ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
महाकुम्भ की घड़ी
महाकुम्भ की घड़ी

भारतीय सनातन संस्कृति शा?ात मूल्यों और सिद्धांतों के आधार पर विकसित हुर्इं है। सनातन का अर्थ ही है - शा?ात, निरन्तर और चिरस्थायी और इस प्रकार सनातन धर्म का अर्थ - शा?ात, निरन्तर, चिरस्थायी और दृढ़ तत्त्व (द्रद्धत्दड़त्द्रथ्ड्ढ) हो जाता है। व्युत्पत्ति शास्त्र के अनुसार धर्म और अंग्रेजी शब्द फर्म (ढ ...

महाकाल की छाया में अमृत का प्लावन
महाकाल की छाया में अमृत का प्लावन

कुम्भ पर्व को सुनते ही पवित्र जल श्रोत पर एक उमड़ता महा जनसमुद्र स्मृति में कौंध जाता है। यह एक नहान (स्नान) की ओर उन्मुख तीर्थ यात्रा का आखिरी पड़ाव होता है, जिसमें भिन्न-भिन्न जाति, वर्ग, आयु और समुदाय के भांति-भांति के देसी परदेसी लोग शामिल होते हैं। सालों पहले प्रयाग के कुम्भ में शामिल होने का ...

उज्जयिनी : मोक्ष नगरी
उज्जयिनी : मोक्ष नगरी

कथा की शुरूआत तब से होती है, जब देवताओं ने शिव के निवास के लिये एक उपयुक्त स्थान को चुनने का काम किया। उन्होंने इसके लिये विद्वतजनों की सभा आहूत की। सभा में ऐसे विद्वान आमंत्रित किये गये, जो धर्म, विज्ञान, भूगोल, भौतिकी, ज्योतिष के जानकार थे। विद्वानों के सात दल गठित कर सभी दिशाओं में एक उपयुक्त ...

कुम्भ और कुम्भीपाक
कुम्भ और कुम्भीपाक

समुद्र-मंथन से अमृत निकलता है और विष-वारुणी भी। जब विष्णु वि?ामोहिनी का रूप धारण करके धोखे से दानवों को वारुणी और देवों को अमृत पिलाते हैं तो वे एक ही बर्तन में अन्दर से दो भाग करके अमृत और वारुणी रखते हैं। जीव के इसी कुम्भ में अमृत और वारुणी ही नहीं, समुद्र मंथन वाले सभी चौदह रत्न है।
अगस्त ...

अखाड़ों में छलकती कुम्भ कथा
अखाड़ों में छलकती कुम्भ कथा

कुम्भ और कलश भारतीय संस्कृति के शुभ प्रतीक हैं। संभव है कि कुम्भ मेलों की शुरुआत इन्हीं शुभंकरों के साथ हुई हो। इसीलिए इन्हें कुम्भ कहा जाने लगा हो। इस मेले लगने के स्थान का निर्धारण राशियों की स्थिति पर निर्भर होता है।
कुम्भ मेला भी है और पर्व भी। एक ऐसा पर्व जो "वसुधैव कुटुंबकम्' की भावना ...

जल की महिमा अंग्रेजी से अनुवाद - संजीव त्रिपाठी
जल की महिमा अंग्रेजी से अनुवाद - संजीव त्रिपाठी

शायद आदि मानव की पहली कुछ खोजों में यह शामिल रहा होगा कि, जीवित रहने के लिए वायु और जल का अलग-अलग महत्व है। वायु हमारे पास आती है और हम श्वाँस लेते है, परन्तु पानी की आवश्यकता पूर्ति करने के लिए हम को उसके पास जाना पड़ता है। मानव शरीर सामान्य सीमा तक वायु की गंध और अशुद्धता को निथार सकता है, लेकिन ...

कुंभ का वैज्ञानिक पक्ष
कुंभ का वैज्ञानिक पक्ष

कुम्भ के दो पहलू हैं। पहला पक्ष है पुराणों से उद्धृत है, ज्योतिष शास्त्र भी मान्यता देता है लेकिन ज्योतिष शास्त्र ज्यादा पुराना है और इसे पहले से मान्यता दे रहा है। ज्योतिष शास्त्र के हिसाब से सूर्य, चंद्रमा, गुरु और शनि की विशेष युतियों में कुछ खास किस्म की खगोलीय ऊर्जाएं पृथ्वी पर चुनिंदा स्थान ...

दुनिया की नज़र में कुम्भ
दुनिया की नज़र में कुम्भ

कुम्भ मेला केवल एक मेला ही नहीं वरन विभिन्न भाषा, संस्कृति और क्षेत्रों से आने वाले आस्तिक और नास्तिकों के मिलन का एक केंद्र है। मेले के दौरान जो विशाल जन समूह दिखता है, अगर उसे जन समुद्र का नाम दिया जाए तो अतिशयोक्ति न होगी। यह मानवता का अनंत प्रवाह है, जो सदियों से अनवरत चला आ रहा है, जिसकी पुष ...

