुक्ल Author : ध्रुव शुक्ल, INDIA
रम्य रचना (1)
राजनीतिक रंगमंच
01-Dec-2016 12:00 AM 1379 राजनीतिक रंगमंच

शेक्सपियर ने कहा था कि सारी दुनिया एक रंगमंच है और सभी लोग सिर्फ किरदार हैं। खैर, शेक्सपियर के अनुसार तो हम सब पैदाइशी अभिनेता हैं जिनका सूत्रधार भगवान है। जाने दीजिये। हम उन लोगों की बात कर रहे है


सुधा दीक्षित Author : सुधा दीक्षित, INDIA
शायरी की बात (1)
इस चमन के फूल को पत्थर न होने दीजिये
01-Dec-2016 12:00 AM 1424 इस चमन के फूल को पत्थर न होने दीजिये

ग़ज़ल को नए ढंग से परिभाषित करने वाले शायरों में जनाब प्रेमकिरण
साहब को बिलाशक शामिल किया जा सकता है। यूं नए शायरों को पढ़ना, नए अनुभव और अपरिचित क्षेत्र की यात्रा करने जैसा होता है। जहां पता नह


नीरज गोस्वामी Author : नीरज गोस्वामी ,
जन्नत की हकीकत (1)
अतियों के बीच झूलता अमरीकी समाज
01-Dec-2016 12:00 AM 1375 अतियों के बीच झूलता अमरीकी समाज

मूल रूप से अमरीकी समाज सनक की सीमा तक पहुंचा हुआ समाज है जिसकी अपनी कुंठाओं से मुक्ति नहीं हुई है। वैसे तो हर समाज की अपनी कुंठाएँ होती हैं और उसे उनसे मुक्त होते हुए अपने अस्त्तित्व पर खतरा लगता ह


रमेश जोशी Author : रमेश जोशी, USA
शिकागो की डायरी (1)
शिकागो में रंगमंच की दुनिया
01-Dec-2016 12:00 AM 1368 शिकागो में रंगमंच की दुनिया

रंगमंच हमें सब कुछ बता सकता है। कैसे देवताओं का स्वर्ग में वास है और कैसे कैदियों की भूल भूमिगत गुफाओं में दुर्बल है। कैसे जुनून हमें तरक्की तक लेकर जाता है और कैसे प्यार को बर्बाद कर सकता है। कैसे


अपर्णा राय Author : अपर्णा राय, USA
न्यूयॉर्क की डायरी (1)
भाषा की कशमकश
01-Dec-2016 12:00 AM 1349 भाषा की कशमकश

न्यूयॉर्क में प्रवासी भारतीयों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं। इसके लिये अलग-अलग नामों के तमाम संगठन काम कर रहे हैं, लेकिन इनके नामों की विविधता को छोड़ दिया जाये तो उनके उ


रामानुज शर्मा Author : रामानुज शर्मा,
सम्पादकीय (1)
तुम निरखो, हम नाट्य करें...
01-Dec-2016 12:00 AM 1372 तुम निरखो, हम नाट्य करें...

भारत की नाट्य परम्परा पूरे संसार में अपने विशिष्ट रंग प्रयोजनों के लिये विख्यात है। भारत के रंगमंच की जड़ें आदिम और पौराणिक समय से ही बहुत गहरी होती आयी हैं। पिछले दो ढाई हजार सालों में इनमें अनेक प


सुषमा शर्मा Author : सुषमा शर्मा, India
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