ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
2016 Aug
स्वराज-स्मृति (7)
आज़ादी की अभिधारणा
01-Aug-2016 12:00 AM 214 आज़ादी की अभिधारणा

भारतीय प्रायद्वीप के लिए अगस्त आज़ादी के उत्सव को मनाने का महीना है। इसी महीने इस भूभाग के दो राष्ट्र - भारत और पाकिस्तान, जो 1947 ई. के पहले ब्रिटिश उपनिवेश का हिस्सा थे, अपने सपूतों के अथक संघर्ष,


राजेश करमहे Author : राजेश करमहे, India
स्वाधीनता
01-Aug-2016 12:00 AM 144 स्वाधीनता

जिस प्रकार भी हो, हमें संघ को दृढ़प्रतिष्ठ और उन्नत बनाना होगा और इसमें हमें सफलता मिलेगी- अवशय मिलेगी। "नहीं' कहने से नहीं बनेगा! और किसी बात की आवशयकता नहीं- आवशयकता है केवल प्रेम, अकपटता और धैर्य


स्वामी विवेकानन्द Author : स्वामी विवेकानन्द, India
स्वराज्य
01-Aug-2016 12:00 AM 250 स्वराज्य

मेरे... हमारे... सपनों के स्वराज्य में जाति (रेस) या धर्म के भेदों का
कोई स्थान नहीं हो सकता। उस पर शिक्षितों या धनवानों का एकाधिपत्य
नहीं होगा। वह स्वराज्य सबके लिए-सबके कल्याण के लिए


मोहनदास करमचन्द गांधी Author : मोहनदास करमचन्द गांधी, India
नियति से वादा
01-Aug-2016 12:00 AM 245 नियति से वादा

कई सालों पहले, हमने नियति के साथ एक वादा (Tryst with Destiny) किया था, और अब समय आ गया है कि हम अपना वादा निभायें, पूरी तरह न सही पर बहुत हद तक तो निभायें। आधी रात के घंटे के समय, जब दुनिया सो रही


जवाहरलाल नेहरू Author : जवाहरलाल नेहरू , India
असमान बनने की स्वतंत्रता
01-Aug-2016 12:00 AM 217 असमान बनने की स्वतंत्रता

मैं समाजवाद का समर्थक नहीं हूं क्योंकि स्वतंत्रता ही मेरे लिए परम मूल्य है। उससे ऊपर कुछ नहीं। और समाजवाद बुनियादी तौर पर स्वतंत्रता के खिलाफ है। उसे होना भी चाहिए, यह अपरिहार्य है क्योंकि समाजवाद


ओशो Author : ओशो, India
स्वतंत्रता की जय
01-Aug-2016 12:00 AM 216 स्वतंत्रता की जय

इस शीर्षक के फूहड़पन से और उसकी नारेबाजी से मैं परिचित हूं। शायद यह पेकिंग की दीवाली पर लगे पर्चों की तरह थोथा और चीखता हुआ है। मेरी पीढ़ी के किसी आदमी के दिल में इतना उल्लास नहीं है कि वह आसमान गुंज


राजेन्द्र माथुर Author : राजेन्द्र माथुर, India
शब्दों की सत्ता अनमोल
01-Aug-2016 12:00 AM 221 शब्दों की सत्ता अनमोल

उन्नीस सौ अट्ठाईस। चांद का फाँसी अंक बाज़ार में आया। दो सौ साल की गोरी हुक़ूमत के ज़ुल्मों का दस्तावेज़। रामप्रसाद बिस्मिल, सरदार भगतसिंह और माखनलाल चतुर्वेदी जैसे देशभक्तों ने उसमें लेख और कविताएँ लिख


राजेश बादल Author : राजेश बादल, India
आवरण (4)
स्वतंत्रता और प्रेम
01-Aug-2016 12:00 AM 332 स्वतंत्रता और प्रेम

प्रेम का जितना सघन संबंध प्रेम से है उससे कहीं अधिक विश्वास से है। विश्वास और आत्मीयता के अपरिहार्य आकर्षण से ही प्रेम की नींव पड़ती है। जिसे सौंदर्य और व्यक्तित्व के मानक अपनी तरह से रचते हैं। जिसम


प्रो. डॉ. पुष्पिता अवस्थी Author : प्रो. डॉ. पुष्पिता अवस्थी, Netherlands
आजादी क्यों?
01-Aug-2016 12:00 AM 346 आजादी क्यों?