महाकुंभ और वैश्विक गांगेय संस्कृति
महाकुंभ और वैश्विक गांगेय संस्कृति

भारत से बाहर विश्व के अन्य देशों के भारतवंशियों और भारतीयों के जीवन में भोलेशंकर बाबा से जुड़े पर्वाें का विशेष माहात्म्य है। हर माह की शिवरात्रि से लेकर महाशिवरात्रि तक का इसमें प्राधान्य रहता है जिसके अंतर्गत भारतवर्ष में शिव भक्ति की उपासना के विधानों में कॉवरियाँ, (सावन माह) मकर संक्रांति का न ...

कुम्भ के बहाने क्रिसमस स्मरण
कुम्भ के बहाने क्रिसमस स्मरण

यूरोप का ऐसा कोई बड़ा पर्व नहीं है जैसा भारत में कुम्भ मेला है कि लोग सब दिशाओं से आकर एक स्थान इकट्ठे हो जाएँ। ईसाई धर्म भी इतना प्राचीन नहीं है जितना हिंदू धर्म है। हाँ सारे यूरोप में क्रिसमस मनाया जाता है लेकिन हर देश में मनाने का अपना तरीक़ा है और यह भी बदलता रहता है। आगे यहाँ मध्य यूरोप के क्र ...

कुम्भ में जल हो!
कुम्भ में जल हो!

कुम्भ, घड़ा, घट, कलश आदि सब एक ही परिवार के शब्द हैं। लेकिन भगवान "घट घट
 वासी' हैं, घड़े-घड़े वासी नहीं। भक्ति में कलश को कैलाश से जोड़ दिया। अधिक प्यार आया तो किसी घड़े को गागर और गगरी भी कह दिया। अधजल गगरी को छलकने का अवसर मिला। लोगों पर घड़ों पानी पड़ने की नौबत भी आ गई। कोई लुटिया ही डुबाने लगे। हमन ...

चलो मन गंगा-जमुना के तीर
चलो मन गंगा-जमुना के तीर

मन की शांति के लिए दरिया के किनारे से अच्छा स्थल और कोई नहीं हो सकता। रसखान के "कालिंदी कूल' में जितना आनंद है, उतना ही मथुरा के लोक गीतों में जमुना को लेकर है - आज ठाड़ो री बिहारी जमुना तट पे, मत जइयो री अकेली पनघट पे।
प्रयाग में तो गंगा और जमुना दोनों का संगम है। वैसे दोनों ही नदियां भारत क ...

स्मृतियों में कुम्भ मेला
स्मृतियों में कुम्भ मेला

सितबंर माह की गुलाबी ठंड का धीमे-धीमे आगमन हो रहा था जब कुम्भ में शामिल होने के लिये मैं मुम्बई से नासिक के लिये रवाना हुआ। नासिक से मुम्बई की दूरी लगभग २०० किलोमीटर की है किंतु चार-पांच घंटे की यात्रा में उल्लास एवं उत्साह का माहौल था। ईगतपुरी आते-आते कुंभ मेले में घूमने आए कई साधु-संतों का जमाव ...

श्रद्धा का समाजवादी पर्व
श्रद्धा का  समाजवादी पर्व

हम तीन लोग एक टेंट में सो रहे थे। साथी रिपोर्टर मनीष श्रीवास्तव, छायाकार विनय पाण्डेय और मैं। मुझे भीषण सर्दी लगी तो आंख खुल गई। बगल से दांत किटकिटाने की आवाज़ आयी तो पलटा। देखा मनीष के दांत बज रहे थे। हमारे पास चारपाई थी, गद्दे और रजाइयां थीं पर एक तो जनवरी की रात, ऊपर से खुला मैदान और गंगा का कि ...

सुलगती टहनी
सुलगती टहनी

मैं इस मेले में खाली होकर आया था। सब कुछ पीछे छोड़ आया था- तर्कबुद्धि, ज्ञान, कला, जीवन का एस्थेटिक सौन्दर्य। मैं अपना दुख और गुस्सा और शर्म और पछतावा और लांछना-प्रेम और लगाव और स्मृतियाँ भी छोड़ आया था। मैं बिल्कुल खाली होकर आया था- खाली और चुप- क्योंकि शब्द बहुत पहले किसी काम के नहीं रहे थे। चुप ...

मेघदूत में उज्जयिनी
मेघदूत में उज्जयिनी

विशाला उज्जयिनी का दूसरा नाम है। यह नगरी सब प्रकार से विशाल है। शोभा, सम्पत्ति और शालीनता यहां विग्रहवती होकर वास करती हैं, इसीलिए मैं इसे "श्रीविशाला विशाला' कहता हूं। मेरा ऐसा विचार है कि स्वर्ग में अपने पुण्यों का फल भोगने वाले कृतीजन पुण्य समाप्त होने के पहले ही स्वर्ग के कान्तिमान खंड को लेक ...