अजादी क्यों? सवाल बड़ा अजीब लगेगा क्योंकि प्रश्न तो यह होना चाहिये कि आजादी क्यों नहीं? पर अंग्रेजों ने 19वीं शताब्दी के अंत तक पूरे विश्व में यह बात सब के दिल-दिमाग में भर दी थी कि भारत सहित सभी का


हरिहर झा Author : हरिहर झा, ऑस्ट्रेलिया
आज़ादी के विरोधाभाष
01-Aug-2016 12:00 AM 338 आज़ादी के विरोधाभाष

आज़ादी एक बहुआयामी शब्द है। मूलतः यह राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, वैचारिक, धार्मिक हो सकती है। किसी भी देश और सभ्यता की दीर्घकालिक उन्नति एवं सम्पन्नता के लिए यह आवश्यक है कि उसका पूर्णतः आज़ाद अस्तित्


डॉ. योगिता मोदी Author : डॉ. योगिता मोदी , America
स्वतंत्रता और अनुशासन
01-Aug-2016 12:00 AM 346 स्वतंत्रता और अनुशासन

संसार के किसी विकसित देश से तुलना की जाये तो एक आम भारतीय कहीं अधिक आज़ाद है। चलती बसों में चढ़ने-उतरने से लेकर कहीं भी कचरा फैलाने, थूकने से लेकर नित्यक्रिया तक के लिये कहीं भी बैठ जाना सामान्य-सी ब


अनुराग शर्मा Author : अनुराग शर्मा, America
कविता (3)
चलना है जंतर मंतर
01-Aug-2016 12:00 AM 330 चलना है जंतर मंतर

पहिचान ये हमारी
फू-मंतर कर दो अन्दर
देख लें क्या हो रहा है
चलना है जंतर मंतर
क्यों हो रही है शंका
गोपाल है सिकंदर
राष्ट्र की नयी स्वतन्


अनन्तगोपाल रिसाल Author : अनन्तगोपाल रिसाल, INDIA
ईश आराधना
01-Aug-2016 12:00 AM 224 ईश आराधना

हवा बसंती
हलके से छुए मुझे---
सहलाए तन को,
और – स्फुरित कर दे मन को!

सुबह का सूरज
खिड़की से झाँकता सा--
अनंत आकाश को
अपन


विनीता खंडेलवाल Author : विनीता खंडेलवाल, INDIA
शूल
01-Aug-2016 12:00 AM 228 शूल

मैंने फूलों को भी
काँटों से प्यार करते देखा है
चुपचाप बातें करते देखा है
रात की अमराइयों में
सोये थे दोनों चुपचाप
सुबह देखा तो पत्ती-पत्ती


डॉ. ममता जैन Author : डॉ. ममता जैन, INDIA
शायरी की बात (1)
बंद अंधेरों के लिए ताज़ा हवा लिखते हैं हम
01-Aug-2016 12:00 AM 283 बंद अंधेरों के लिए ताज़ा हवा लिखते हैं हम

ये चाँद ख़ुद भी तो सूरज के दम से काइम है
ये ख़ुद के बल पे कभी चांदनी नहीं देते
गज़ब के तेवर लिए छोटी-सी, प्यारी-सी शायरी की किताब "जन गण मन" के लेखक हैं ब्लॉग जगत


नीरज गोस्वामी Author : नीरज गोस्वामी ,
जन्नत की हकीकत (1)
स्वच्छंदता के उपफल
01-Aug-2016 12:00 AM 280 स्वच्छंदता के उपफल

आदमी समस्त सृष्टि पर तो नियंत्रण नहीं कर सकता लेकिन अपने समाज, परिवार और अपने संपर्क में आने वाले सभी मनुष्यों, पशु-पक्षियों और यहाँ तक कि प्रकृति के अवयवों और उपादानों से भी अपनी और अपने समाज की व


रमेश जोशी Author : रमेश जोशी, USA
शिकागो की डायरी (1)
साल की छुट्टियां!
01-Aug-2016 12:00 AM 277 साल की छुट्टियां!

पराये देश में अगर कोई देश का मिल जाए तो ख़ुशी होती है, लेकिन अगर कोई अपना ही सगा आपके शहर के नजदीक हो तो इससे बड़ी खुशी की बात क्या होगी। हमने बच्चों की गर्मियों की छुट्टियों अपने भाई के पास जाकर मना


अपर्णा राय Author : अपर्णा राय, USA
सिंगापुर की डायरी (1)
सर्वज्ञता की खोज का मिशन
01-Aug-2016 12:00 AM 236 सर्वज्ञता की खोज का मिशन

आज़ादी के सही मायने आखिर हैं क्या? क्या सिर्फ नारे लगाने की छूट या बस अपने मन का करने की छूट को ही आज हम आज़ादी से जोड़ते हैं? क्या आजादी का सही अर्थ यह नहीं होना चाहिए कि आप अपने देश या इस यूनिवर्स क