प्रकृति, ईश्वर और मनुष्य
प्रकृति, ईश्वर और मनुष्य

प्रकृति ने विधाता को प्रणाम किया, "पिता, यह किस साज में सजाया मुझे? यह विन्यास, यह परतों में गूँथा संगठन, यह सुर, छन्द, लय और ध्वनि! विविधता तथा वैचित्र्य का मनोहारी सौन्दर्य; पर साथ ही कण-कण पर, बिखराव का सतत दबाव, प्रत्येक पल बिखरने के संकट की उपस्थिति का तनाव! यह कैसा विधान है कि वृद्धि के लिए ...

प्रकृति, ईश्वर और मनुष्य
प्रकृति, ईश्वर और मनुष्य

प्रकृति ने विधाता को प्रणाम किया, "पिता, यह किस साज में सजाया मुझे? यह विन्यास, यह परतों में गूँथा संगठन, यह सुर, छन्द, लय और ध्वनि! विविधता तथा वैचित्र्य का मनोहारी सौन्दर्य; पर साथ ही कण-कण पर, बिखराव का सतत दबाव, प्रत्येक पल बिखरने के संकट की उपस्थिति का तनाव! यह कैसा विधान है कि वृद्धि के लिए ...

भारतीय अध्यात्म के अबूझ बिम्ब
भारतीय अध्यात्म के अबूझ बिम्ब

एक विज्ञापन में लिखा है, आध्यात्मिक वस्तुएं- माला, चन्दन, अगरबत्ती सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। इसमें अध्यात्म शब्द के प्रयोग से यह भ्रम पैदा करने की कोशिश की है कि अध्यात्म "वस्तु' में हैं जिनके प्रयोग से आप स्वत: आध्यात्मिक हो जायेंगे। इतना ही क्यों रत्न धारण व टोने-टोटकों से आध्यात्मिक शक्ति बढ़ा ...

कुम्भ कविताएँ
कुम्भ कविताएँ

(१)
एक समय था
जब देवताओं की भी मृत्यु होती थी
और असुरों की भी

गुजरते थे वे भी
जन्म और मरण के चक्र से

रहे होंगे औरों के वि·ाासों में
देवता स्वभावत& अमर

इस देश में अमरता का
अर्जन करना पड़ता है

दूध का समुद्र है
...

शिकागो में होली
शिकागो में होली

हिरण्यकश्यप और प्रह्लाद की पारम्परिक कथा के साथ ही आजकल होली का त्यौहार एक नए रूप में प्रचलित हो गया है। आज के माहौल का प्रखर विचार "लेट ईट गो...' पूरी तरह से होली के त्यौहार को जैसे और रंग भर देने जैसा है। छोटी-सी जिंदगी, गिले-शिकवे में निकालने से बेहतर है मिल-जुलकर जीवन जिया जाये। ऐसा ही कुछ वा ...

बाबाओं के कुम्भ में एक जिज्ञासु
बाबाओं के कुम्भ में एक जिज्ञासु

सब कुछ अविस्मरणीय... अकल्पनीय... सपना सच होने जैसा। धर्मप्राण जनता-जनार्दन के अंत:करण में हिलोरे मारती आस्था और व्यवस्था के बीच अव्यवस्था का आनंद। संगम स्नान के तदंतर हर चेहरे पर खिली अजब सी मुस्कान मानो बताती है कि अमृतपान हो गया है। ठाठ बाबाजी लोगों के हैं। देश की अलग-अलग सभ्यता संस्कृति खेमों ...

स्मृतिगंधा
स्मृतिगंधा

जैसे पूरा यथार्थ आमने-साने की पहाड़ियों के बीच फैला है। एक पहाड़ी उजाले की दूसरी अंधेरे की। उजाले में अंधेरे की पहाड़ी दिखाई देती है-- उजाले को अपने पास बुलाती, इतने पास कि उजाले की पहाड़ी अंधेरे में डूब जाती है। सब कुछ एक ही कौंध में चमकता है, एक ही कालिमा में डूब जाता है।
हम सुबह से शाम तक भटक ...

एक आध्यात्मिक नजरिया, जीने की एक राह (अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद गंगानंद झा)
एक आध्यात्मिक नजरिया, जीने की एक राह (अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद गंगानंद झा)

एशिया और यूरोप के बीच अन्तर स्पष्ट करने के लिए
    लोग एशियाई मन की धार्मिक रुझान एवम् यूरोपीय
    मानसिकता के वैज्ञानिक मिजाज की चर्चा करते हैं। इस अन्तर को इस तथ्य से आधार मिलता है कि वि·ा के करीब करीब सारे ही धर्म एशिया में प्रवर्तित हुए और आधुनिक सभ्यता की ...

अवधूता, गगन घटा गहरानी
अवधूता, गगन घटा गहरानी

अदिम मनुष्य बादल, आसमान, सागर, तूफान, नदी, पहाड़, विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों, जीव-    जन्तुओं के बीच अपने आपको असुरक्षित, असहाय और असमर्थ महसूस करता था। वह भय, कौतूहल और जिज्ञासा से विह्वल हो जाता था। उसका जीवित रह पाना उसके अपने परिवेश की जानकारी और अवलोकन पर निर्भरशील था, इसलिए अ ...

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