डॉ. संध्या सिंह Author : डॉ. संध्या सिंह, Singapore
सम्पादकीय (1)
आज़ादी की कीमत
01-Aug-2016 12:00 AM 149 आज़ादी की कीमत

देश केवल लोगों के रहने की जगह का नाम नहीं है, वह तो सहकार भावना से जीवन को आपस में सँवारने की जगह है। किसी भी देश के लोग कभी भी अकेले-अकेले जीवन नहीं जी सकते, उन्हें तो साथ रहकर ही जीवन की सुन्दर क


सुषमा शर्मा Author : सुषमा शर्मा, India
नजरिया (1)
देशाटन का आनंद है अलग
01-Aug-2016 12:00 AM 230 देशाटन का आनंद है अलग

भारत की संस्कृति एक आत्मसंबद्ध निरंतर संस्कृति है इसलिए यहां का हर क्षेत्र सांस्कृतिक रूप से हर दूसरे क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। हम देश के दूसरे इलाके में भोजन करते हैं, तो हम नए स्वाद का अनुभव करने क


उदयन वाजपेयी Author : उदयन वाजपेयी, INDIA
समसामयिक (1)
पढ़ने-पढ़ाने का माध्यम
01-Aug-2016 12:00 AM 441 पढ़ने-पढ़ाने का माध्यम

नयी शिक्षा नीति के संबंध में कुछ सुझाव, टीएसआर सुब्रमनियम, पूर्व कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट शिक्षा मंत्रालय को सौंप दी है। केंद्र सरकार ने सारे देश से सुझाव मांगे हैं-


प्रेमपाल शर्मा Author : प्रेमपाल शर्मा, India
रपट (1)
बेलारूस में हिंदी समर कैंप
01-Aug-2016 12:00 AM 237 बेलारूस में हिंदी समर कैंप

छह से चौबीस जून 2016 तक "ज़ारनीत्सा" नामक समर कैंप सम्पन्न हुआ। बेलारूस के मिन्स्क नगर से 46 किलोमीटर की दूरी पर ओ.जे.एस.सी. इंटीग्रल द्वारा स्थापित किया गया यह हिन्दी भाषा स्टूडियो "अलंकार" आयोजन क


अलेसिअ माकोव्स्काया Author : अलेसिअ माकोव्स्काया , Belarus
विमर्श (1)
चित्रकूट पर्वत श्रृंखला
01-Aug-2016 12:00 AM 320 चित्रकूट पर्वत श्रृंखला

जैसा कि पहले अन्य लेखों में भी देखा जा चुका है, वाल्मीकि अपने कवित्त में प्राकृतिक सौन्दर्य का वर्णन करने में अद्वितीय है। उनके वर्णन से ऐसा प्रतीत होता है कि मानो कवि को राम का वन में इस तरह घूमना


डॉ. विजय मिश्र Author : डॉ. विजय मिश्र, INDIA
रम्य रचना (1)
आज़ाद हूँ दुनिया के चमन म
01-Aug-2016 12:00 AM 286 आज़ाद हूँ दुनिया के चमन म

आह! यह बेरोकटोक जीने का अहसास मन को मुदित कर देता है। यूँ भी क़ैद में कौन रहना चाहता है हुज़ूर? लोग बाग़ तो धरती की सीमाओं को तोड़कर आकाश में उड़ना चाहते हैं। पर क्या यह सम्भव है? रूसो के अमर शब्दों में


सुधा दीक्षित Author : सुधा दीक्षित, INDIA
पुस्तक-अंश (1)
हम जो समझा किये
01-Aug-2016 12:00 AM 155 हम जो समझा किये

कागज पर कभी कोई सवाल हल नहीं हो पाता। वह उन कागजों को पढ़ डालने से भी हल नहीं होता जो सदियों से लिखे पड़े हैं। कई पीले पड़कर सड़ गये, कई हवा में उड़ गये। दुनिया कागज सँभालकर थक गयी है पर उन्हें रोज कोई


ध्रुव शुक्ल Author : ध्रुव शुक्ल, INDIA
पुस्तक-चर्चा (1)
पॉल की तीर्थयात्रा
01-Aug-2016 12:00 AM 228 पॉल की तीर्थयात्रा

अर्चनाजी पैन्यूली के उपन्यास "पॉल की तीर्थयात्रा" ने वर्जीनिया वुल्फ़ के 1925 में प्रकाशित उपन्यास "मिसिज डेलोवेे" की याद दिला दी जो मनश्चेतन-प्रवाह-पद्धति (Stream of Consciousness) का संभवत: प्रथम


डॉ. के.एस. भारद्वाज Author : डॉ. के.एस. भारद्वाज, INDIA
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